स्वच्छ भारत के नारों के बीच कचरे के ढेर में तब्दील हुआ ऐतिहासिक शहर

स्वच्छ भारत के नारों के बीच कचरे के ढेर में तब्दील हुआ ऐतिहासिक शहर

  • देवबंद नगर के मुख्य रास्ते और चौक बन चुके हैं अघोषित कूड़ेदान। क्य़ा ध्यान देंगे आलाधिकारी? 
  • देवबंद नगर के वरिष्ट चाटुकारों से सांठगांठ रखते हैं सफाई एवं खाद्य निरीक्षक पोपीन कुमार

देवबंद। कहने को तो देवबंद एक ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध नगर है लेकिन नगर पालिका प्रशासन की अकर्मण्यता ने इसे गंदगी का नरक बना दिया है शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है जिससे स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है हैरानी की बात यह है कि सफाई के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर जनता गंदगी और बदबू के बीच रहने को मजबूर है या मजबूर कर दी गई है।

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​नगर पालिका देवबंद की पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद के आसपास का क्षेत्र गंदगी के अंबार से पटा पड़ा है यहां आने वाले देश-विदेश के मेहमानों के सामने नगर की जो छवि बन रही है, वह शर्मनाक है मगर इस से नगर पालिका सत्ता मे बेठे जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

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​मुहल्ले बडजियाउलह्क पर आलम य़ह की मस्जिद के ठीक सामने कूड़े का विशाल ढेर लगा हुआ है नमाजियों को बदबू के बीच से गुजरना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही वहीँ नगर के मुख्य रास्तों को कूड़ा डालने का अड्डा बना दिया गया है मुख्य रास्ते हों या मैंन चौक बड़ी गली हो या छोटी गली हर जगह को अघोषित कूड़ेदान बना दिया गया है। 

विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो नगर पालिका परिषद देवबंद के सफाई विभाग की इस 'मस्ती' के पीछे गहरे भ्रष्टाचार और सेटिंग का खेल नजर आता है स्थानीय लोगों ने सफाई एवं खाद्य निरीक्षक पोपीन कुमार के खिलाफ भारी आक्रोश है मोहल्ले वासियों का सीधा आरोप है कि सफाई एवं खाद्य निरीक्षक की ऊंची पहुंच और कुछ स्थानीय मीडिया प्रभारियों से उसकी 'खास सांठगांठ' है इसी कारण शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती आला अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है और जनता की समस्याओं को दबा दिया जाता है।

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दिलचस्प य़ह भी है कि एक तरफ जहां पूरा शहर कचरे के ढेर पर बैठा है, वहीं चंद चुनिंदा क्षेत्रों में सफाई की चकाचौंध दिखाई देती है सवाल है कि क्या नगर पालिका का बजट सिर्फ चंद वीआईपी गलियों के लिए है? क्या आम नागरिक टैक्स नहीं देता जो उसे गंदगी के ढेर पर रहने को मजबूर किया जा रहा है? बता दें कि दारूल उलूम क्षेत्र के रास्ते और छोटी गलियों सहित ख़ानक़ाह और बडजियाउलह्क सफ़ाई को लेकर नगर पालिका परिषद देवबंद की कार्यप्रणाली शर्मनाक ही नही अत्यंत चिंता का विषय भी है नगर पालिका देवबंद की यह सुस्ती किसी बड़ी महामारी को दावत दे रही है यदि समय रहते संबंधित विभाग पर नकेल नहीं कसी गई, तो देवबंद की जनता इस बदहाली का जवाब आगामी समय में जरूर देगी।

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब बातें बहुत हो चुकीं हैं अब ठोस काम चाहिए अगर जल्द ही बड़जियाउलहक और दारुल उलूम क्षेत्र से गंदगी के अंबार नहीं हटाए गए और भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर अंकुश नहीं लगा, तो नगरवासी सड़कों पर उतरने और नगर पालिका देवबंद का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।

रिपोर्ट - दीन रज़ा







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