खाकी पर दाग, रंगे हाथ दबोचा गया दरोगा! सहारनपुर में एंटी करप्शन टीम का बड़ा धमाका, ₹10,000 की घूस लेते तीतरो का सब इंस्पेक्टर गिरफ्तार
- 33 साल की सर्विस और अंत में 'रंगे हाथ' शर्मिंदगी! तीतरो थाने के गेट पर एंटी करप्शन टीम ने बिछाया ऐसा जाल, फँस गए दरोगा देशपाल सिंह
- ठीक दोपहर 12:27 बजे... और दरोगा जी का खेल खत्म! ₹10,000 की रिश्वत ने कराया 'लाट साहब' का कोर्ट-कचहरी
सहारनपुर। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो आम जनता न्याय की गुहार लगाने कहाँ जाए? अक्सर थानों में मामलों को रफा-दफा करने या फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए 'सेवा शुल्क' यानी रिश्वत की मांग की खबरें आती रहती हैं। लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं और जब 'एंटी करप्शन ब्यूरो' का डंडा चलता है, तो बड़े से बड़े खाकी धारी भी भीगी बिल्ली बन जाते हैं ऐसा ही एक हाई-वोल्टेज ड्रामा सहारनपुर जिले के तीतरो थाने के ठीक सामने देखने को मिला, जहाँ एंटी करप्शन की टीम ने एक घूसखोर सब इंस्पेक्टर को सरेआम रंगे हाथों दबोच लिया। इस धमाकेदार कार्रवाई के बाद से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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पूरी कहानी शुरू होती है ग्राम असावगढ़ से यहाँ के निवासी मुकेश कुमार पुत्र धूम सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक प्रार्थना पत्र शिकायत दिया था इस प्रार्थना पत्र के निपटारे और जांच को अपने पक्ष में करने की जिम्मेदारी तीतरो थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर (दरोगा) देशपाल सिंह के पास थी। मुकेश का आरोप है कि दरोगा देशपाल सिंह इस फाइल को रफा-दफा करने के एवज में लगातार 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। मुकेश रिश्वत देने के मूड में बिल्कुल नहीं था, इसलिए उसने सीधा रुख किया भ्रष्टाचार निवारण संगठन का रुख किया।
शिकायत मिलते ही भ्रष्टाचार निवारण संगठन, सहारनपुर मंडल के इंस्पेक्टर कुशलवीर सिंह के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम तैयार की गई। टीम ने पहले प्राथमिक जांच की और जब मामला सही पाया गया, तो दरोगा देशपाल सिंह को रंगे हाथों दबोचने के लिए एक तगड़ा जाल बिछाया गया गुरुवार के दिन योजना के मुताबिक, शिकायतकर्ता मुकेश कुमार केमिकल लगे नोटों की निर्धारित रकम (10 हजार रुपये) लेकर तीतरो थाने पहुँचा दरोगा देशपाल सिंह इस बात से बिल्कुल बेखबर था कि उसके हर कदम पर बाज जैसी नजर रखी जा रही है।
जैसे ही मुकेश ने रिश्वत की रकम दरोगा देशपाल सिंह के हाथ में थमाई और दरोगा ने उसे अपने कब्जे में लिया, वैसे ही घात लगाए बैठी एंटी करप्शन की टीम ने बिजली की फुर्ती दिखाई ठीक दोपहर के 12 बजकर 27 मिनट पर तीतरो थाने के मुख्य गेट के ठीक सामने दरोगा देशपाल सिंह को टीम ने चारों तरफ से घेरकर रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। जब दरोगा के हाथ धुलवाए गए तो केमिकल के कारण उनके हाथ लाल हो गए टीम ने मौके से ही घूस के 10 हजार रुपये बरामद किए और जरूरी कानूनी सबूत भी इकट्ठे किए इस अचानक हुई कार्रवाई को देख थाने और आसपास मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई और कयासों का बाजार गर्म हो गया।
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गिरफ्तार किए गए आरोपी सब इंस्पेक्टर देशपाल सिंह के बारे में जो जानकारी सामने आई है, वो वाकई हैरान करने वाली है देशपाल सिंह मूल रूप से बागपत जिले के काकोर गांव का रहने वाला है। वह कोई नया सिपाही या दरोगा नहीं था बल्कि वर्ष 1993 से पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे रहा था लगभग 33 सालों तक पुलिस महकमे में रहने के बाद, रिटायरमेंट के करीब आकर महज 10 हजार रुपये के लालच ने उसकी पूरी साख मिट्टी में मिला दी।
गिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी दरोगा को अपने साथ ले गई है भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी दरोगा देशपाल सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत थाना नानौता में मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है इस पूरे सनसनीखेज मामले की आगे की विवेचना संगठन के अधिकारी अमित कुमार सिंह को सौंपी जाएगी, जो इस बात की परतें खोलेंगे। इस कार्रवाई से एक बात तो साफ है कि अगर जनता ठान ले, तो भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं। 10 हजार रुपये की घूस ने एक दरोगा की सालों की नौकरी, पेंशन और इज्जत सब कुछ एक झटके में खाक कर दी।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

