नगरपालिका देवबंद के एजेंडे से जनता की प्यास गायब! कागजों पर जनरेटर, धरातल पर हाहाकार
- सफाई व्यवस्था पर 'सियासत' तेज़; क्या केवल "चीता टीम" के भरोसे रहेगा शहर?
- सत्ता के करीबियों का ऑल इज वेल' वाला राग जनता बोली- प्यास से गला सूख रहा है और मिल रहा है आश्वासनों का लॉलीपॉप, जनरेटर का झुनझुना
- मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति! साल भर से खराब पड़े वाटर कूलर कब बनेंगे? शासन को भेजी रिपोर्ट सिर्फ बहाना है क्य़ा ?
- सभासदों के ज्ञापन से कर्मचारियों में भेदभाव का डर? क्या वाकई 'चीता टीम' ही समाधान है?
देवबंद। भीषण गर्मी के बीच जहाँ देवबंद नगर की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है वहीं नगर पालिका के जिम्मेदार एसी कमरों में बैठकर पत्रकार वार्ता के जरिए गुलाबी सपने दिखा रहे हैं हाल ही में चेयरमैन के करीबी सभासद ने पत्रकारों के सामने दावों की जो लंबी फेहरिस्त रखी है, वह प्यासी जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
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मात्र एक पत्रकार वाली पत्रकार वार्ता में दावा किया गया कि 4 नए जनरेटर मंगाए गए हैं और 5-7 दिनों में सप्लाई सुधर जाएगी जनता पूछ रही है कि पिछले एक साल से जब पानी की समस्या विकराल थी तब ये जनरेटर कहाँ थे? क्या प्रशासन सिर्फ आपदा आने पर ही नींद से जागता है? या फिर ये सिर्फ जनता के गुस्से को शांत करने का एक और लॉलीपॉप है? सभासद महोदय खुद मान रहे हैं कि रेती चौक समेत कई जगहों के फ्रिज खराब हैं और उन्हें उठा लिया गया था मगर लगाना भूल गए।
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शासन को रिपोर्ट भेजने का बहाना बनाकर नगरपालिका अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है सच तो यह है कि टैक्स भरने वाली जनता को ठंडी बूंद नसीब नहीं है जबकि हुक्मरानों के दफ्तर ठंडी हवा से सराबोर हैं देवबंद नगर को जनता ने साफ कर दिया है कि उन्हें अब 'आश्वासन' नहीं आपूर्ति चाहिए नही तो नगर पालिका अध्यक्ष के करीबीयों की इन खोखली पत्रकार वार्ताओं का जवाब जनता सड़कों पर उतर कर देगी।
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वहीँ आगामी त्योहार ईद-उल-अज़हा को लेकर नगर पालिका परिषद में ज्ञापन सौंपने का सिलसिला भी शुरू हो गया है हालांकि सभासदों द्वारा चीता टीम से सफाई कराने की मांग ने अब एक नई बहस छेड़ दी है जानकारों का मानना है कि केवल एक विशेष टीम पर निर्भरता जताना न केवल बाकी सफाई कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करता है बल्कि यह धरातलीय सच्चाई से परे लोकप्रियता बटोरने की राजनीति भी हो सकती है।
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चेयरमैन विपिन गर्ग को सौंपे गए ज्ञापन के जवाब में यह सवाल उठ रहा है कि क्या देवबंद की पूरी सफाई व्यवस्था केवल "चीता टीम" के 10-15 सदस्यों के कंधों पर छोड़ी जा सकती है? पालिका के अन्य सफाई कर्मियों का तर्क है कि जब सभी वार्डों में कर्मचारी तैनात हैं, तो बार-बार एक ही टीम को 'तेज-तर्रार' बताकर सुर्खियों में लाना अन्य श्रमिकों के काम को कमतर आंकना है।
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जानकारों का कहना है कि नालों की सफाई के लिए केवल टीम की फुर्ती काफी नहीं है बल्कि नगर पालिका के पास पर्याप्त मशीनरी और कचरा निस्तारण के उचित संसाधन होने चाहिए, जिस पर ज्ञापन में चुप्पी साधी गई है आलोचकों का मानना है कि सभासदों को केवल ज्ञापन देने के बजाय अपने-अपने वार्डों में तैनात नियमित सफाई नायकों के साथ समन्वय बिठाना चाहिए, ताकि व्यवस्था स्थायी बनी रहे।
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विशेष टीम की मांग यह साबित करती है कि वार्डों की नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है नगर पालिका प्रशासन के सामने चुनौती केवल सफाई की नहीं बल्कि संसाधनों के समान वितरण की है चेयरमैन विपिन गर्ग के लिए यह मुश्किल होगा कि वह कुछ सभासदों की पसंदीदा टीम को काम पर लगाएं या पूरे नगर पालिका तंत्र को जवाबदेह बनाएं त्योहार की शुचिता के नाम पर हो रही यह राजनीति आने वाले दिनों में पालिका की बोर्ड बैठकों में भी हंगामा खड़ा कर सकती है।
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वही बीती ख़बर पर नगर के ही कुछ लोगों ने अपना रिएक्शन भी दिया किसी की भी निजता का उल्लंघन करना हमारा उदेश्य नही है मगर watsaap पर मुझसे ही नगर वासियों को जो शिकायत है वो ऊपर स्क्रीन शॉर्ट मे आपने पढ़ ही लिया है लेकिन आप नगर वासियों की सुविधा के लिए मैं यहां उसको साझा कर रहा हूं।"रज़ा भाई, यह सिर्फ एक वाटर कूलर की बात नहीं है, पूरे नगर के कूलर पिछले साल से सब उतार लिए गए हैं। आपने सिर्फ एक ही वाटर कूलर के बारे में लिखा है, यहाँ तक कि वाटर कूलर ही नहीं, उनके ऊपर से पानी के टैंक भी उतार लिए गए हैं। चेयरमैन के पास सभासदों को देने के लिए हर महीने मोटी रकम तो है, इसीलिए कोई सभासद नहीं बोला। कमी तो वार्ड के सभासदों की है, उन्हें आपने क्यों छोड़ दिया? उनका भी तो ज़िक्र करते आप।
रिपोर्ट - दीन रज़ा



