देवबंद की काली रातें पार्ट 2 सच लिखने की सज़ा या खुन्नस ?
- भ्रष्ट अधिकारियों की तानाशाही में घुट रहा देवबंद, साहबों का 'शाम 5 बजे' का वादा निकला सफेद झूठ! रात के 1 बजे भी देवबंद में महा-ब्लैकआउट
- लाखों करोडों का बिल भरने वाली संस्थाओं के छात्रों का घुट रहा दम, न पानी न बिजली; नगरपालिका के कागज़ी जनरेटर फेल, व्यापार की टूटी रीढ़!
- पूरे शहर को अंधेरे और गर्मी के नरक में झोंका; क्या यही है भ्रष्ट अधिकारियों का 'अमृत काल'? कागज़ी जनरेटरों की निकली हवा, पानी की एक-एक बूंद को तरसे लोग
देवबंद। क्या सच लिखना गुनाह है? क्या जनता की आवाज़ उठाना अपराध है? DRD NEWS 24 ने जब 15 मई की अपनी पिछली रिपोर्ट में सांपला रोड बिजली घर के फुंके पड़े 10MVA ट्रांसफार्मर का भंडाफोड़ किया था और अधिकारियों की 'जेबें गर्म' करने की तैयारियों को बेनकाब किया था, तो शायद देवबंद विद्युत आपूर्ति कार्यालय के निकम्मे और भ्रष्ट साहेबानों को मिर्ची लग गई अब ऐसा लग रहा है कि विभाग उस सच्ची खबर की खुन्नस पूरे देवबंद नगर की बेकसूर जनता को अंधेरे और भयंकर गर्मी के नरक में धकेल कर वसूल रहा है! हमने अपनी 15 मई की खबर में साफ-साफ चेताया था कि विभाग नए ट्रांसफार्मर की व्यवस्था करने के बजाय सिर्फ लीपापोती में जुटा है। आज हमारी वह आशंका शत-प्रतिशत सच साबित हो चुकी है। देवबंद विद्युत आपूर्ति विभाग का वह खोखला 'जुगाड़ तंत्र' पूरी तरह फेल हो चुका है जिसके दम पर ये अफसर जनता को गुमराह कर रहे थे। बिना किसी ठोस प्लानिंग और तकनीकी तैयारी के, सिर्फ जुगाड़ के भरोसे पूरे शहर की बिजली व्यवस्था को छोड़ दिया गया जिसका खामियाजा आज पूरा देवबंद भुगत रहा है।
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सवाल सीधा है जो संस्थाएं और उपभोक्ता विभाग को लाखों-करोड़ों का राजस्व देते हैं समय पर बिजली बिल का भुगतान करते हैं, उनके छात्रों के कमरों में आज घोर अंधेरा और दम घोटने वाली घुटन क्यों है? क्या देवबंद विद्युत आपूर्ति कार्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों के राज में इसी को 'अमृत काल' कहते हैं? जहां ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को बिना किसी गुनाह के इस कदर तड़पाया जा रहा है। कल 18 मई की सुबह से ही बिजली के जो झटके (कट) लगने शुरू हुए थे, वो सुबह 10 बजे आकर पूरी तरह ठप हो गए। जब त्रस्त जनता ने अधिकारियों से जवाब मांगा, तो भ्रष्ट साहबों ने बड़ी बेशर्मी से आश्वासन की घुट्टी पिलाई कि 'शाम 5 बजे तक बिजली सुचारू रूप से चालू हो जाएगी'। लेकिन साहबों के वादे हमेशा की तरह सफेद झूठ साबित हुए! आज 19 मई की रात्रि के 12:30 बज चुके हैं, मगर पूरे देवबंद नगर के अधिकतर इलाकों में पसरा सन्नाटा और 'ब्लैक आउट' चीख-चीखकर विभाग की नाकामी और इनके ढह चुके जुगाड़ तंत्र की गवाही दे रहा है जनता के सब्र का बांध अब टूट रहा है और बिजली विभाग के खिलाफ आक्रोश की आग सुलग चुकी है।
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विद्युत विभाग की इस अंधेरगर्दी ने न सिर्फ बिजली छीनी, बल्कि नगरपालिका परिषद देवबंद के दावों की पोल भी खोल कर रख दी इस भीषण बिजली कटौती ने नगरपालिका के उन 'कागज़ी जनरेटरों' की पूरी हवा निकाल दी है जो सिर्फ फाइलों में चलते हैं नतीजा यह है कि जनता एक तरफ तो बिना बिजली के भीषण गर्मी की मार झेल रही है, तो दूसरी तरफ बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर है। नलों में सूखा पड़ा है और हाहाकार मचा हुआ है।
देवबंद, जो अपने नए और बढ़ते व्यापार के लिए जाना जाता है, आज इन निकम्मे अधिकारियों की वजह से घुटनों पर आ गया है इस लगातार और अंतहीन ब्लैक आउट ने देवबंद नगर के स्थानीय व्यापार की रीढ़ की हड्डी पूरी तरह तोड़कर रख दी है। व्यापारियों का भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर जनता के पसीने की बूंदों का मज़ाक उड़ाने वाले अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
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जनता का सीधा सवाल है क्या उच्च अधिकारियों (MD) को अंधेरे में रखकर करोड़ों का चूना लगाने वाले ये स्थानीय अधिकारी और तथाकथित लाइन मैन और जीअई सहाब अपनी नाकामी और फेल हो चुके जुगाड़ तंत्र को छुपाने के लिए, खबर की खुन्नस निकालने के लिए पूरे शहर को बंधक बनाए रखेंगे? अगर हालात तुरंत नहीं सुधरे, तो देवबंद की यह प्रताड़ित जनता इस 'विद्युत तानाशाही' के खिलाफ सड़कों पर उतरकर ईंट से ईंट बजाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारी नज़र इस अंधेरगर्दी पर पूरी तरह बनी हुई है, जनता के हक की लड़ाई जारी रहेगी अगली ख़बर मे आपको उस भ्रष्ट जीअई का काला चिठ्ठा आपके सामने लाएंगे जिस के निकम्मेपन और घोर लापरवाही के नतीजे मे आज देवबंद नगर के ये हालात बने हुए हैं।
रिपोर्ट - दीन रज़ा





