हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन
- छोटे और मझोले समाचार पत्र लोकतंत्र की रीढ़, इन्हें बचाना समाज की जिम्मेदारी : आलोक तनेजा
- पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा, इसकी स्वतंत्रता सर्वोपरि : विपिन गर्ग
- कलम की आवाज़ को मिला सम्मान, दीन रज़ा सहित कई पत्रकारों का हुआ अभिनंदन
देवबंद। हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के नेतृत्व में खिलाफत बुलेटिन द्वारा एक भव्य विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप, चुनौतियों, लोकतंत्र में उसकी भूमिका तथा छोटे एवं मझोले समाचार पत्रों की स्थिति पर गंभीर चिंतन किया गया। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों और पत्रकारों को सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आलोक कुमार तनेजा ने अपने संबोधन में कहा कि सरकारी तंत्र की बेरुखी और भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण छोटे एवं मझोले समाचार पत्रों का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापन नीति और बड़ी मीडिया कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के चलते छोटे समाचार पत्रों के लिए जीवित रहना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत बनाए रखने के लिए छोटे समाचार पत्रों को संरक्षण और सहयोग मिलना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अशोक गुप्ता ने कहा कि पत्रकारिता भारतीय लोकतंत्र का चौथा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। यदि यह स्तंभ कमजोर पड़ता है तो लोकतंत्र की पूरी संरचना प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों और दबावों के बावजूद पत्रकारों को निष्पक्ष और सजग रहकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए नगरपालिका परिषद अध्यक्ष विपिन गर्ग ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने पत्रकारिता को एक जिम्मेदार और आत्मनियंत्रित व्यवस्था माना था। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का वह वर्ग है जो स्वयं अपनी आचार संहिता निर्धारित करने में सक्षम है और लोकतंत्र को दिशा देने का कार्य करता है।
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जामिया तिब्बिया मेडिकल कॉलेज के सचिव डॉ. अनवर सईद ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं बल्कि एक मिशन है। पत्रकार को समर्पण, निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य करना चाहिए क्योंकि उसकी लेखनी तलवार और तोप से भी अधिक प्रभावशाली होती है भारतीय पाठशाला बालीवाल अग्रवाल के अध्यक्ष राघव दास ने कहा कि पत्रकारों को अपेक्षित सामाजिक और प्रशासनिक सहयोग नहीं मिल पाता तथा आर्थिक संकटों से भी जूझना पड़ता है। इसके बावजूद पत्रकार समाज और देशहित में लगातार कार्य कर रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंघल ने महान पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी और लाला जगत नारायण को आदर्श बताते हुए पत्रकारों से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। समाजसेवी सेठ कुलदीप कुमार ने कहा कि आज पत्रकार की स्थिति ऐसी हो गई है कि यदि वह एक पक्ष की सच्चाई लिखता है तो दूसरा पक्ष उसे पक्षपातपूर्ण पत्रकारिता कहने लगता है। ऐसे समय में निष्पक्षता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ठाकुर अनिल सिंह ने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों का लगातार ह्रास हो रहा है, जिसका प्रभाव कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और प्रेस सभी पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वालों को सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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वरिष्ठ पत्रकार रोहिताश कुमार वर्मा ने पत्रकारिता को एक कठिन और चुनौतीपूर्ण मार्ग बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अत्यंत सावधानी, धैर्य और विवेक की आवश्यकता होती है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन शामली के जिलाध्यक्ष इंदरपाल सिंह पांचाल ने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होता है, जो अपने व्यक्तिगत जोखिम की परवाह किए बिना समाज की सच्चाई को सामने लाता है। वरिष्ठ पत्रकार सतीश आर्य ने कहा कि वर्तमान पत्रकारिता अनेक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से घिरी हुई है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की बढ़ती संख्या और मीडिया संस्थानों का अत्यधिक व्यावसायिक होना भी पत्रकारिता की गिरती गुणवत्ता का एक प्रमुख कारण है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार ओमवीर सिंह ने कहा कि तमाम दमनात्मक परिस्थितियों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद छोटे और मझोले समाचार पत्र आज भी अपने दम पर समाज और राष्ट्र की आवाज बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि छोटे समाचार पत्र देश के कोने-कोने तक एक समान दृष्टिकोण और समाचार पहुंचाने का कार्य करते हैं। इस अवसर पर संजय राठी, गुरजोत सेठी, अरुण जैन, सलीम कुरैशी, आबाद अली, सचिन छाबड़ा सहित अनेक वक्ताओं ने भी पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
समारोह में नगर एवं बाहर से आए पत्रकारों, समाजसेवियों तथा विशिष्ट अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में मुमताज अहमद, वजाहत शाह उर्फ कमल देवबंदी, दीन रज़ा, मुईन सिद्दीकी, मुशर्रफ उस्मानी, गुरजोत सेठी, डॉ. शिबली, साजिद खान, बलबीर सैनी, राजकुमार जाटव, अश्वनी गर्ग, अफजाल सिद्दीकी, इमराज शेख, असद सिद्दीकी, महताब आजाद सहित अनेक प्रमुख नाम शामिल रहे इसके अतिरिक्त संजय राठी, गब्यूर मलिक, संजय प्रजापति, नूर मोहम्मद, दिलशाद राणा, सुमित टपरानिया, जुहेब खान, वेद प्रकाश पांडे, बलबीर सैनी और डॉ. शमीम देवबंदी को भी प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रामकरण बौद्धाचार्य, यशपाल सिंह, डॉ. शिवकुमार, अजय बौद्ध, राकेश कुमार, अंजली बोकाडिया, आशुतोष बोकाडिया, श्रीमती संयोगिता गौतम सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार उपस्थित रहे। अंत में कार्यक्रम के संयोजक ओमवीर सिंह और राजकुमार जाटव ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए समारोह की सफलता के लिए सभी को बधाई दी।
रिपोर्ट - दीन रज़ा







