काम के लालच में बंधक बने बाहरी मजदूर, पेट की आग और बेड़ियों का पहरा

विशेष रिपोर्ट: काम के लालच में बंधक बने बाहरी मजदूर, पेट की आग और बेड़ियों का पहरा

  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रसूखदारों को इस अमानवीय कृत्य की भनक क्यूं नही..? 
  • अफसोस,,,ये भारतीय लोग जनगणना की कारवाई के अंतर्गत नही आते हैं 

देवबंद। एक ओर जहाँ पूरा देश और प्रशासन जनगणना के आँकड़ों में व्यस्त है वहीं देवबंद थाना क्षेत्र के कुछ हिस्सों से मानवता को शर्मसार करने वाली बातें सामने आ रही हैं यहाँ काम और अच्छी तनख्वाह का झांसा देकर लाए गए मजदूरों को 'जिंदा लाश' में तब्दील कर दिया गया है विडंबना देखिए कि जिस दौर में हम मानवाधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं उसी दौर में चंद रुपयों के लालच में इंसानों को कुत्तों के पहरे में कैद रखा जा रहा है बात करें तो पूरे क्षेत्र मे ही एसे लोगों मौजूदगी है मगर इनकी कोई चर्चा कभी नही की गई जनगणना की कारवाई के दोरान उम्मीद थी कि शयद इस पर कोई चर्चा सामने आयेगी मगर एसा कुछ नही हुआ।

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​विश्वस्त सूत्रों और जमीनी पड़ताल से पता चला है कि इन बंधक मजदूरों में अधिकांश संख्या बिहार और अन्य पिछड़े राज्यों के भोले-भाले लोगों की है इन्हें ऊँचे ख्वाब दिखाकर यहाँ लाया गया था लेकिन अब इनकी दुनिया एक डेयरी या खेत तक सिमट कर रह गई है इन बदकिस्मत मजदूरों का "गुनाह" सिर्फ इतना है कि ये गरीब हैं इन्हें वेतन के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं दी जाती बस तीन वक्त के सूखे टुकड़े फेंक दिए जाते हैं ताकि इनके शरीर की मशीन चलती रहे। 

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सबसे रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह है कि इन पर नजर रखने के लिए महंगे और खूंखार नस्ल के कुत्तों को तैनात किया गया है, ताकि कोई भागने की हिम्मत न कर सके इन मजदूरों का शोषण सबसे ज्यादा दूध की डेयरियों में हो रहा है सुबह के अंधेरे से लेकर देर रात तक इनसे पशुओं की सेवा खेती का भारी काम और यहाँ तक कि मालिकों के घरों के शौचालय भी साफ कराए जा रहे हैं।

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​कुछ हफ्ते पहले इसी नारकीय जीवन से तंग आकर दो युवक जान जोखिम में डालकर भागने में सफल रहे उनकी खौफजदा आँखें चीख-चीख कर यहाँ की दास्तां बयां कर रही थीं हैरानी की बात यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रसूखदारों को इस अमानवीय कृत्य की भनक तक नहीं है या फिर वे अनजान बने रहने का ढोंग कर रहे हैं। 

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जब इन शोषकों से मजदूरों के परिजनों का पता या मोबाइल नंबर मांगा जाता है तो उनके पसीने छूट जाते हैं बहाना बनाया जाता है कि पैसे घर भेज दिए जाते हैं लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके उलट है यह केवल एक खबर नहीं बल्कि उन 'धन्नासेठों' को आखिरी चेतावनी है जो इंसानियत का गला घोंट रहे हैं। 

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किसी को बंधक बनाना भारतीय न्याय संहिता और बंधुआ मजदूरी प्रणाली उन्मूलन अधिनियम के तहत संगीन अपराध है हमारी टीम की जांच में कई नाम, पते और पुख्ता सबूत सामने आए हैं यदि इन मजदूरों को तत्काल प्रभाव से उनकी बकाया तनख्वाह देकर ससम्मान आजाद नहीं किया गया, तो अगले अंक में उन सभी 'चेहरों' को बेनकाब किया जाएगा जो इस गोरखधंधे के मास्टरमाइंड हैं।

रिपोर्ट - दीन रज़ा







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