पश्चिम प्रदेश की मांग फिर हुई बुलंद, गढ़मुक्तेश्वर में भगत सिंह वर्मा ने छेड़ा नया अभियान
- पृथक राज्य बनने तक संघर्ष जारी रहेगा, बृजघाट बनेगी राजधानी और हाईकोर्ट का केंद्र भगत सिंह वर्मा
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
सहारनपुर । पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पृथक राज्य का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। गढ़मुक्तेश्वर स्थित स्काईलार्क रेस्टोरेंट में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा एवं भारतीय किसान यूनियन वर्मा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने पृथक पश्चिम प्रदेश के निर्माण तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया बैठक को संबोधित करते हुए भगत सिंह वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश का विशाल आकार ही प्रदेश की अधिकांश समस्याओं की जड़ बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया के सबसे बड़े राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर पड़ गया है, जिसके चलते भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, अपराध और अव्यवस्था लगातार बढ़ रही है।
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उन्होंने कहा कि पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा गांव-गांव और नगर-नगर जाकर युवाओं को पृथक राज्य आंदोलन से जोड़ने का अभियान चला रहा है। उनका कहना था कि पृथक पश्चिम प्रदेश केवल एक राजनीतिक मांग नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आवश्यकता है भगत सिंह वर्मा ने प्रदेश सरकार के बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2026-27 का उत्तर प्रदेश का बजट 9 लाख 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक होने के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की आबादी और आर्थिक योगदान को देखते हुए यहां कम से कम दो एम्स, दो आईआईटी, दो आईआईएम और दो एनआईटी जैसे संस्थान होने चाहिए। उनका दावा था कि पृथक पश्चिम प्रदेश बनने पर शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था देश में सबसे बेहतर होगी तथा आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी सभा में सबसे अधिक चर्चा उस वक्त हुई जब भगत सिंह वर्मा ने कहा कि पृथक पश्चिम प्रदेश बनने पर बृजघाट (गढ़मुक्तेश्वर) को राजधानी तथा हाईकोर्ट का मुख्य केंद्र बनाया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लगभग 8 करोड़ आबादी के विकास के लिए स्थानीय नेतृत्व को अवसर मिलना चाहिए। राज्य बनने पर मुख्यमंत्री, मंत्री और सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलने का दावा भी उन्होंने किया राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर उत्तर प्रदेश को चार भागों में विभाजित करने तथा राष्ट्रहित में पृथक पश्चिम प्रदेश के गठन की मांग की है। उन्होंने जनता से अपने सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों से क्षेत्रीय विकास के मुद्दे पर जवाब मांगने की अपील भी की।
बैठक को संबोधित करते हुए पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव रामकुमार नेता ने कहा कि पिछले दो दशकों से चल रहे इस आंदोलन को अब नई ऊर्जा मिल रही है उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह एक बड़े जन आंदोलन का रूप लेगा उन्होंने कहा कि पृथक राज्य बनने पर किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य मिलेगा, युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से लंबित हाईकोर्ट बेंच की मांग का समाधान होगा। उन्होंने मेरठ में हाईकोर्ट तथा आगरा में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग भी दोहराई।
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कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रदेश सचिव मोहम्मद मुखिया त्यागी ने कहा कि पश्चिम प्रदेश के निर्माण के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की 8 करोड़ जनता के विकास और सम्मान के लिए अब पृथक राज्य की मांग को और अधिक मजबूती से उठाया जाएगा बैठक की अध्यक्षता प्रमुख समाजसेवी राजपाल सिंह ने की। उन्होंने युवाओं से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए पृथक पश्चिम प्रदेश का निर्माण आवश्यक है।
बैठक में राजकुमार सिंह एडवोकेट, मनोज चौधरी प्रधान, सरदार दर्शन सिंह प्रधान, यशवीर प्रधान, टीकम सिंह प्रधान, मनोज प्रधान, योगेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह, संजीव सेठ, समरपाल सिंह, सत्येंद्र सिंह सेठी, तेजवीर सिंह, कपिल सिंधु, ओमपाल सिंह, सचिन चौधरी, बाबू चौधरी, मुन्नू शर्मा, अवनीश चौहान, संदीप चौधरी, परविंदर सिंह, राजेंद्र कुमार सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
गढ़मुक्तेश्वर में आयोजित यह बैठक दर्शाती है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पृथक राज्य की मांग अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि इस मांग को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता सीमित दिखाई देती है, लेकिन सामाजिक संगठनों और किसान संगठनों के माध्यम से इसे जन आंदोलन का रूप देने की कोशिशें जारी हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा क्षेत्रीय राजनीति में कितना प्रभाव डालता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
रिपोर्ट - दीन रज़ा







