उपभोक्ता या अपराधी? देवबंद में भारी दल-बल के साथ छापेमारी से नागरिकों में आक्रोश
- देवबंद की 85% से ज्यादा जनता बिजली विभाग से त्रस्त, कटौती ने तोड़ा रिकॉर्ड
- बिजली देने में फेल, लेकिन डराने में अव्वल है देवबंद विद्युत विभाग
देवबंद। सहारनपुर जनपद का देवबंद क्षेत्र इन दिनों विद्युत विभाग की तानाशाही और बदइंतजामी का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ जहां अघोषित बिजली कटौती ने नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है, वहीं दूसरी ओर विभाग द्वारा विजिलेंस छापेमारी के नाम पर फैलाए जा रहे 'खौफ' ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
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'DRD NEWS LIVE 24' द्वारा कराए गए एक स्थानीय सर्वे में बिजली विभाग के दावों की पोल खुल गई है। सर्वे के नतीजे विभाग के खिलाफ जनता के भारी गुस्से को दर्शाते हैं 87% लोगों ने माना भारी कटौती सर्वे में शामिल होने वाले अधिसंख्य नागरिकों ने कहा कि क्षेत्र में बिजली की स्थिति 'बहुत खराब' है और कटौती का कोई समय निर्धारित नहीं है मात्र 2% संतुष्ट बिजली आपूर्ति से संतुष्ट होने वालों की संख्या नगण्य है, जो विभाग की कार्यक्षमता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
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नगर वासियों में इस बात को लेकर सबसे अधिक आक्रोश है कि बिजली विभाग अपने वैध उपभोक्ताओं के साथ 'लाभार्थियों' जैसा सलूक कर रहा है स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग यह भूल गया है कि उपभोक्ता बिल का भुगतान करते हैं, वे कोई खैरात नहीं ले रहे छापेमारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नागरिकों ने कहा कि विद्युत विभाग भारी दल-बल और पुलिस फोर्स के साथ मोहल्लों में छापेमारी कर रहा है। ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे पूरा नगर अपराधी हो भारी फोर्स का प्रदर्शन कर देवबंद के नागरिकों को मानसिक रूप से डराने और प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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जनता का कहना है कि आपूर्ति विभाग अपनी कमियों और लाइन लॉस को छिपाने के लिए आम आदमी को निशाना बना रहा है भीषण गर्मी में घंटों बिजली गुल रहने के कारण व्यापार और घरेलू कार्य पहले ही प्रभावित हैं ऊपर से विजिलेंस का भय लोगों को और अधिक परेशान कर रहा है नगर वासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच करनी है तो उसका तरीका पारदर्शी और सम्मानजनक होना चाहिए न कि दहशत फैलाने वाला।
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स्थानीय संगठनों और नागरिकों ने विभाग को आगाह किया है कि यदि बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया और विजिलेंस के नाम पर उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन की राह पकड़ेंगे। जनता अब 'अंधेरे' और 'अन्याय' को एक साथ बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
रिपोर्ट - दीन रज़ा


