Whatsapp यूनिवर्सिटी से प्राप्त हुआ 15 से बीस सालों की पत्रकारिता का अनुभव
- देवबंद नगर के अंदर अवैध रूप से बिक रही शराब और हर गली मुहल्ले में फेल रहे नशे के मकड़जाल पर पसरा है सन्नाटा..?
- समाज के आईने पर चढती धूल के जिम्मेदार कोन..मीडिया मे कहां खड़ा है अपना सहारनपुर...?
दीन रज़ा सिद्दिकी
सहारनपुर-- जनपद सहारनपुर मे पत्रकारों को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाजर ज़्यादा गर्म है वजह है शायद तथाकथित पत्रकारों के काले कारनामे। और उनकी चर्चा बीते दिनों मे बहुत सारे लोगों ने पर्सनल पर अपनी बहुत सारी बातें साझा की सबका ज़िक्र करना ना मुमकिन है और ना हमरा विषय है। बीते दिनों हमने सवाल उठाया था कि जनपद सहारनपुर मे उगाही गैंग के लिए पत्रकार संगठनों को अपनी ओर से कारवाई करने की आवश्यकता है क्यूंकि पूरे जनपद मे ही बहुत से गैंग सहारनपुर वासीयों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं।
आज 04 फ़रवरी शाम के समय 5 बजकर 15 मिनट पर हमारे द्वारा ही बनाए गए whatsapp ग्रुप दैनिक बुलन्द भारत सहारनपुर मे एक आर्टिकल मिला जो कि देवबंद नगर के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा पोस्ट किया गया था।
निजता के अधिकार का ख्याल रखते हुए हम महोदय की पहचान गुप्त रख रहे हैं उनके इस साहस के लिए बधाई भी देते हैं के उन्होंने समय निकाल कर पत्रकारों के विषय में कुछ लिखने का प्रयास किया वर्ना इस विषय पर कोई ज्यादा कुछ नहीं बोल पाता है....अनुभव लिखा है भले ही मज़ाक़ मे लिखा हो...?
महोदय लिखते हैं- जैसा कि सभी जानते हैं और यह एक अकाट्य सत्य भी है कि आज के समय में पत्रकारिता कौड़ी के दामों के मानिंद खुले बाजार में नीलाम हो रही है पत्रकारिता के प्रारंभिक दौर से बड़े-बड़े राजनेताओं से लेकर फिल्मी एक्टरों तक शासन से लेकर प्रशासन तक,हर घर परिवार की दुखी घटनाओं से लेकर दुर्घटनाओं तक हंसी ठिठोली से लेकर हर प्रकार के सामाजिक मनोरंजन तक ज्ञान से लेकर विज्ञान तक मीडिया के पास जाने या उन्हें बुलाने की परंपरा का चलन प्रारंभ से रहा है।
मीडिया और किसी भी प्रकार की घटनाओं का संबंध जन्म-जन्मांतर से होता है। बरहाल आज के समय में साहब डिग्रीधारक पत्रकार बनने के लिए बहुत ही पापड़ बेलने पड़ते हैं,अव्वल तो इस पेशे में आने के लिए इंस्टिट्यूशन में हाई क्वालीफिकेशन अर्थात ग्रेजुएशन का होना अनिवार्य होता है।
अगर आप नहीं भी हैं तो कम अस कम इंटरमीडिएट हो तब भी चल ही जाएगा,लेकिन आज के दौर को देखते हुए अगर आप कम पढ़े लिखे हैं या फिर पूरी तरह से अनपढ़ छाप हैं तो फिर क्या कहने साहब फिर तो आपको बिल्कुल भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आप ही हैं जो पत्रकारिता के लिए उपयुक्त हैं।
और आप ही पत्रकारिता के लिए बने हैं अपना सुनहरा भविष्य चमकाने के लिए फिर तो आप पत्रकारिता के भीतर कूद पड़िए, आपको कठिन काम धंधे की फजीहतों से बचाने के लिए मेरे जैसे आपके खादिम ने आप जैसे अनपढ़ श्रीमान जी के लिए ही झोलाछाप पत्रकार बनने के लिए कुछ फार्मूले ईजाद किए हैं, जिन्हें अमल में लाकर आप आसानी से पत्रकार बन सकते हैं।
महोदय ने ये भी स्पष्ट किया है कि - मैं पहले ही निवेदन कर दूं कि मेरी कोई फीस-वीस नहीं है सिर्फ इतना ध्यान रखें कि आपकी झोलाछाप पत्रकारिता यदि चल निकले तो बस एक नारियल अवश्य चढ़ा देना। उससे आपके द्वारा किए गए हर एक भ्रष्टाचार, दलाली,मुखबिरी, या किसी भी भोले-भाले व्यक्ति से अवैध निर्माण में लूटखसोट करने के बाद भी आपका एक साथ भला होता रहेगा।
