शिक्षा का मंदिर बना सियासत का अखाड़ा: देवबंद में चुनावी जनादेश का गला घोंटकर मंत्री ने दिखाया सत्ता का रसूख, ऑडियो लीक से खुला खेल
- जनादेश का कत्ल या मंत्री की सनक? देवबंद में IIA चेयरमैन दीपक राज की बंपर जीत को मंत्री ने सत्ता के हनक से किया भंग!
- जनता इंटर कॉलेज बना सियासत का अखाड़ा, कोर्ट के आदेश की आड़ में रसूखदारों ने लोकतंत्र का गला घोंटा
- मंत्री की प्रतिष्ठा पर भारी पड़ी दीपक राज सिंघल की काबिलियत, हार पचा नहीं पाए माननीय तो चला दिया प्रशासनिक चाबुक
देवबंद। कहते हैं कि विद्यालय ज्ञान और संस्कार के केंद्र होते हैं, लेकिन जब सत्ता की हनक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई इन पर हावी हो जाए, तो शिक्षा के ये मंदिर राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ सनसनीखेज मामला देवबंद के जनता इंटर कॉलेज में देखने को मिला है, जहां लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कमेटी को केवल इसलिए भंग करा दिया गया क्योंकि वह सत्ता पक्ष के रसूखदारों की पसंद नहीं थी।
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पूरे शहर और विशेषकर वैश्य समाज में इस बात को लेकर भारी आक्रोश और जिज्ञासा है कि कैसे भाजपा के ही एक निष्ठावान, बेहद कद्दावर और जमीन से जुड़े नेता के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कुंवर बृजेश सिंह ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इस पूरे विवाद के केंद्र में जो व्यक्तित्व है, वह किसी परिचय का मोहताज नहीं है। दीपक राज सिंघल न केवल भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष और थर्ड ओटीसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित स्वयंसेवक रहे हैं, बल्कि वे व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष और देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक संगठन IIA (इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) के चेयरमैन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं।
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एक सफल उद्यमी, कुशल रणनीतिकार और व्यापारियों व उद्योगपतियों की आवाज को प्रदेश स्तर पर उठाने वाली ऐसी कद्दावर शख्सियत को जब जनता इंटर कॉलेज के मतदाताओं ने अपना प्रबंधक चुनना चाहा, तो इसमें किसी को हैरानी नहीं हुई। दीपक राज सिंघल की इसी योग्यता, बेदाग छवि और सांगठनिक कुशलता के कारण समाज का हर वर्ग उनके साथ खड़ा नजर आता है। गौरतलब है कि जनता इंटर कॉलेज देवबंद की प्रबंध समिति का विवाद पिछले कई महीनों से सुर्खियों में है। इस विवाद में 'तू डाल-डाल, मैं पात-पात' का खेल चल रहा था। एक तरफ सांगठनिक और व्यापारिक जगत में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा चुके दीपक राज सिंघल थे, तो दूसरी तरफ राज्य मंत्री कुंवर बृजेश सिंह और देवबंद नगरपालिका अध्यक्ष विपिन गर्ग का सीधा संरक्षण प्राप्त प्रत्याशी देवी दयाल शर्मा थे।
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जब चुनाव हुआ, तो मतदाताओं ने मंत्री जी के राजनीतिक प्रभाव के बजाय दीपक राज सिंघल की उच्च योग्यता और कॉलेज को आगे ले जाने की क्षमता पर भरोसा जताया। कुल 36 मतदाताओं में से 24 ने दीपक राज सिंघल को एकतरफा वोट देकर विजयी बनाया, जबकि मंत्री जी के प्रत्याशी देवी दयाल शर्मा को करारी हार का सामना करना पड़ा और वह कुछ ही मतों पर सिमट गए। दीपक राज सिंघल की इस प्रचंड और लोकतांत्रिक जीत को माननीय मंत्री जी ने अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया। मामले से जुड़े एक ऑडियो ने इस पूरे खेल को जनता के सामने उजागर कर दिया है। इस कथित ऑडियो में साफ सुना जा सकता है कि कैसे माननीय मंत्री जी, चेयरमैन विपिन गर्ग के माध्यम से मतदाताओं पर दबाव बना रहे थे और दीपक राज सिंघल जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत को कॉलेज से बाहर करने का 'अनुरोध' (दबाव) कर रहे थे।
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जब जागरूक मतदाताओं ने मंत्री जी के इस अनुचित निवेदन को सिरे से खारिज कर दिया और व्यापार जगत के इस शीर्ष चेहरे (दीपक राज सिंघल) को चुना, तो हार से तिलमिलाई सत्ता ने प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग शुरू कर दिया। चुनाव हारने के बाद शासन स्तर पर भारी दबाव बनाया गया। जेडी (संयुक्त शिक्षा निदेशक) और डीआईओएस (जिला विद्यालय निरीक्षक) का इस्तेमाल कर कमेटी को भंग करने की स्क्रिप्ट लिखी गई। हालांकि, दीपक राज सिंघल ने इस अन्याय के खिलाफ माननीय हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने संयुक्त शिक्षा निदेशक को दोबारा निष्पक्ष सुनवाई के निर्देश दिए थे।
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परंतु, सत्ता के गलियारों से मिल रहे भारी दबाव के आगे अंततः संयुक्त शिक्षा निदेशक और जिला विद्यालय निरीक्षक ने वही किया जो सियासी आका चाहते थे। कमेटी को भंग करते हुए नए बने सदस्यों की सदस्यता निरस्त कर दी गई और एक महीने के भीतर दोबारा चुनाव कराने के निर्देश जारी कर दिए गए। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि जनता इंटर कॉलेज में अब शिक्षा की नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख की परीक्षा हो रही है। मंत्री कुंवर बृजेश सिंह और अध्यक्ष विपिन गर्ग ने भले ही प्रशासनिक चाबुक चलाकर, व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष और IIA चेयरमैन दीपक राज सिंघल को फिलहाल कॉलेज से बाहर कर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर दिया हो, लेकिन जनता की अदालत में इस 'जबरन कार्रवाई' को लेकर भारी नाराजगी है।
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अब यह जंग खुलकर देवबंद की सड़कों पर आ गई है। पूरे सहारनपुर जिले के भाजपा नेताओं, उद्योगपतियों और प्रमुख समाजसेवियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि: क्या आने वाले चुनाव में मतदाता अपने इस योग्य और प्रतिष्ठित नेता (दीपक राज सिंघल) के साथ हुए इस अन्याय का जवाब वोट से देंगे? प्रदेश स्तर पर व्यापारियों की लड़ाई लड़ने वाले दीपक राज सिंघल किस रणनीति के साथ दोबारा कॉलेज कमेटी में अपने हक और सच्चाई की लड़ाई लड़ते हैं? फिलहाल, प्रशासनिक आदेश के दम पर मंत्री जी का पलड़ा भारी जरूर दिख रहा है, लेकिन देवबंद की जनता और वैश्य समाज इस बात को बखूबी देख रहा है कि कैसे एक कर्मठ, योग्य और अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तित्व की लोकतांत्रिक जीत को राजनीतिक अहंकार की बलि चढ़ा दिया गया। जंग बेहद रोचक और आर-पार की हो चुकी है।
रिपोर्ट - दीन रज़ा




