चार्ज लेने से पहले ही कसीदे यह चाटुकारिता है या धंधे बचाने की छटपटाहट ? देवबंद कोतवाली के नए प्रभारी होंगे कपिल देव

चार्ज लेने से पहले ही कसीदे यह चाटुकारिता है या धंधे बचाने की छटपटाहट ? देवबंद कोतवाली के नए प्रभारी होंगे कपिल देव

  • क्या दलालों के चंगुल से मुक्त हो पाएगी देवबंद कोतवाली? या चाटुकारिता के साए में फलेगा-फूलेगा जुए-सट्टे का धंधा?
  • देवबंद में नए चेहरों के पास है कोई जादुई छड़ी या फिर से होगा फ्लॉप शो? ​बड़ा सवाल विज्ञापनों से सुधरेगी देवबंद की बिगड़ी कानून-व्यवस्था या चाटुकारिता के चोले में छिपे सटोरियों को मिलेगा संरक्षण?
  • ​चमचों की फौज तैयार! नए इंस्पेक्टर के आने से पहले ही तथाकथित पत्रकारों और सफेदपोश दलालों में मची होड़ जनता ने पूछा बिना काम देखे ही मसीहा कैसे मान लें?

​देवबंद। सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा आधी रात को किए गए भारी फेरबदल के बाद देवबंद कोतवाली की कमान इंस्पेक्टर कपिल देव को सौंपी गई है सरकारी प्रेस नोट और प्रशासनिक विज्ञापनों में भले ही इसे अपराधियों पर बड़ा प्रहार और नया सिंघम कहकर प्रचारित किया जा रहा हो लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट और बेहद शर्मनाक है ​चौंकाने वाली बात यह है कि नए थाना प्रभारी ने अभी देवबंद कोतवाली की दहलीज पर पैर भी नहीं रखा है सरकारी कुर्सी पर बैठकर नियमानुसार चार्ज तक नहीं लिया है और देवबंद के थानेदार दलालों व चाटुकार पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर उनका गुणगान और कीर्तन शुरू कर दिया है।

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​अधिकारी के आने से पहले ही उन्हें अपराधियों का काल और कड़क सेनापति घोषित करने की यह होड़ साफ बयां करती है कि इन चाटुकारों को देवबंद के अमन-चैन से कोई लेना-देना नहीं है इन्हें मतलब है तो सिर्फ और सिर्फ अपनी जेबों की गर्मी और अवैध सेटिंग से जैसे ही कोई नया अधिकारी आता है यह दलाल नेटवर्क सक्रिय हो जाता है ताकि सबसे पहले गुलदस्ता भेंट कर अपनी शक्ल दिखाई जा सके और आने वाले दिनों में कोतवाली के भीतर दलाली अवैध उगाही और सेटिंग की दुकानें बिना किसी रुकावट के चलती रहें ​देवबंद के गलियारों में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि आज सुबह से जो लोग सोशल मीडिया पर नए साहब की आरती उतार रहे हैं उनमें से कई ऐसे चेहरे हैं जो खुद पत्रकारिता और समाजसेवा का चोला ओढ़कर देवबंद थाना क्षेत्र में जुए और सट्टे का काला साम्राज्य चला रहे हैं।

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​यह अग्रिम बधाई का खेल सिर्फ इसलिए खेला जा रहा है ताकि नए साहब की आंखों पर शुरुआत में ही पट्टी बांधी जा सके दिन में सफेदपोश और पत्रकार बनने वाले इन तत्वों का रात को सट्टे का सिंडिकेट चलता है कोतवाली के चक्कर काटने वाले इन थैलाछाप चमचों का मुख्य उद्देश्य यही है कि पुलिस प्रशासन इनके काले कारनामों की तरफ आंखें मूंद कर रखे। लेकिन देवबंद की जमीनी हकीकत बेहद खौफनाक और चिंताजनक हो चुकी है सच तो यह है कि आज पूरा देवबंद थाना क्षेत्र अवैध धंधों का सबसे बड़ा गढ़ बन चुका है ​सूखे नशे की भरमार है देवबंद के कोने-कोने और गली-मोहल्लों में स्मैक, चरस, गांजा और प्रतिबंधित नशीली गोलियों सूखा नशा का कारोबार धड़ल्ले से जारी है पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह पंगु साबित हुआ है जिसके कारण युवा पीढ़ी इस जहर की गिरफ्त में आकर पूरी तरह बर्बाद हो रही है।

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​वहीँ चोरी, छिनैती, अवैध उगाही और गुंडागर्दी चरम पर है अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें स्थानीय पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है हाल ही मे ख़ानक़ाह पुलिस चोकी क्षेत्र मे ही खनन माफियाओं की रात की मुहल्ले वासियों को दिखाई गई गुंडागर्दी आपको याद ही होगी ​अब देवबंद की जागरूक जनता की नजरें नए थाना प्रभारी कपिल देव पर टिकी हैं जनता के बीच अब यही सवाल सबसे बड़ा है कि पोस्टरों वाले सिंघम तो बहुत देखे हैं क्या जमीनी स्तर पर भी कोई दम दिखेगा? ​क्या नए थाना प्रभारी देवबंद को इस अपराध और सूखे नशे के दलदल से बाहर निकालने की हिम्मत जुटा पाएंगे? ​क्या वो चाटुकारिता का चोला पहनकर घूमने वाले इन सटोरियों और जुआरियों को बेनकाब कर जेल की सलाखों के पीछे भेजेंगे? ​क्या वो इन दलालों के गुलदस्तों और झूठी तारीफों के मायाजाल से बचकर, सबसे पहला डंडा कोतवाली का घेराव करने वाले इन चमचों पर चलाएंगे?

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​बताता चलूं की देवबंद की जनता को विज्ञापनों और सोशल मीडिया के झूठे प्रोपेगैंडा वाले सिंघम की जरूरत नहीं है जनता को सुरक्षित सड़कें भयमुक्त माहौल और नशे के सौदागरों का खात्मा चाहिए नए प्रभारी के लिए पहली और सबसे बड़ी चुनौती अपराधियों से निपटना नहीं बल्कि कोतवाली में पैर पसार चुके इन दलालों और चाटुकारों की लंका ढहाना होगी अब देखना यह है कि नए साहब चार्ज लेते ही इन दलालों पर कार्रवाई करते हैं या फिर देवबंद की व्यवस्था इसी तरह चमचों के इशारे पर नाचती रहेगी।

रिपोर्ट - दीन रज़ा 








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