विकास के नाम पर क्य़ा दे रहे हैं नगर पालिका अध्यक्ष विपिन गर्ग
- क्य़ा बुनियादी सुविधाओं के लिए भी बजट नही जुटा पा रहे हैं नगर पालिका अधिशासी अधिकारी देवबंद
- बदलते मौसम के मिजाज़ मे नगर मे बढ़ी मच्छरों की आबादी से फेला डेंगू मलेरिया का नया संकट
- क्य़ा नगर देवबंद के 25 वार्डो मे कीटनाशक व एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ है? यक़ीनन नही हुआ है
- विकास' के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं का 'सूखा', मच्छरों के आतंक से दहशत
देवबंद। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक नगर देवबंद में विकास की बातें कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। जैसे-जैसे मौसम का मिजाज बदल रहा है और लू के थपेड़ों ने नगर को झुलसाया है, उससे कहीं अधिक मार नगर पालिका परिषद की 'लापरवाही' ने देवबंद की जनता पर डाली है। नगर पालिका अध्यक्ष विपिन गर्ग और अधिशासी अधिकारी की जुगलबंदी नगर को बुनियादी सुविधाएं देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
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बदलते मौसम के साथ नगर के अधिकतर वार्डों में मच्छरों की आबादी खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है आलम यह है कि शाम होते ही लोगों का घरों में व सार्वजानिक स्थानों और पार्कों मे बैठना दूभर हो गया है नगर पालिका के दावों के उल्ट जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश मोहल्लों में सालों से एंटी-लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग नहीं करायी गयी है सवाल ये है कि क्या बजट का अभाव है या इच्छाशक्ति की कमी।
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सवाल तो यह भी है कि क्या जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी नगर पालिका प्रशासन फंड नहीं जुटा पा रहा? या फिर किसी आपसी द्वेष के चलते नगर के विकास को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है ? नगर के स्थानीय लोगों की माने तो देवबंद नगर के अधिकांश वार्डों में महामारी के बाद से अभी तक एंटी-लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग करने के लिए उधार का रुख नही किया है नगर की संकरी गालियों की जो दुर्दशा है वो किसी से ढ़की छुपी हुई नही है चर्चा तो यह भी है कि चुनाव के समय बड़े बड़े वादे करने वाले भावी प्रत्याशी फिर से टिकट लेने की उछल कूद मे व्यस्त हैं क्षेत्र की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है।
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नगर के मुख्य रास्तों से लेकर गलियों तक गंदगी और जलभराव की समस्या है नाले और नालियों का मल-मूत्र सड़कों और गलियों मे बेहता रेहता है मुख्य रूप से बडजियाउलहक, ख़ानक़ाह, कायस्थवाड़ा, गुजरवाड़ा, पठानपुरा, लहसवाड़ा, किला, मोहल्ला बिरियान, लाम, और अन्य घणी आबादी वाले क्षेत्रों मे कीटनाशक छिड़काव न होने से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले अध्यक्ष विपिन गर्ग अब जनता की सुध लेने को तैयार नहीं हैं देवबंद की जनता पूछ रही है कि आखिर विकास के नाम पर उन्हें क्या दिया जा रहा है? कूडे से सजी सड़कें, उफनती नालियां और मच्छरों से होने वाली बीमारियां? नगर के 25 वार्डों में शायद ही कहीं ढंग से कीटनाशक का छिड़काव हुआ हो यकीन मानिए, नगर पालिका सिर्फ कागजों पर साफ-सफाई खेल रही है, जबकि धरातल पर लोग डेंगू और मलेरिया के खौफ में जीने को मजबूर हैं।
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विश्लेषकों की माने तो नगर पालिका परिषद देवबंद की यह निष्क्रियता न केवल प्रशासनिक विफलता है बल्कि आम जनमानस के स्वास्थ्य के साथ एक खिलवाड़ भी है यदि समय रहते फॉगिंग और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आगामी मानसून में देवबंद को गंभीर महामारी का सामना करना पड़ सकता है और इस का असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है जिसका खामियाजा भुगतने के लिए सत्ता पर काबिज जनप्रतिनिधियों को तैय्यार रहना चाहिए।
रिपोर्ट - दीन रज़ा


