ईद की आड़ में प्रशासनिक दिखावा, पहले शहर की हालत सुधारें, फिर अपील का ढोंग करें ईओ और चहेते सभासद
- चाटुकारों के पल्लू में छिपे आका ईद की आड़ में प्रशासनिक ढोंग और कोमा में देवबंद की सफाई व्यवस्था, पवित्र स्थलों का भी नहीं रहा लिहाज
- बंद कमरों में सर्वसम्मति का खेल और बाहर जनता से विश्वासघात, पांच-पांच महीने गायब रहते हैं सफाई कर्मचारी, चोक नालियों से बजबजा रहा शहर
- सोशल मीडिया पर फोटोबाज़ी और 'ज्ञापन का खेल' बंद करे भ्रष्ट पालिका गैंग, धरातल पर शहर बना नर्क! बोर्ड बैठक में सन्नाटा, बाहर नौटंकी
देवबंद। अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए चाटुकारों के पल्लू में छिपने की निकम्मी कोशिश अब देवबंद नगर की जागरूक जनता कामयाब नहीं होने देगी खोखले वादों, कागजी दावों और सोशल मीडिया की झूठी वाहवाही के पीछे का घिनौना सच अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है तीन-तीन सभासदों के राज से गुजरने वाले नाले की सुध लेने के लिए पांच पांच महीने तक सफ़ाई कर्मचारियों का इन्तेज़ार कर रहा हालत इस क़दर - बदतर हो चुकी है जिसे देखकर साफ लगता है कि देवबंद नगर पालिका परिषद का सफाई और स्वास्थ्य विभाग या तो गहरी कोमा में चला गया है या फिर आईसीयू में वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें गिन रहा है।
पालिका प्रशासन के निकम्मेपन का नया अध्याय तब शुरू हुआ जब ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर अधिशासी अधिकारी (EO) और उनके चहेते सभासदों के गैंग ने सफाई व्यवस्था और सौहार्द बनाए रखने की एक खोखली अपील जारी की। इस सरकारी ड्रामे को लेकर पूरे देवबंद शहर में तीखा आक्रोश फूट पड़ा है। स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि यह तथाकथित अपील सिर्फ और सिर्फ एक प्रशासनिक ढोंग और औपचारिकता है, जबकि धरातल पर नगर की स्थिति नारकीय हो चुकी है।
भायला रोड से शास्त्री चौक को जोड़ने वाले नाले की पटरी से रोजाना सैकड़ों नगर वासी गुजरते हैं। लेकिन पालिका अध्यक्ष के बेहद 'खास और करीबी' सभासद के इस भ्रष्ट साम्राज्य में इस नाले की सुध लेने वाला कोई नहीं है। पांच-पांच महीने बीत जाते हैं, पर जनता को सफाई कर्मचारियों के दर्शन तक नहीं होते मोहल्लों की नालियां महीनों से चोक पड़ी हैं, जिसके कारण गलियों में गंदा पानी बह रहा है नगर के मुख्य रास्ते पर भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है और पूरी सड़कें कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी है सोने पर सुहागा तो यह है कि अब इस भ्रष्ट नगर पालिका परिषद को हमारे पवित्र स्थलों की पवित्रता का भी कोई लिहाज नहीं रह गया है नगर पालिका ने अब शहर के धार्मिक स्थलों को भी कचरे की रौनक से चार चांद लगाने का काम शुरू कर दिया है देवबंद नगर पालिका और इसके भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों की सेहत पर जनता की आस्था से कोई फर्क नहीं पड़ता त्योहारों के समय विशेष सफाई अभियान की बड़ी-बड़ी घोषणाएं हवा हवाई साबित हो रही हैं और खुले में पड़े कचरे से उठती सड़ांध के बीच लोग जीने को मजबूर हैं।
डॉ. बशीर बद्र का जाना उर्दू अदब के एक सुनहरे युग का अंत है। डॉ. नवाज देवबंदी
नगर के व्यापारियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने पालिका प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए पूछा है कि जब मुख्य मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, स्ट्रीट लाइटें महीनों से फूकी पड़ी हैं और सोलर लाइटों का कोई अता पता नहीं है वार्डों से कूड़ा उठाने वाला कोई नहीं है तो अखबारों में केवल बयान जारी करने से क्या समस्याएं खत्म हो जाएंगी? प्रशासन त्योहारों की आड़ में अपनी साल भर की नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। मानसून सिर पर है और मामूली बारिश में ही पूरा देवबंद टापू बन जाता है जलभराव की इस विकराल समस्या पर बात करने के बजाय अधिकारी केवल फोटो खिंचवाने में व्यस्त हैं।
देवबंद पालिका का महा-घोटाला क्या 'मोटे लिफाफों' के दम पर चल रहा है डमी कर्मचारियों का काला धंधा?
देवबंद नगर पालिका परिषद के अधिकारी और इन चहेते चमचों का यह 'गैंग' जनता को इतना मूर्ख समझता है कि सोशल मीडिया पर चमचमाती फोटो डालकर वाहवाही लूटने को ही असली विकास मान बैठा है। सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में इन चमचों के हलक से जनता के पक्ष में एक भी बात क्यों नहीं निकलती? वहां न तो कोई बहस होती है और न ही जनता के हक की चर्चा। सारे फैसले पहले से ही 'सर्वसम्मति' के नाम पर बंद कमरों में तय कर लिए जाते हैं इसके बाद शुरू होता है जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए 'ज्ञापन-ज्ञापन का खेल'। अपनी ही व्यवस्था के खिलाफ हाथ में कागज का टुकड़ा लेकर फोटो खिंचवाना और उसे अखबारों में छपवाना, यही इनका असली चरित्र है। जनता अब यह समझ नहीं पा रही है कि बोर्ड बैठक में उनके हितों की रक्षा करने के लिए इन्हें वोट देकर जिताया था, या फिर सोशल मीडिया पर चाटुकारों की खबरें देखने के लिए?
हरिद्वार में ब्लाइंड मर्डर देवबंद के कलीम की बेरहमी से हत्या, भाई कामिल ने भागकर बचाई जान
वार्डवार सफाई व्यवस्था टूटी सड़कें और ध्वस्त जल निकासी को लेकर अब विपक्ष और जागरूक नागरिकों के स्वर बेहद उग्र हो चुके हैं जनता ने मांग की है कि नगर पालिका केवल कागजी अपीलें बंद करे और वार्डवार किए गए कामों का सार्वजनिक रिपोर्ट कार्ड जारी करे देवबंद की जनता अब भ्रष्ट अधिकारियों के भाषण और झूठे वादे नहीं, बल्कि जमीनी काम देखना चाहती है यदि चंद दिनों के भीतर इस नरक बन चुके शहर की सूरत नहीं बदली, तो पालिका प्रशासन के खिलाफ एक ऐतिहासिक और व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी खुद प्रशासन की होगी!
रिपोर्ट - दीन रज़ा




