रक्षक या भक्षक,,, हम कुछ भी नहीं कह सकते...? (किस्त-6)

देवबंद नगर के बीचोबीच बिक रही शराब..हलवाईहट्टे पर हो रहा नशे का खेल..सूत्र

  • राशन डीलरों से उगाही, जुआरियों, सटोरियों, खाईबाडों, को संरक्षण तक..?
  • अधिकारियों के आसपास कोंवों की तरह क्यों मंडराते हैं सेटिंगबाज़ चिंटू..? 
  • तो क्या जल्द ही मनाया जाना चाहिए विश्व चाटुकारिता दिवस..?

दीन रज़ा सिद्दिकी 

सहारनपुर-- मानो पूरे जनपद सहारनपुर को सेटिंगबाज़ों और कथित पत्रकारों ने चारों ओर से जाकड़ लिया है। एसा कोई विभाग नहीं जहां पर पत्रकारों की उपस्थिति नहीं है लेकिन फिर भी जनपद मे कितने भ्रष्टाचार के खुलासे होते हैं ये आपको सोचना चाहिए फ़िर सोचना चाहिए कि मीडिया में कहां खड़ा है अपना सहारनपुर...? 

अगर जनपद सहारनपुर मे ही सेटिंगबाज़ों और कथित पत्रकारों का सर्वे करने पड़े तो बीबीसी की डाक्यूमेंट्री से ज्यादा समय लग जाएगा और फ़िर धमकीबाज़ गैंग ऊपर से दबाव बनाने लगेंगे। 

तथाकथित पत्रकारों के कारनामों से सम्मानित पत्रकारिता समय समय पर आहत होती रहती है फिर भी कोई इस के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पता। 

यही चलता रहा तो मुझे उम्मीद है कि जल्द ही हम विश्व चाटुकारिता दिवस भी मनाया करेंगे और चाटुकारिता करने वालों को अगल से सम्मानित पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया करेंगे एसा होने की संभावना बहुत जल्द सम्भव है। 

अब आपको बता देते हैं कि अधिकारियों के आसपास क्यों कोंवों की तरह मंडराते रहते हैं सेटिंगबाज़ पत्रकार किसी भी पत्रकार की घटना हो कथित पत्रकारों की गैंग पहुंच कर अधिकारीयों के इर्द-गिर्द मंडराते रहते हैं आजीब आजीब हुलिया बना कर अपनी छाप छोड़ने का प्रयास करते हैं अधिकारियों पर अहसान अलग से धरते हैं.. मैं.. फिल्ड का पत्रकार हूं। 

बाद मे यही चाटुकारिता करने वाले चिंटू अधिकारियों से मिल कर उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए विश्व का सबसे क़ाबिल अधिकारी घोषित करने का कांट्रेक्ट भी कर लेते हैं और करते भी हैं कर रहे हैं और करते रहेंगे। साथ मे चापलूसी मुफ़्त है जिसके लिए किसी प्रकार का कोई चार्ज नहीं लगता यदि आप ना जाते तो कभी मामला शांत ना होता यही सब कर ये तथाकथित पत्रकार जनता के बीच अपनी छाप छोड़ते हैं कि उनके अधिकारियों से परिवारिक संबंध हैं। अधिकारियों के साथ अपने फोटो दिखा कर समाज मे अपनी दबंगता वाली छाप छोड़ने का प्रयास करते हैं और यहीं से शुरू होता है दलाली का धंधा।

अवैध रूप से पैसे कमाने की होड़ मे लगे नफ़रती चिंटूओं ने जितना समाज का उस से कहीं अधिक पत्रकारिता का नुकसान किया है ये तथाकथित पत्रकार पैसा कमाने के लिए किसी भी हद तक गिर जाते हैं पत्रकारिता के सम्मान को भुला कर दलाली को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं। इस लिए इनके लिए सबसे बेहतर विकल्प है फ़ील्ड मे पत्रकारिता करना। 

बीते केई वर्षो मे पत्रकारिता के नाम पर दलाली, अवैध उगाही, संरक्षण, के जो मामले सामने आए हैं उनमे अधिकतर वो ही थे जो दिन रात चिल्ला चिल्ला कर कहते थे के फिल्ड का पत्रकार हूं.. पूरी रात काली होती है.... कोई खाने को नहीं देता.... वगैरा वगैरा.. दरअसल ये बात फ़ील्ड मे घूमने वाला कोई भी ईमानदार और असली पत्राकार कभी नहीं कहेगा। क्यूंकि उनको अपने कर्तव्य की गरिमा और सम्मान का ज्ञान है। 

हाल ही में सूत्रों से जानकारी मिली कि सरंक्षण के चलते देवबंद नगर के बीचोबीच अवैध रूप से शराब की बिक्री हो रही है देवबंद नगर के बहुत से पत्रकारों को इसका ज्ञान भी होगा मग़र मजाल है जो कोई भी नशे मे घिरते समाज को बचाने के लिए आगे आए।... जारी






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