जनपद में 415 स्कूली वाहनों को नोटिस, मानकों पर खरे नहीं उतरे वाहन; 156 की फिटनेस रद्द
- जिले में 232 स्कूलों के पास अपने निजी वाहनों की संख्या कुल 1,016 है, यानी आधे कबाड़
- देवबंद और बड़गांव में चल रहे डग्गामार स्कूली वाहन क्य़ा परिवहन विभाग की इस कार्रवाई मे शामिल नही हैं?
- स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्यूं संवेदनशील नही हैं स्कूल प्रबंधन
देवबंद। इन दिनों जनपद सहारनपुर में आरटीओ (RTO) प्रशासन द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत जिले भर के स्कूल वाहनों की सघन चेकिंग के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जनपद में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
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एआरटीओ (प्रवर्तन) एम.पी. सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस जांच में मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले 415 वाहनों में कमियां पाई गईं, जिनमें से 156 वाहनों की फिटनेस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न स्कूलों के साथ पंजीकृत कुल 4,448 वाहनों के रिकॉर्ड खंगाले गए थे। जांच का मुख्य केंद्र बिंदु बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उपकरण रहे। विभाग ने जनपद के सभी 232 स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना वैध फिटनेस और सुरक्षा मानकों के एक भी वाहन सड़क पर नहीं उतरने दिया जाएगा।
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जांच के दौरान वाहनों में सुरक्षा उपकरणों का भारी अभाव पाया गया। कई बसों में फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) एक्सपायर हो चुके थे या मौजूद ही नहीं थे। वहीं तकनीकी खामियां भी सामने आईं; कई बसों में जीपीएस (GPS) सिस्टम निष्क्रिय पाया गया और खिड़कियों पर लोहे की जाली तक नहीं लगी थी। दस्तावेजों में खामियों के साथ-साथ फर्स्ट-एड बॉक्स का न होना और वैध फिटनेस प्रमाण पत्र की अनुपस्थिति भी प्रमुख कारण रहे।
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बता दें कि यह अभियान केवल शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देवबंद, रामपुर मनिहारान और गंगोह जैसे तहसील क्षेत्रों में भी प्रभावी रहा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन 156 वाहनों की फिटनेस रद्द की गई है, उन्हें दोबारा सड़क पर चलने के लिए मानक पूरे कर नया फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। यदि इसके बावजूद ये वाहन सड़क पर पाए गए, तो उन्हें सीज कर दिया जाएगा। प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को स्कूल भेजते समय वाहन की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की स्वयं भी जांच करें।
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वहीं, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि देवबंद और बड़गांव सहित अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे डग्गामार स्कूली वाहनों पर परिवहन विभाग की इस कार्रवाई का क्या असर पड़ता है। बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर कब तक मोटी फीस वसूलने वाला स्कूल प्रबंधन तंत्र छात्रः छात्राओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करता रहेगा।