चलिए अब आपको झोलाछाप फर्जी पत्रकार बनने के कुछ नुस्खे ईज़ाद करा देते हैं, झोलाछाप पत्रकार बनने के लिए सबसे जरूरी चीज है एक मोटरसाइकिल एक फोन और एक झोला लेकिन झोला ऐसा होना चाहिए जो खादी या टाट का हो और जिसे आसानी से कंधे पर लटकाया जा सके तथा भांडा फूटने पर उसे लटकाकर दूर तक भागा जा सके। याद रहे झोले के बाबत यह सावधानी रखना बहुत आवश्यक है कि वह चमड़े अथवा रेग्जीन का कतई न हो। लेदर का महंगा बैग लटकाकर आप बहुराष्ट्रीय कंपनी के एक्जीक्यूटिव नहीं हैं। लैदर का महंगा बैग नहीं होना चाहिए वरन आप झोला छाप पत्रकार हर्गिज नहीं बन सकते। क्योंकि लेदर के महंगे बैग की तनियाँ भी आसानी से टूटती नहीं हैं, भागते समय लेदर का बैग आपको धोखा दे सकता है यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि झोला खाली न हो, उसमें कुछ डायरी पैन वगैरा इत्यादि भी हो।
भले ही आप पढ़ना लिखना नहीं जानते हो लेकिन दिखावे के तौर पर क्या हर्ज है फिर भी प्रारंभिक तौर पर आप चाहे तो 7 या 8 डारियाँ 10 या 12 पैन भी आप रख सकते हैं। इससे आप हाई एजुकेटेड पढ़े-लिखे नजर आएंगे. लेकिन आज के सोशल मीडिया के इस जमाने में आमतौर पर एंड्राइड मोबाइल सभी के पास हैं, और मीडिया या पत्रकार की मदद के बिना ही आज के राजनेताओं या शासन-प्रशासन की खबरों और समाचारों का संचार उनके अपने स्तर से हो जाता है। मेरे हिसाब से एक -दो माइक वाली आईडी अपने साथ अवश्य रख लें, तो बेहतर होगा, शुरू में ज्यादा पैसे खर्च करना ठीक नहीं है। दुर्भाग्य से यदि आपकी झोलाछाप पत्रकारिता ठीक-ठाक नहीं चली तो व्यर्थ नुकसान उठाना पड़ सकता है। झोले में एक के बजाय दो दो माईक वाली आईडी भी रख लें। क्योंकि झोलाछाप पत्रकारिता के दौरान प्रायः ऐसे वास्तविक पत्रकारों एवं बड़े बड़े सरकारी विभागीय एवं पुलिस के बड़े और छोटे अफसरों से भी पाला पड़ सकता है जो आपके हाथों में एक-दो मीडिया माईक वाली आईडी देखकर आप पर शक कर सकते हैं। इसीलिए दो से तीन आईडी अपने झोले में साथ रखें, याद रहे सभी आपकी आईडी पर मीडिया या प्रेस लिखा होना आवश्यक है, अब आप पूरी तरह झोलाछाप पत्रकार बन चुके हैं । अब आप अपनी मोटरसाइकिल पर बैठकर माइक वाली आईडी अपने झोले में डालकर सीधे उस दिशा कि तरफ निकल जाइए जिधर अवैध कार्य या अवैध भवन निर्माण कार्य हो रहे हों। शहर से लेकर गाँव तक आप जिस दिशा में प्रस्थान करेंगे आपको अवैध निर्माण ही अवैध निर्माण दिखाई देंगे। संबंधित विभाग विकास प्राधिकरण की आप चिंता ना कीजिए किसी भी विभागीय कर्मचारी को आप पकड़ लीजिए और सेटिंग का पहला दांव फेंक दीजिए. लेकिन याद रहे वास्तविक पत्रकारों से दूरी बना कर रहिये. क्योंकि आप कम पढ़े लिखे हैं,या फिर पूरी तरह अनपढ़ झोलाछाप पत्रकार हैं और धड़ल्ले से आप मीडिया ऑफिस भी उन्हीं के गढ़ में खोलकर बैठे हुए हैं और आपके आसपास में जहां थाना वगैरह भी अनेक होंगे, तब आपको यह सतर्कता रखनी होगी कि सुबह-शाम थानेदार साहब से नमस्ते करते रहिये तथा गाहे-बगाहे थानेदार साहब का फोटो खींचकर उनके व्हाट्सएप सोशल मीडिया नंबर पर समाचार के रूप में उन्हें भेंट करते रहिये। ऐसा करने से एक ओर तो थानेदार साहब खुश रहेंगे, दूसरे यह कि आप को वास्तविक पत्रकार समझते रहेंगे,ओर वाद विवाद से लेकर छापे आदि के दौरान आपका फर्जी ऑफिस और आप स्वयं भी क्षतिग्रस्त होने से बचे रहेंगे।
महोदय ने ये तो बता दिया है यह लेख मजाकिया है साथ ही कहते हैं लेकिन वास्तव में हो यही रहा है। तो सवाल है अगर वास्तव में यही हो रहा है तो क्या पूरे जनपद मे पत्रकारों द्वारा बनाए गए संगठनों को अपनी ओर से कारवाई कर स्तिथि को काबु नहीं किया जाना चाहिए और सम्मानित पत्रकारिता को हर रोज़ कलंकित होने साथ ही जनता मे गिरते मीडिया के विश्वास को जिन्दा करने के प्रयास करने चाहिएं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे नगर में नशे का काला कारोबार हो रहा है मगर इस पर सन्नाटा है कि युवा पीढ़ी नशे की भेंट चढ़ रही है मग़र फ़िर भी सन्नाटा पसरा है कोई एक भी अपनी चुप्पी तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा रहा है शायद यही मीडिया का भी अमृतकाल हो सकता है। जारी...





.jpeg)