रक्षक या भक्षक,,, हम कुछ भी नहीं कह सकते...? (5)

 क्राइम को शिक्षण संस्थानों से जोड़ देना कितना मुनासिब है...? देवबंद मदरसा छात्र हत्या कांड


  • पुलिस जेजे एक्ट धारा 83 के अंतर्गत क्यूं नहीं हुई करवाई...? 
  • साथ मे पढ़ने वाले छात्र ने ही कुबूल लिया अपना गुनाह, मग़र नफ़रती चिंटूआओं ने अपराध को भी फतवों की नगरी से जोड़ दिया
  • गालियों व अपराध से घिरता बचपन,,बेहद कम उम्र मे नाबालिग चुन रहे अपराध की डगर.. आँख मूँदे पड़े हैं समाज के ठेकेदार

दीन रज़ा सिद्दिकी 


देवबंद-- ख़बर देवबंद से आई की मदरसे से लौट रहे 12 वर्षीय छात्र का शव सरसों के खेत से मिला जिस से पूरे जनपद का मीडिया या यूं कहें कि नफ़रती गैंग सक्रिय हो गए।

दिन भर जनपद की मासूम जनता के दिमाग़ मे नफ़रत का ज़हर घोलने का मोका मिल गया और लग गए चिंटू काम पर किसी ने मदरसों तो किसी ने फतवों से जोड़ कर ख़बर का प्रकाशन किया तो सोचना चाहिए कि फतवों को अपराध से जोड़ने का किया मतलब अपराध का कोई धर्म नहीं होता अपराध अपराध होता है।

घटना पर एसएसपी सहारनपुर सहित तमाम आला अधिकारी साँपला रोड स्थित ग्राम मे पहुँचे गाँव वालों के मुताबिक गाँव को छावनी बना दिया गया मगर पूरे घटनाक्रम में पुलिस जेजे एक्ट धारा 83 के अंतर्गत कारवाई की कोई बात सामने नहीं आई है। खबर किया है ये जान लेते हैं फिर इस पर भी चर्चा करेंगे कि घटना के बाद जनपद में किया चर्चा होनी चाहिए थी।

देवबंद कोतवाली क्षेत्र के गांव सांपला बक्काल निवासी मुफ्ती नसीस का 12 वर्षीय पुत्र गांव के ही एक मदरसे में पढ़ाई करता था। रोजाना की तरह सोमवार को भी छात्र घर से पढ़ने के लिए मदरसे गया था। लेकिन देर शाम तक भी वापस नहीं लौटा। चिंतित परिजन मदरसे पहुंचे तो पता चला कि वह तो छुट्टी के बाद वापस चला गया था। जिसके बाद परिजनों ने छात्र को इधर उधर ढूंडना शुरू किया लेकिन देर रात तक भी उसका कुछ पता नहीं लगा। सारी रात परिजन छात्र को तलाशते रहे। लेकिन मंगलवार की सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए छात्र का शव गांव के ही निकट सरसों के एक खेत में पड़ा होने खबर मिली। कोतवाल एचएन सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और छात्र का शव कब्जे में ले लिया। मासूम का गला किसी धारदार हथियार से रेता गया था। शक जाहिर किया जा रहा था कि छात्र की कुकर्म के बाद हत्या की गई है। घटना को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी डा. विपिन ताड़ा व एसपी देहात सूरज रॉय भी मौके पर पहुंचे थे।

एसएसपी के आदेश के बाद पुलिस ने मदरसे व आरपास लगे सीसीटीवी की फुटेज को खंगाला तो मृतक छात्र कुछ छात्रों के साथ जाता हुआ दिखाई पड़ा। इसी आधार पर पुलिस ने एक 15 वर्षीय मदरसा छात्र को हिरासत में लिया है। यह मृतक के ही मदरसे में पढ़ता है और उसके पड़ोस में ही रहता है। पूछताछ करने पर आरोपी छात्र ने गांव में खेत के पास कुकर्म करने के बाद 12 साल के छात्र की दरांती से हत्या करना स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने घटनास्थल से दरांती भी बरामद कर ली और कई अन्य से भी पूछताछ जारी है।

घटनाक्रम से जनपद मे चर्चा होनी चाहिए थी कि अखिर इतनी छोटी उम्र मे देश का भविष्य अपराध के रास्ते पर क्यूं चल रहा है बीते दिनों जनपद से छात्रों का हथियारों के प्रदर्शन का वीडियो वायरल हुआ था और सहारनपुर पुलिस ने गिरफ्तारीयां भी की थीं। मग़र उस समय फतवों और मदरसों जितना कवरेज सहारनपुर की मीडिया ने नहीं दिया था। मीडिया मे कहां खड़ा है अपना सहारनपुर ये आप सब बखूबी देख रहे हैं और झेल रहे रहे हैं यही कर भी सकते हैं। 

3 जुलाई देश की राजधानी दिल्ली से एक ख़बर आती है दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि एक औसत के मुताबिक हर साल 70 नए नाबालिग लड़के सिर्फ़ राजधानी में अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं। कानून में दी गई नरमी इसकी बढ़ी वजह है, इसलिए लड़के बेखौफ होकर इस दलदल में चले जाते हैं। आनंद पर्वत में बदले के लिए युवक की हत्या। जहांगीरपुरी में वर्चस्व कायम करने के लिए युवक की हत्या। जी हां, हम जिन हत्याओं की बात कर रहे हैं, इन सभी को 14 से 17 साल के बीच के नाबालिग लड़कों ने अंजाम दिया है। 

जिस उम्र में कंधे पर बस्ता और हाथों में कलम होना चाहिए, उसी उम्र में नाबालिग अपराध की दुनिया का रुख कर रहे हैं। इसके पीछे कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन पुलिस के लिए यह पूरे देश मे मुसीबत बनते जा रहे हैं। 

लेकिन समाज सुधार के लिए कितना प्रयास किया जा रहा है वो आप और हम बखूबी जानते हैं मगर किसी को भी इस बात से कोई फर्क़ नहीं पड़ता है कि हमने युवा पीढ़ी को केसा समाज दिया है। गालियों से गूँजता बचपन अब हर बच्चे का नसीब बन गया है आसपास के वातावरण से मोबाइल की दुनिया तक नाबालिग किया सीख रहे हैं सबके सामने है कोई जागरूक अभियान चलाया जाता है या नहीं आप अच्छे से जानते हैं। 

हाँ एक काम है जो बखूबी किया जाता है चुनाव पर मुशायरे, कव्वाली, और जहरीले भाषण शायद इस से ही समाज का सुधार हो सकता है

अपराध से घिरता बचपन समाज का वो श्राप है जिस से अनेकों घर तबाह हो जाएंगे इस पर कोई चर्चा नहीं है कि बेहद कम उम्र मे नाबालिग अपराध की दुनिया मे क़दम रख क्यूं रहे हैं।

अब शिक्षण संस्थानों से अपराध को जोड़ने वाले नफ़रती गैंग जो आप को सुबह नाश्ते मे और रात को डिनर पर नफरत का ज़हर देते हैं तो उनसे जानने का प्रयास करें कि देवबंद मे बाल अपराध बढ़ता क्यूं जा रहा है गाँव के मदरसे ही नहीं शहर के डिग्री कॉलिज के पीछे भी दो चार सीसीटीवी लगा लें शायद बाल या छात्र अपराध पर काबु पाया जा सके।... जारी






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