व्यापारी को बंधक बनाने वाले गैंग के चंगुल से सहारनपुर पुलिस ने व्यापारी को छुड़ाया था..!
- वारदात में 2 तथाकथित पत्रकार भी शामिल थे,,तथाकथित पत्रकारों की गैंग अभी भी सक्रिय हैं क्या....?
- पूरे जनपद मे खाद्य पदार्थों मे केमिकल का ज़हर नकली खाद्य पदार्थ माफियाओं गुंडों जुआरियों सटोरियों को संरक्षण देने वाले रिश्तों को अखिर नाम किया दूं..?
दीन रज़ा सिद्दिकी
सहारनपुर-- पत्रकारों को लेकर पूरे जनपद मे फ़िर चर्चा होने लगी है वज़ह है बीते दिनों होने वाले घटनाक्रम जनपद सहारनपुर मे इस बहस ने जन्म लिया कर केसे 25 पैड़ काटने की परमीशन पर 114 पैड काट लिए गए हैं और पत्रकारों के संरक्षण की बात सामने आई।
ये मामाला ठंडा नहीं हुआ था कि नज़राना साबरी, मेहरबान, व अन्य का वीडियो वायरल हो गया तो बहस होना लाज़मी है कि पत्रकारिता करने वाले सभी लोग किया पत्रकारिता धर्म निभा रहे हैं अपने काम को पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं या नहीं आप और हम दोनों बहुत अच्छे से जानते हैं हो किया रहा है चल किया रहा है।
एसा बिल्कुल भी नहीं है कि सहारनपुर पुलिस ने अपनी और से पत्रकारिता को कलंकित करने वालों के खिलाफ समय समय पर कार्रवाई की है मग़र वो ना काफी थी ये दूसरी बात है।
करीब एक वर्ष पूर्व की घटना है कि सहारनपुर मे ही स्टोन क्रशर स्वामी को एक गैंग ने बंधक बना कर 25 लाख की फिरौती मांग ली घटना मे 2 तथाकथित पत्रकार भी संलिप्त थे।
उस समय एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि आनंद बाग कस्बा में आरोपी परवेज की दुकान है। आरोप है कि राजकुमार, परवेज आलम, रेहान, आर्यन, सूफियान ने स्टोन क्रशर स्वामी सुरेश कुमार को बंधक बनाकर बैठाया हुआ था। इसके बाद 25 लाख रुपए की फिरौती मांग रहे थे। आरोपियों के खिलाफ व्यापारी के भाई मेघराज ने थाने में तहरीर दी थी। राजकुमार और परवेज आलम कथित पत्रकार दोनों पूरे घटनाक्रम में संलिप्त पाए गए थे। पुलिस ने मौके से पर पहुंचकर व्यापारी को मुक्त कराया। मौके से 3 आरोपी राजकुमार, रिहान व परवेज आलम को गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि मौके से आर्यन और सूफियान भागने में कामयाब हो गए थे।
मगर किया बीते दिनों में पत्रकारों द्वारा बनाए गए संगठनों ने अपनी ओर से प्रयास कर एसे तथाकथित पत्रकारों के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लें जिस पत्रकारिता की गिरती गरिमा को बचाया जा सके और जनपद की मासूम जनता ठगी का शिकार ना हो।
हाल की स्तिथि मे जनपद सहारनपुर मे इस बिगड़ी व्यवस्था को काबू करने की आवश्यकता है है और जनता को उत्पीड़न होने से बचाना है क्यूं की इन तथाकथित पत्रकारों का आसान शिकार भोली जनता ही होती है। पत्रकारिता की आड़ में चल किया रहा है इस पर हम आगे भी चर्चा करते रहेंगे....


