इलाज या सौदा? सड़क हादसे में घायल पत्रकार का डॉक्टर पर घोर लापरवाही और ब्लैकमेलिंग का संगीन आरोप
- सफ़ेद कोट के पीछे काले कारनामे पहले भी मोटी रकम के लालच में भगोड़े बदमाशों का इलाज कर चुका है यह डॉक्टर
- पैसे दो वरना अपाहिज हो जाओगे! देवबंद के नामी डॉक्टर का घिनौना खेल, पुराना रिकॉर्ड भी है दागदार
देवबंद। कहते हैं डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, लेकिन जब वही 'भगवान' चंद रुपयों के लिए संवेदनशीलता को ताक पर रख दे तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला देवबंद से सामने आया है जहां सड़क हादसे का शिकार हुए एक नामचीन पत्रकार को इलाज के नाम पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ा देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह दैनिक भास्कर डिजिटल में कार्यरत देवबंद के पत्रकार आबाद अली ने रेलवे रोड स्थित एक नामी अस्पताल के संचालक व डॉक्टर के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है वाकया बीती 27 अप्रैल की शाम का है हाईवे पर एक भीषण सड़क दुर्घटना में पत्रकार आबाद अली गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें आनन-फानन में रेलवे रोड स्थित एक पुराने विशेषज्ञ डॉक्टर के निजी अस्पताल ले जाया गया।
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घायल पत्रकार दर्द से कराह रहा था लेकिन आरोप है कि डॉक्टर साहब का दिल नहीं पसीजा काफी देर तक मरीज बेंच पर ही तड़पता रहा और अस्पताल प्रशासन पहले पैसे जमा होने का इंतजार करता रहा जब परिजन और साथी अस्पताल पहुंचे और पैसे जमा किए तब जाकर कहीं इलाज का नाटक शुरू हुआ डॉक्टर साहब के इलाज का तरीका ऐसा था जिसे सुनकर ही रूह कांप जाए पीड़ित पत्रकार का ब्लड प्रेशर (BP) हाई था, लेकिन डॉक्टर ने बिना सुन्न (Anesthesia) किए ही घावों पर टांके लगाने शुरू कर दिए लापरवाही की हदें यहीं खत्म नहीं हुईं खून के ऊपर ही बांध दिया प्लास्टर दुर्घटना के वक्त हाथों पर जो खून जमा था उसे साफ करना भी जरूरी नहीं समझा गया गंदे खून के ऊपर ही रुई (कॉटन) रखकर कच्चा प्लास्टर चढ़ा दिया गया।
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पसली टूटी होने के बावजूद मरीज को एक ऐसी बेल्ट बांध दी गई जो साइज में बहुत छोटी थी। नतीजा यह हुआ कि मरीज का दम घुटने लगा इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद, मरीज की इच्छा के खिलाफ उसे उसी दिन जबरन डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया छोटी बेल्ट की वजह से सांस लेना मुहाल था बीपी लगातार बढ़ रहा था। दोनों हाथों में फ्रैक्चर, गहरे जख्म और टूटी पसली के दर्द के कारण पत्रकार आबाद अली के लिए एक-एक मिनट काटना भारी हो रहा था।
इस पूरी कहानी का सबसे खौफनाक मोड़ दो दिन बाद आया। डिस्चार्ज के वक्त डॉक्टर ने कहा था कि 'कोई गंभीर बात नहीं है लेकिन जब दो दिन बाद मरीज चेकअप के लिए पहुंचा, तो डॉक्टर साहब ने गिरगिट की तरह रंग बदल लिया डॉक्टर ने पत्रकार के बेटों को डराते हुए कहा कि "तुरंत ऑपरेशन करना होगा, जिसमें 90 हजार रुपये का खर्च आएगा बात यहीं नहीं रुकी, परिजनों में दहशत फैलाने के लिए डॉक्टर ने यहां तक कह दिया कि ऑपरेशन के बाद भी तुम्हारे पिता आजीवन अपाहिज हो सकते हैं इस बात से पूरे परिवार में कोहराम मच गया और रोना-धोना शुरू हो गया।
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डॉक्टर की इस संवेदनहीनता और ब्लैकमेलिंग से तंग आकर परिजनों ने मरीज को दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया वहां डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन जैसी कोई जरूरत ही नहीं है! फिलहाल आबाद अली का इलाज वहीं चल रहा है और उनकी स्थिति में सुधार है अब सवाल यह उठता है कि क्या एक वरिष्ठ और अनुभवी चिकित्सक को इस तरह की इमोशनल ब्लैकमेलिंग और धन उगाही शोभा देती है? चंद रुपयों के लिए एक मरीज की जान और परिवार की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना कहां का न्याय है? अगर यह तरीका गलत है, तो इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए।
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घायल पत्रकार ने कोतवाली में तहरीर देकर इंसाफ की गुहार लगाई है। पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है। देखना यह है कि खाकी इस 'सफेदपोश' लापरवाही पर क्या एक्शन लेती है। न्याय के लिए संघर्ष जारी है चौंकाने वाली बात यह है कि इस डॉक्टर का विवादों और पैसों के लालच से पुराना नाता है। आप सभी को याद ही होगा कि यह वही डॉक्टर है जो पूर्व में भी मोटी रकम के लालच में पुलिस से भागे हुए शातिर बदमाशों का गुपचुप इलाज करते हुए रंगे हाथों पकड़ा जा चुका है। कानून को ठेंगा दिखाने वाले इस डॉक्टर से पत्रकार आबाद अली के मामले में ईमानदारी की उम्मीद ही कैसे की जा सकती थी!
रिपोर्ट - दीन रज़ा






