देवबंद में लगातार जारी है मौत का खेल; थोड़ी देर का हंगामा, फिर सन्नाटा

देवबंद में लगातार जारी है मौत का खेल; थोड़ी देर का हंगामा, फिर सन्नाटा

  • ​कुकुरमुत्तों की तरह खुले नर्सिंग होम, योग्यताहीन सर्जन बने इंसानों की जान के सौदागर; स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक
  • ​सांपला रोड, मजनू वाला रोड, मंगलौर रोड और जीटी रोड के बाद अब रेलवे रोड स्थित अस्पताल में महिला की मौत
  • ​गरीबों की लाशों पर दलाली करने वाले 'खबरों के दलाल' निभा रहे खबर दिखाने की औपचारिकताएं

​देवबंद। बीते दिनों नगर में उपचार के दौरान लापरवाही के कारण हुई मौत ने एक बार फिर चर्चाओं को जन्म दिया है, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात—शून्य। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए 24 घंटे सक्रिय रहने का दावा करने वाले 'खबरों के दलालों' ने केवल सोशल मीडिया पर खबर दिखाने की औपचारिकता पूरी की है। किसी भी राष्ट्रीय, प्रादेशिक या जनपदीय समाचार पत्र में इस घटना को कितनी जगह दी गई, यह किसी से छिपा नहीं है।

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​ताजा घटनाक्रम रेलवे रोड स्थित आशा सनावर हॉस्पिटल से जुड़ा है। अस्पताल में उपचार के दौरान कुटेसरा गांव की एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। महिला की मृत्यु के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए। परिजनों के अनुसार, कुटेसरा गांव की रहने वाली महिला को उपचार के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन गलत उपचार के कारण उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी जान चली गई।

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​खबर मिलते ही मृतका के मायके और ससुराल पक्ष के सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंच गए। परिजनों का गुस्सा इस बात पर और बढ़ गया कि सांत्वना देने के बजाय अस्पताल प्रशासन का व्यवहार काफी अहंकारपूर्ण रहा।

​जहां तक अस्पताल के रसूख की बात है, तो कहावत सटीक बैठती है—"जब सैंया भए कोतवाल, तो अब डर काहे का।" लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या देवबंद नगर में यह पहली घटना है या आखिरी? इससे पूर्व भी सांपला रोड, मजनू वाला रोड, मंगलौर रोड और जीटी रोड पर स्थित अस्पतालों से मौत की खबरें आती रही हैं।

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​विचित्र बात यह है कि कभी भी इन नर्सिंग होम के मानकों या सर्जनों की योग्यता की जांच नहीं की जाती। देवबंद नगर में राशन की दुकानों से ज्यादा नर्सिंग होम खुल गए हैं और 'मौत का खेल' बदस्तूर जारी है।

​शेष क्रमशः

पत्रकार : दीन रज़ा








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