प्यासा मोहल्ला, सोती नगर पालिका! साल भर से ठप पड़ी वाटर कूलर मशीन बनी शोपीस। बेशर्मी की हद पार
- जनता से वसूले जाने वाले टैक्स के पैसे क्य़ा सिर्फ़ EO और अध्यक्ष के कार्यालय को एयर कंडीशनर बनाने के लिए है
- मोहल्ला शाह बुखारी में भीषण गर्मी के बीच बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग और राहगीर पालिका की अनदेखी से जनता में भारी आक्रोश
- या तो पानी दो या कुर्सी छोड़ो! शाह बुखारी की जनता का धैर्य टूटा, नगर पालिका के खिलाफ फूटा गुस्से का ज्वालामुखी
देवबंद। तपते सूरज और आसमान से बरसती आग ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है लेकिन नगर पालिका परिषद देवबंद के अधिकारियों की संवेदनहीनता मोहल्ला शाह बुखारी के निवासियों पर भारी पड़ रही है मोहल्ले में लगी ठंडे पानी की मशीन (वाटर कूलर) पिछले एक साल से सफेद हाथी बनी खड़ी है पालिका प्रशासन की इस घोर लापरवाही के खिलाफ अब वार्ड वासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
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नगर पालिका की लापरवाही मरम्मत के नाम पर शून्य स्थानीय निवासियों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में शीतल पेयजल की मशीन खराब होना नगर पालिका की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है हैरत की बात यह है कि मशीन को खराब हुए एक साल बीत चुका है लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी ने इसकी सुध लेना उचित नहीं समझा।
मौहल्ले वासियों का कहना है कि हम प्यासे मर रहे हैं और पालिका चैन की नींद सो रही है क्या प्रशासन को हमारी तकलीफें दिखाई नहीं देतीं? एक साल से मशीन खराब है, क्या नगर पालिका के पास इसकी मरम्मत के लिए बजट नहीं है या मंशा नहीं? शाह बुखारी क्षेत्र से गुजरने वाले राहगीरों की स्थिति और भी बदतर है चिलचिलाती धूप में प्यास बुझाने के लिए जनता को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है दुकानों से पानी खरीदकर पीना हर किसी के बस की बात नहीं है।
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सार्वजनिक जल सेवा ठप होने से राहगीरों में भी शासन प्रशासन के खिलाफ गहरा असंतोष देखा जा रहा है वार्ड वासियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पेयजल मशीन की मरम्मत कर इसे सुचारू नहीं किया गया, तो वे नगर पालिका कार्यालय पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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गर्मी में दूषित या गर्म पानी पीने से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है जनता से वसूले जाने वाले टैक्स के बदले उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं नगर पालिका परिषद देवबंद को अब कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर काम करने की जरूरत है वरना आने वाले दिनों में यह जन-आक्रोश किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
रिपोर्ट - दीन रज़ा



