टैक्स हमारा, ऐश तुम्हारी? देवबंद नगर पालिका के 46 करोड़ 58 लाख के विकास का पोस्टमार्टम

टैक्स हमारा, ऐश तुम्हारी? देवबंद नगर पालिका के 46 करोड़ 58 लाख के विकास का पोस्टमार्टम

  • आख़िर कहां लगा है 2024-25 का 46 करोड़ 58 लाख का बजट, धरातल पर तो कुछ नही दिखता
  • आखिर जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा ? पालिका अध्यक्ष, या अध्यक्ष के करीबी, या मालाएं अर्पित कराने वाले चिंटू
  • जल निकासी के लिए 2 करोड़, फिर भी जलभराव, कहां चले गए देवबंद नगर के वरिष्ट RTI एक्टिविस्ट

देवबंद। आंकड़े गवाह हैं कि पैसा पानी की तरह बह रहा है, लेकिन हकीकत गवाह है कि वह पैसा देवबंद की नाले नालियों पय जल अपूर्ति, स्वास्थ सेवाओं मे नहीं, बल्कि कहीं और ही 'एडजस्ट' हो रहा है। नगर पालिका परिषद देवबंद के वर्ष 2024-25 के बजट दस्तावेज़ ने एक ऐसा जिन्न बाहर निकाल दिया है, जिसने पालिका प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की नींद उड़ा दी है ​जनता पूछ रही है कि आख़िर कहां लगा है 2024-25 का यह 46 करोड़ 58 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट? क्योंकि धरातल पर तो सिर्फ बदहाली, जाम नालियां और नेताओं के गले में लटकती गेंदे के फूलों की मालाएं ही नजर आ रही हैं!

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​पालिका अध्यक्ष, उनके करीबी, या फिर सुबह से शाम तक सिर्फ जिंदाबाद के नारे लगाने और 'मालाएं अर्पित कराने वाले चिंटू'? यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देवबंद के हर टैक्सपेयर का सवाल है। जब गृहकर, जलकर, नामांतरण शुल्क और लाइसेंस फीस के नाम पर जनता की जेब से लगभग 6.5 करोड़ रुपये वसूले जा रहे हैं तो बदले में उन्हें बदहाल सड़कें और सड़ांध मारती गलियां क्यों मिल रही हैं?

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बाजीगरी देखिए ​कुल अनुमानित आय: ₹46.57 करोड़/ ​राज्य वित्त आयोग: ₹22 करोड़/ ​15वां वित्त आयोग: ₹8 करोड़/ ​सीवरेज एवं जल निकासी: ₹2 करोड़/ ​डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सौर पुनर्जीवन योजना: ₹1.65 करोड़/ ​आदर्श नगर योजना: ₹1.5 करोड़/ ​गौशाला योजना: ₹82.95 लाख/ ​मेला आय: ₹70 लाख/ ​जल निकासी के लिए 2 करोड़, फिर भी जलभराव तो जनता को इस पेसे का हिसाब क्यूं नही मिलना चाहिए ये अपने आप मे एक बड़ा सवाल है और नगर पालिका परिषद की प्रदर्शिता पर गंभीर सवाल है?

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​बजट चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि सीवरेज और जल निकासी के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान है लेकिन मानसून की पहली बारिश होते ही देवबंद का जो हाल होता है, वह किसी से छुपा नहीं है सड़कें तालाब बन जाती हैं और नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों में तैरता है ​ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि कहां चले गए देवबंद नगर के वरिष्ठ RTI एक्टिविस्ट? क्या इन करोड़ों के घपले पर उनकी आरटीआई की स्याही सूख चुकी है, या फिर इस चुप्पी के पीछे भी कोई 'क्रोनोलॉजी' है?

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​वार्डों में कूड़े के पहाड़, मच्छरों का तांडव और बदबू से बेहाल जनता गर्मी और बरसात आते ही बीमारियां पैर पसारने लगती हैं, लेकिन वर्षों से देवबंद की जनता ने ईमानदारी से होने वाली फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव का प्रभावी अभियान नहीं देखा चंद वीआईपी गलियों को छोड़ कर जब बजट में करोड़ों रुपये स्वास्थ्य और सफाई के नाम पर आ रहे हैं, तो वह बजट जा कहां रहा है?

​देवबंद की जनता के सीधे 5 सवाल 

सवाल 1: सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों के नाम पर प्रतिवर्ष वास्तव में कितना पैसा ऑन-पेपर और कितना ऑफ-पेपर खर्च होता है?
​सवाल 2: फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव का बजट किस ठेकेदार की जेब को सैनिटाइज कर रहा है?
​सवाल 3: सीवरेज और जल निकासी के 2 करोड़ रुपये से शहर के किस हिस्से का 'उद्धार' हुआ, जनता को दिखाया जाए?
​सवाल 4: करोड़ों की सौर ऊर्जा और आदर्श नगर योजनाओं का लाभ किन खास और चहेते क्षेत्रों तक सीमित रह गया?
​सवाल 5: नगर पालिका वार्डवार विकास कार्यों का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने से क्यों कतरा रही है?

​बजट सिर्फ फाइलों को चमकाने और अपनी पीठ थपथपाने के लिए नहीं होता। अगर पालिका प्रशासन सच में जनता के प्रति जवाबदेह है, तो उसे बंद कमरों से बाहर निकलकर हर एक पाई का हिसाब सार्वजनिक करना होगा। देवबंद की जनता अब जागरूक हो चुकी है; उसे कागजों का '46 करोड़' नहीं, अपनी दहलीज पर साफ सड़क और स्वच्छ पानी और सांस लेने के लिए शुद्ध हवा चाहिए जबकि देवबंद नगर का AQI पुराने सभी रिकॉड तोड़ कर नगर वासियों के फेंफड़ों को छलनी कर रहा है। ​अब देखना यह है कि जनता के इन तीखे सवाल पर पालिका के 'सिंहासन' से कोई जवाब आता है या हमेशा की तरह चुप्पी की चादर तान ली जाएगी।

रिपोर्ट - दीन रज़ा


Deen Raza

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