देवबंद में 'राशन माफिया' और आपूर्ति विभाग का गठजोड़, गरीबों के निवाले पर डकैती!
- गरीब परिवारों के साथ विभाग कर रहा है क्रूर मजाक, कौन कसेगा इस 'राशन माफिया' पर नकेल
- आज भी एसे हजारों परिवार हैं जो दो वक्त की रोटी के लिए सरकारी अनाज पर निर्भर हैं
देवबंद। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का ढिंढोरा पीट रही है लेकिन देवबंद तहसील का आपूर्ति विभाग इस नीति को ठेंगे पर रख रहा है यहाँ राशन वितरण प्रणाली पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है आपूर्ति निरीक्षक की संदिग्ध भूमिका और कोटेदारों की दबंगई ने सरकारी दावों की हवा निकाल दी है आलम यह है कि "मुफ्त राशन" अब गरीबों के लिए "महंगा सौदा" बन गया है।
अतिक्रमण और भ्रष्टाचार के 'जाम' में फंसी जनता, कागजी दावों की खुली पोल
देवबंद के आपूर्ति कार्यालय की छत्रछाया में कोटेदारों ने एक नया नियम लागू कर दिया है कार्डधारकों का आरोप है कि प्रति कार्ड 70 से 100 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है जो गरीब पैसे देने में असमर्थ हैं उन्हें घटिया क्वालिटी के सर्फ साबुन, तेल या गरम मसाले का पैकेट खरीदने पर मजबूर किया जाता है कोटेदारों का कहना है कि उन्हें यह सामान ऊपर से बेचने के लिए दिया गया है, जबकि विभाग के पास ऐसा कोई लिखित आदेश नहीं है।
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देवबंद के केवल शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों से भी भ्रष्टाचार की चीखें सुनाई दे रही हैं मोहल्ला गुज्जरवाड़ा और बड़जिया उल हक यहाँ के कार्डधारकों ने हाल ही में प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि कोटेदार ई-पॉश मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद राशन देने में आनाकानी करते हैं और घटतौली (कम वजन) करते हैं साखन कलां और मानकी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी भयावह है यहाँ के ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर राशन कार्ड काटने की धमकी दी जाती है भायला और जिलानी इन क्षेत्रों में अंत्योदय कार्डधारकों (सबसे गरीब श्रेणी) से भी नमक और मसालों के नाम पर वसूली की खबरें आम हैं मोहल्ला खानकाह मोहल्ला पठानपूरा यहाँ राशन वितरण के समय अक्सर विवाद की खबरें आती हैं जिसका मुख्य कारण 'प्रीमियम किट' बेचने का दबाव है।
सफाई व्यवस्था को लेकर नगर पालिका ने मूंदी आंखें
सूत्रों का दावा है कि देवबंद आपूर्ति विभाग में तैनात आपूर्ति निरीक्षक की भूमिका सबसे अधिक सवालों के घेरे में है चर्चा है कि प्रत्येक राशन डीलर से एक निश्चित 'सुविधा शुल्क' महीने के आधार पर वसूला जाता है तहसील दिवस या ऑनलाइन पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर 'आख्या' लगाकर कर दिया जाता है मौके पर जाकर कभी निष्पक्ष जांच नहीं होती।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ित लोगों ने प्रशासन से सीधे सवाल पूछे हैं जब राशन शासन की ओर से नि:शुल्क है, तो 100 रुपये का अतिरिक्त सामान क्यों थोपा जा रहा है? मशीन में दर्ज वजन और हाथ में मिलने वाले राशन के बीच 1 से 2 किलो का अंतर क्यों है? आपूर्ति निरीक्षक शिकायतों के बाद भी कोटेदारों के गोदामों का औचक निरीक्षण क्यों नहीं करते?
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भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल से त्रस्त होकर अब देवबंद की जनता सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही है कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आपूर्ति निरीक्षक और भ्रष्ट डीलरों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय (सहारनपुर) का घेराव करेंगे और मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर सामूहिक शिकायत दर्ज कराएंगे। देवबंद आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली इस समय पूरी तरह संदेह के घेरे में है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों के साथ क्रूर मजाक है जो दो वक्त की रोटी के लिए सरकारी अनाज पर निर्भर हैं। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस 'राशन माफिया' पर नकेल कसते हैं या भ्रष्टाचार का यह खेल ऐसे ही जारी रहेगा।
रिपोर्ट - दीन रज़ा




