गत दिनों दारुल उलूम देवबंद को बम बाँधकर उडाने की धमकी देने वाले वीरेंद्र गुर्जर से मिलिए
- उसी क्रम मे उनको शालीन भाषा मे देवबंद टुडे की ओर से जवाब देने का प्रयास
मिलिए वीरेंद्र गुर्जर से
नाम : वीरेंद्र गुर्जर।
आयु : 80 वर्ष के लगभग।
जन्म स्थान : ग्राम, मिरगपुर (देवबंद)।
वर्तमान निवास : जनपद सहारनपुर।
हमें याद है एक समय मंडी के ढाल पर, बत्रा बुक स्टोर के ऊपर, मरहूम पेंटर शमीम के पास वीडियो फ़िल्में बनाने की योजना बनाया करते थे, हमारे चौधरी साहब। मरहूम शमीम पेंटर गीत, रागनी, कहानी सुनाया करते थे। शायद वक्त ने वफ़ा नहीं की। चौधरी साहब के ख्वाब दिल के किसी कोने में दफ़न हो गए। शमीम पेंटर का भी इंतकाल हो गया।
थोड़े समय के लिए चौधरी साहब पर्दे के पीछे चले गए। फिर देश को चलाने वालों ने एक फार्मूला दिया, जिसके अंतर्गत मुसलमान, इस्लाम, मस्जिद, मदरसा, मज़ार, कब्रिस्तान, खतने, कुरआन, बुर्का, हिजाब, कुर्बानी, दाढ़ी, नमाज़, निकाह, तलाक़, हलाला जैसे दीनी और शरई मसलों पर अनभिज्ञ कुत्तों ने भौंकना आरम्भ किया। जमकर इस्लाम और मुस्लिम मुखालिफ़ प्रोपगेंडा शुरू किया, शीर्ष से लेकर निम्न तक सभी को इस दुष्चार का लाभ मिला, मिल रहा है, मिलता रहेगा।
बस यहीं से चौधरी साहब ने यू-टर्न लिया और एशिया में इस्लाम धर्म की महानतम शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। आगे लिखने से पहले एक जानकारी और साझा करना ज़रूरी है कि चौधरी साहब का जन्म एक ऐसे गांव का है जहां माँस, मछली, अंडा, शराब, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, प्याज़, लहसुन सब पर लम्बे समय से पूर्ण प्रतिबंध है। इसका पालन भी सख्ती से है। मगर हमारा अनुभव कहता है कि व्यवहार और व्यक्तित्व में इसका असर चौधरी साहब पर नहीं दिखता। इसका सबसे बड़ा सबूत खुद चौधरी साहब हैं जो ऐसे सात्विक गाँव के होने के बावजूद बम बाँधकर दारुल उलूम देवबंद को ध्वस्त करने की बात करते हैं, पूर्व में वो दारुल उलूम का पुतला जला चुके हैं। इस गांव के लोगों को तो शांत, प्रेमी, अहिंसावादी, सत्यवादी वाला होना चाहिए था।
मगर! चौधरी साहब आपके साम्प्रदायिक कंधों पर बैठकर पहले लखनऊ विधानसभा में जायेंगे। फिर दारुल उलूम देवबंद को बंद कराकर अलगाववाद, आतंक, आतंकियों का पैदा होना बंद करेंगे।
सबसे दुःखद और हास्यास्पद यह है कि प्रदेश, जनपद सहारनपुर, विकास खंड देवबंद का सम्पूर्ण पुलिस प्रशासन, जिलाधिकारी, ख़ुफ़िया विभाग, उपजिलाधिकारी, सी.ओ., सामाजिक संस्थाएं जो ईद और होली मिलन का आयोजन कर सिर्फ दिखावा करती हैं। हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के नाम पर कवि सम्मेलन-मुशायरा करती हैं। इनके आयोजक, शायर, कवि, हिंदू-मुस्लिम प्रतिभागी इस मुद्दे पर क्यों मौन रहे..., सब अंदर से कट्टर हैं... मंच पर मलाई डकारते हैं। क्यूँ... उन्होंने कोई अग्रिम कार्यवाही नहीं की, पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई, निंदा नहीं की, दो बोल उनके मुख से नहीं निकले। इससे बढ़कर सरकारी तंत्र मूर्ख रहा।
अगर! अगर! यही बात माँ श्री त्रिपुर बाला सुंदरी देवी मंदिर या मिरगपुर के बाबा फकीरा दास के मंदिर के बारे में कोई मुस्लिम कहता तो........??????
चौधरी साहब..... आपको मशवरा है, बाबा फकीरा दास की सर्वश्रेष्ठ शिक्षाओं को आम करो, पूरा देश नशे में डूब रहा है। भारत भ्रमण करो। हर वर्ष लाखों लोग नशे से मर रहे हैं, लाखों लोग नशा तस्करी में जेल में हैं, सरकार अरबों रुपया कमा रही है..... इसके विरुद्ध अभियान चलाओ, नशखोर युवा पीढ़ी पर अहसान होगा।
और...... अंत में सुनो दारुल उलूम देवबंद करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, यह आत्मा में बसता है, दिल में धड़कता है, खून में दौड़ता है, यह आँखों का नूर है। इसने हजारों स्वतन्त्रता सेनानी दिए, निःशुल्क आवासीय शिक्षा दी, लाखों लोगों को साक्षर किया, दुनिया के हर कोने में इसके योग्य छात्र विश्वस्तरीय सेवायें दे रहे हैं... यह सरकार के सामने हाथ नहीं फैलाते.... यहां की प्रबंधक समिति (मजलिस ए शूरा) मोहतमिम, उस्ताज, शागिर्द, कर्मचारी को... तुम्हारी तरह आतंकी, अलगावद, देशद्रोही, समाज को तोड़ने और साम्प्रदायिकता की बातें करने की ना आदत है और ना ज़रूरत है। इसका 160 साल का सुनहरी इतिहास है। यह संस्था 1947 में बंटवारा विरोधी रही। गाय काटने के विरुद्ध फतवा दिया। आतंकवाद के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर के सम्मलेन किए, माल्टा की जेल और उसके दर्रो-दीवार में इसके उस्ताज और शागिर्दों ने देश की आज़ादी के लिए जेल की सजा काटी। यह उस मजहब के मानने वाले जिसने 1450 साल में 57 इस्लामिक देश संसार को दिए...... और तुमने क्या दिया नफरत के सिवा......?




