समाज सुधार और दीनी तालीम को लेकर जमीयत उलेमा ज़िला सहारनपुर की अहम बैठक, पाँचों तहसीलों के ज़िम्मेदारों ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा
- नई पीढ़ी की दीनी तरबियत और समाज की इस्लाह पर ज़ोर, देवबंद में जमीयत उलेमा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न
- दीनी तालीमी बोर्ड की ज़रूरत और समाज सुधार पर हुआ गहन मंथन, मौलाना सैयद मुहम्मद मदनी ने दिया एकता और सेवा का संदेश
देवबंद । समाज सुधार, दीनी तालीम के विस्तार और नई पीढ़ी की बेहतर दीनी तरबियत के उद्देश्य से जमीयत उलेमा ज़िला सहारनपुर की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को देवबंद स्थित महमूद हॉल में आयोजित की गई। बैठक में ज़िला सहारनपुर की पाँचों तहसीलों से जमीयत उलेमा के ज़िम्मेदार पदाधिकारियों, सदस्यों और सामाजिक व दीनी कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर समाज के मौजूदा हालात और भविष्य की आवश्यकताओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया। बैठक की अध्यक्षता जनाब सैयद ज़हीन अहमद साहब ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में हज़रत मौलाना सैयद मुहम्मद मदनी साहब, नायब सदर जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन मौलाना मुहम्मद इब्राहीम क़ासमी, सेक्रेटरी जमीयत उलेमा ज़िला सहारनपुर ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जनाब क़ारी अय्यूब साहब, नायब सदर जमीयत उलेमा ज़िला सहारनपुर द्वारा पवित्र क़ुरआन की तिलावत से हुआ। इसके बाद हाफ़िज़ अब्दुल क़ादिर साहब ने बारगाह-ए-रिसालत में नात-ए-पाक का नज़राना पेश किया। आध्यात्मिक वातावरण के बीच बैठक के मुख्य विषयों पर चर्चा का सिलसिला शुरू हुआ। अपने प्रारंभिक संबोधन में मौलाना सरताज अहमद साहब, जनरल सेक्रेटरी जमीयत उलेमा ज़िला सहारनपुर ने बैठक के उद्देश्यों और प्रयोजनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में समाज सुधार, नैतिक मूल्यों की सुरक्षा और दीनी शिक्षा को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
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उन्होंने कहा कि समाज की बेहतरी केवल व्यक्तिगत स्तर के प्रयासों से संभव नहीं, बल्कि इसके लिए सामूहिक रूप से योजनाबद्ध और निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से नई पीढ़ी को सही दीनी, नैतिक और सामाजिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना आज की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है। इसके बाद मुफ़्ती मुहम्मद आरिफ़ साहब, सदर रामपुर ब्लॉक ने दीनी तालीमी बोर्ड के उद्देश्यों और उसकी आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने दीनी शिक्षा को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने, बच्चों और युवाओं तक सही दीनी तालीम पहुंचाने तथा समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने में ऐसे बोर्ड की संभावित भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि बदलते दौर में दीनी तालीम को मजबूत और व्यवस्थित बनाने के लिए सामूहिक प्रयास समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं जनाब मौलाना मुशर्रफ़ साहब, सदर इस्लाह-ए-मुआशरा कमेटी ज़िला सहारनपुर ने समाज सुधार की अहमियत पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने सामाजिक बुराइयों, नैतिक गिरावट और परिवार तथा समाज में बढ़ती विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए इस्लाह-ए-मुआशरा के काम को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक तरक्की उस समय संभव है जब उसके अंदर नैतिकता, आपसी सहयोग, भाईचारा और जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो।
मौलाना शमशीर अल-हुसैनी साहब, नायब सदर जमीयत उलेमा ज़िला सहारनपुर ने वर्तमान परिस्थितियों में जमीयत उलेमा की जिम्मेदारियों और विभिन्न क्षेत्रों में जारी दीनी, सामाजिक एवं सुधारात्मक सेवाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं को समझते हुए ज़मीनी स्तर पर काम करना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में जनाब सैयद ज़हीन अहमद साहब ने समाज की इस्लाह और विशेष रूप से नई पीढ़ी की दीनी तरबियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं की सही शिक्षा एवं तरबीयत समाज के भविष्य की बुनियाद है। इसलिए अभिभावकों, उलेमा और सामाजिक संगठनों को मिलकर इस दिशा में गंभीर और निरंतर प्रयास करने चाहिए। बैठक में असम में आई भीषण बाढ़ का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने बाढ़ से प्रभावित लोगों की कठिन परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग बेघर और परेशान हैं तथा उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है।
बैठक में उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे अपनी क्षमता के अनुसार बाढ़ पीड़ितों की मदद करें और उनके लिए राहत एवं सहयोग का माध्यम बनें। वक्ताओं ने कहा कि मुश्किल की घड़ी में जरूरतमंद इंसानों के साथ खड़ा होना सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी है। बैठक में क़ारी रईस अहमद साहब, मौलाना अल्ताफ़ रशीदी साहब नानौता तथा क़ारी शौक़ीन अहमद साहब, जनरल सेक्रेटरी तहसील रामपुर मनिहारान ने भी अपने विचार व्यक्त किए और समाज सुधार तथा दीनी तालीम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस अवसर पर मुफ़्ती मुदस्सिर साहब, बहट; मौलाना मुस्तक़ीम साहब; क़ारी दिलशाद अहमद साहब, सदर तहसील देवबंद; क़ारी कलीम साहब; क़ारी सिद्दीक़ अहमद साहब; क़ारी सैफ़ुल इस्लाम साहब; हाफ़िज़ उज़ैर साहब; क़ारी उल्फ़त साहब; मुफ़्ती शाकिर साहब; सदर शहर देवबंद चौधरी सादिक़ साहब सहित ज़िले की विभिन्न तहसीलों और ब्लॉकों से जुड़े अनेक ज़िम्मेदार पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
बैठक के मुख्य अतिथि हज़रत मौलाना सैयद मुहम्मद मदनी ने अपने संबोधन में जमीयत उलेमा के उद्देश्यों के अनुरूप ईमानदारी, एकता, आपसी सहयोग और निरंतर प्रयास के साथ दीनी एवं सामाजिक सेवाओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी उन्होंने उपस्थित ज़िम्मेदारों से कहा कि समाज के सुधार और लोगों की भलाई के लिए गंभीरता, निष्ठा और सामूहिक भावना के साथ काम किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि दीनी तालीम और समाज सुधार के कार्यों को मजबूत करने के लिए ज़मीनी स्तर पर निरंतर सक्रियता आवश्यक है।
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अंत में मौलाना मुहम्मद इब्राहीम क़ासमी, सेक्रेटरी जमीयत उलेमा ज़िला सहारनपुर ने सभी अतिथियों, ज़िम्मेदार पदाधिकारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। बैठक की व्यवस्थाओं को मौलाना महमूदुर्रहमान साहब, मौलाना बिलाल सैयद, मौलाना अब्दुस्समद अहमद ख़ान, हारून, त्यागी भाई अय्यूब तथा उनकी पूरी टीम ने अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से संभाला। मेहमानों की मेहमाननवाज़ी और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए सभी ज़िम्मेदारों ने टीम का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर देवबंद में आयोजित यह बैठक समाज सुधार, दीनी तालीम के विस्तार, नई पीढ़ी की बेहतर तरबियत और जरूरतमंदों की सहायता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक चिंतन और आगे की दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

