सफाई व्यवस्था को लेकर नगर पालिका ने मूंदी आंखें
- जुमे के दिन मस्जिद के बाहर बह रहा नालियों का मल-मूत्र, क्य़ा कुछ करेंगे नगर पालिका अधिशासीधिकारी
देवबंद। 'स्वच्छ भारत अभियान' के दावों के बीच देवबंद नगर पालिका परिषद की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नगर के सफाई विभाग के "कागजी घोड़े" फाइलों में तो सरपट दौड़ रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति नारकीय बनी हुई है। मोहल्ला नीमतला सहित कई इलाकों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
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सबसे शर्मनाक स्थिति मोहल्ला नीमतला के पास देखने को मिली, जहां आज जुमे के दिन भी मस्जिद के ठीक बाहर नाले और नालियां चौक होने के कारण मल-मूत्र और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है नमाजियों को इसी गंदे पानी और बदबू के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है स्थानीय लोगों का कहना है कि पवित्र दिन होने के बावजूद नगर पालिका ने सफाई की सुध लेना उचित नहीं समझा, जो सीधे तौर पर लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था के साथ खिलवाड़ है।
सिर्फ नीमतला ही नहीं, बल्कि पूरेमोहल्ले और उसके आसपास के क्षेत्रों में जगह-जगह कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए हैं। नालियां जाम होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर जमा है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आते और शिकायत करने के बावजूद कोई सुनने वाला नहीं है।
"नगर पालिका प्रशासन को जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। सफाई विभाग पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। फाइलों में शहर चकाचक है, लेकिन सड़कों पर बहता नाले का पानी हकीकत उजागर कर रहा है।
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इस बदहाली ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिशासी अधिकारी (EO) की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधि मौन क्यों? स्थानीय सभासदों को अपने ही वार्ड की यह दुर्दशा क्यों नजर नहीं आ रही है? क्या वे चुनाव के समय किए गए वादों को भूल चुके हैं? अधिशासी अधिकारी और नगर पालिका परिषद देवबंद के सफ़ाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अब इस गंदगी और भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्या सफाई देंगे, इसका जनता को इंतजार है।
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया और जाम नालियों को साफ नहीं कराया गया, तो वे नगर पालिका कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे। लोगों का कहना है कि वे टैक्स भरते हैं, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ बदबू, गंदगी और बीमारियां मिल रही हैं। देवबंद नगर पालिका के सफाई विभाग की यह लापरवाही न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या जनता इसी तरह नरक में जीने को मजबूर रहेगी।





