किसान मसीहा को नमन सहारनपुर में गूंजा जय जवान-जय किसान
- भाकियू ने मनाई महात्मा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि, एसपी देहात, सिटी मजिस्ट्रेट ने की शिरकत
- महात्मा टिकैत वो नाम जिसने किसानों को संघर्ष की नई पहचान दी, सहारनपुर कलेक्ट्रेट में विशेष आयोजन
- जाति-धर्म से ऊपर उठकर किसानों की आवाज़ बने थे टिकैत साहब आरिफ मलिक का भावुक संबोधन
- आज भी प्रासंगिक हैं टिकैत साहब के विचार सहारनपुर में एकजुट हुए हजारों किसान
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर आज उस महान व्यक्तित्व की यादों से सराबोर हो गया, जिन्होंने भारतीय किसानों को केवल लड़ना ही नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीना सिखाया भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) द्वारा महात्मा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में न केवल किसानों का हुजूम उमड़ा बल्कि प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने भी नम आंखों से बाबा टिकैत को याद किया।
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इस कार्यक्रम की सबसे खास तस्वीर तब दिखी जब एसपी देहात और सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्यक्रम में शिरकत की। अधिकारियों ने बाबा टिकैत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और किसानों के साथ मिलकर 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाए यह नजारा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के उस विराट व्यक्तित्व की गवाही दे रहा था, जिसका सम्मान समाज का हर वर्ग करता है।
भाकियू के मंडल महासचिव आरिफ मलिक ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत केवल एक नाम नहीं, बल्कि देश के करोड़ों किसानों की सामूहिक आवाज़ थे उन्होंने हमें जाति धर्म और क्षेत्रवाद की बेड़ियों को तोड़कर हक के लिए एकजुट होना सिखाया मंडल अध्यक्ष चौधरी अशोक कुमार और राष्ट्रीय सचिव विनय कुमार ने भी बाबा टिकैत के पुराने आंदोलनों के किस्से साझा किए उन्होंने बताया कि कैसे टिकैत साहब घंटों किसानों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे वक्ताओं का स्पष्ट संदेश था किसान कमजोर नहीं है बस उसे अपनी ताकत पहचानने की जरूरत है।
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युवा महानगर अध्यक्ष उसमान मलिक ने कहा कि बाबा टिकैत आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद हर किसान की आँखों में वही संघर्ष की चमक दिखाई देती है जो कभी महेंद्र सिंह टिकैत की पहचान थी आज की नई पीढ़ी के लिए उनका जीवन एक खुली किताब है जो सिखाती है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर सबसे बड़ी सत्ता को भी झुकाया जा सकता है।
श्रद्धांजलि सभा केवल यादों तक सीमित नहीं रही बल्कि यहाँ किसानों की वर्तमान स्थिति पर भी गंभीर चर्चा हुई।फसल का उचित मूल्य, बिजली-पानी की किल्लत, भूमि अधिग्रहण की जटिलताएं किसान नेताओं ने संकल्प लिया कि यदि किसान संगठित रहेगा तो टिकैत साहब के सपनों का भारत जरूर बनेगा जहाँ किसान का बेटा गर्व से खेती करेगा।
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कार्यक्रम में भाकियू के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही विनय कुमार (राष्ट्रीय सचिव) चौधरी अशोक कुमार (मंडल अध्यक्ष) आरिफ मलिक (मंडल महासचिव) नरेश स्वामी (जिला अध्यक्ष) उसमान मलिक (युवा महानगर अध्यक्ष) वसीम मलिक, वंश गौतम, वजिहुर रहमान, चांद गांधी और भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रिपोर्ट - दीन रज़ा








