स्वास्थ्य विभाग का अति संवेदनशील गांवों पर फोकस, AI की रिपोर्ट पर तहसील के 7 गांव 'अति संवेदनशील' घोषित,

स्वास्थ्य विभाग का अति संवेदनशील गांवों पर फोकस, AI की रिपोर्ट पर तहसील के 7 गांव 'अति संवेदनशील' घोषित, 

  • चिह्नित क्षेत्र, देवबंद, रणखंडी, जड़ौदा जट्ट, मानकी, मिरगपुर, गोपाली, और भायला कलां जैसे गांव शामिल हैं
  • आने वाले कुछ सप्ताह तक लगातार जारी रहेगा स्वास्थ्य विभाग का अभियान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

देवबंद। भारत सरकार के 'टीबी मुक्त भारत' अभियान को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने देवबंद तहसील में एक विशेष रणनीति के तहत मोर्चा खोल दिया है स्वास्थ्य विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार की गई डेटा रिपोर्ट के आधार पर देवबंद क्षेत्र के 7 गांवों को 'अति संवेदनशील' श्रेणी में रखा है। इन गांवों में टीबी (क्षय रोग) के संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 'डोर-टू-डोर' स्क्रीनिंग और ऑन-द-स्पॉट जांच का सघन अभियान शुरू कर दिया है।

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​स्वास्थ्य विभाग इस बार टीबी के खिलाफ जंग में आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। पिछले कुछ वर्षों के संक्रमण डेटा, जनसंख्या घनत्व और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का एआई विश्लेषण करने के बाद विभाग ने तहसील के कुछ खास इलाकों को 'रेड जोन' के रूप में चिन्हित किया है इन क्षेत्रों में संक्रमण फैलने की दर सामान्य से अधिक पाई गई है।

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​प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, जिन गांवों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है, उनमें, ​रणखंडी, ​जड़ौदा जट्ट, ​मानकी, ​मिरगपुर, ​गोपाली, ​भायला कलां, ​देवबंद शहरी क्षेत्र के घने मोहल्ले शामिल हैं ​अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें जिसमें लैब टेक्नीशियन, एएनएम और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं इन गांवों में डेरा डाले हुए हैं।

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​टीम के सदस्य घर-घर जाकर लोगों से उनके स्वास्थ्य का हाल पूछ रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक खांसी, शाम को बुखार या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण हैं, तो उनका तुरंत बलगम टेस्ट किया जा रहा है कई जगहों पर विभाग पोर्टेबल मशीनों का उपयोग कर रहा है, जिससे मौके पर ही संदिग्धों के फेफड़ों की स्थिति जांची जा रही है। जांच में पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों को तुरंत 'निक्षय पोर्टल' पर पंजीकृत किया जा रहा है, ताकि उन्हें मुफ्त दवाओं के साथ-साथ सरकार की ओर से दी जाने वाली ₹500 प्रति माह की पौष्टिक आहार सहायता (निक्षय पोषण योजना) सीधे उनके बैंक खाते में मिल सके।

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​मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, यह अभियान आने वाले कुछ सप्ताह तक लगातार जारी रहेगा। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जांच टीमों का सहयोग करें और बीमारी को छुपाने के बजाय समय पर जांच कराएं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर इलाज शुरू होने से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।

​रिपोर्ट: दीन रज़ा, देवबंद

Deen Raza

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