चहीतों की जुगलबंदी में सूचनाओं का कत्ल! निजी महफिलों में प्रेस नोट

चहीतों की जुगलबंदी में सूचनाओं का कत्ल! निजी महफिलों में प्रेस नोट

  • विशेषाधिकार या तानाशाही? जब पुलिस की सूचनाएं केवल 'खास' दरबारियों की जागीर बन जाएं तो देवबंद के इस लोकचंद्र मे आपका स्वागत है
  • सूचनाओं का गला घोंटा जा रहा है ताकि अवैध धंधे और चहीतों की सेटिंग बेखौफ चलती रहे। डिजिटल इंडिया का मजाक

देवबंद। देवबंद क्षेत्र में पत्रकारिता और प्रशासन के बीच की पारदर्शी दीवार अब ढहती नजर आ रही है जहाँ एक ओर आधिकारिक सूचना तंत्र दम तोड़ चुका है वहीं दूसरी ओर चहीतों और उनके आकाओं की जुगलबंदी ने सूचनाओं को निजी स्वार्थ की वस्तु बना दिया है हालत यह है कि थाना मीडिया ग्रुप' सालों से सूना पड़ा है जबकि चहीतों के निजी ग्रुपों में प्रेस नोट की बंदरबांट हो रही है।

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​डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ सूचनाएँ पलक झपकते पहुँचनी चाहिए वहीं देवबंद थाने का आधिकारिक मीडिया ग्रुप एक 'खंडहर' बन चुका है अब चर्चा आम है कि इन चहीतों ने अपने स्वार्थ के लिए पत्रकारिता का स्तर इतना गिरा दिया है कि बरेली के बाजार में गिरा झुमका भी इनके सामने कमतर नजर आए प्रेस नोट अब जनता तक नहीं बल्कि केवल उन 'चहीतों' तक पहुँचते हैं जो अधिकारियों की चाटुकारिता करने में लीन हैं।

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जनता की सेहत से खिलवाड़ और प्रशासनिक विफलता पर हेडलाइन लिखने की हिम्मत इनमें नहीं है, क्योंकि ये खुद उस तंत्र का हिस्सा बन चुके हैं सूचनाओं को दबाने और चहीतों को आगे बढ़ाने का असली मकसद तब ही सामने आ गया था जब अक्टूबर 2024 में पुलिस कार्यवाही कराने के नाम पर थाना प्रभारी के नाम से दस हजार रुपये ऐंठने का मामला प्रकाश में आया यह उस ठगी की याद दिलाता है जहाँ सेंट्रो कार के विवाद में चहीतों ने पुलिस व्यवस्था का हवाला देकर पीड़ितों को लूटा था। 

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​तब से थानों और चौकियों में कैसी 'जुगलबंदी' चल रही है, यह किसी से छिपा नहीं है जब सूचनाओं को चंद चहीतों तक समेट दिया जाता है तो भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हो जाती हैं सवाल यह है कि अगर पुलिस और प्रशासन की सूचनाएँ केवल निजी समूहों और चहीतों की जागीर हैं, तो आम जनता और स्वतंत्र पत्रकारों का क्या? क्या ज़िला प्रशासन भी इन चहीतों के साथ इस मौन समझौते में शामिल रहेगा? थाना मीडिया ग्रुप का सालों से सूना रहना इस बात का प्रमाण है कि सूचनाओं का गला घोंटा जा रहा है ताकि अवैध धंधे और चहीतों की सेटिंग बेखौफ चलती रहे।

रिपोर्ट - दीन रज़ा








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