देवबंद विद्युत विभाग के 14 करोड़ के 'महाघोटाले' वाले फिडर का पर्दाफाश जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा, फीडर-5 पर 'अवैध वसूली गैंग' का भंडाफोड़
- चेकिंग के नाम पर गुंडागर्दी और अवैध वसूली सभासदों ने EXN को लिखी चिट्ठी, फीडर नंबर 5 की बिजली चोरी का सच आया सामने
- 8-10 साल से एक ही जगह जमे हैं भ्रष्टाचार के 'मगरमच्छ जनप्रतिनिधियों की लिखित शिकायत से खुली देवबंद बिजली विभाग की पोल, फीडर नंबर 5 के 14 करोड़ के घाटे के असली 'जिम्मेदार कौन?
देवबंद। देवबंद विद्युत विभाग के अधिकारी अपनी नाकामियों और 40 करोड़ के राजस्व घाटे का ठीकरा भले ही आम जनता के सिर फोड़ रहे हों, लेकिन इस महाभ्रष्टाचार की असली जड़ें खुद विभाग के अंदर ही पनप रही हैं। अब देवबंद के जनप्रतिनिधियों (सभासदों) ने भी विभाग की इस तानाशाही और वसूली के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में सामने आए एक शिकायती पत्र ने उस 'टाउन फीडर-5' का काला सच उजागर कर दिया है, जहाँ से हर साल सबसे ज्यादा 14.07 करोड़ रुपये की बिजली हवा में गायब हो रही है।
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नगर पालिका परिषद देवबंद के वार्ड नं 17 (पठानपुरा) के सभासद मौ. वाजिद मलिक के लेटरहेड पर विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता (EXN) को एक बेहद गंभीर शिकायती पत्र भेजा गया है। इस पत्र पर शहर के कई अन्य सभासदों (वार्ड 8 से मौ. ओसाफ सिद्दीकी, वार्ड 15 से अफशा लियाकत, वार्ड 18 से जावेद खान आदि) के भी हस्ताक्षर और मुहर मौजूद हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि विभाग के जेई (J.E) और कुछ लाइनमैन चेकिंग अभियान की आड़ में विभाग को बदनाम करने का काम कर रहे हैं।
पश्चिमांचल क्षेत्र में 14.07 करोड़ का सबसे बड़ा राजस्व नुकसान देने वाले 'फीडर नंबर 5' की इस डकैती के पीछे कौन है, इसका खुलासा इस पत्र में किया गया है सभासदों ने अपने पत्र में देवबंद के फीडर नंबर 5 पर तैनात लाइनमैन जुल्फुकार (पुत्र असगर) और हेल्पर कुरबान (पुत्र कदीर) पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ये दोनों कर्मचारी पिछले 8 से 10 सालों से इसी फीडर पर कुंडली मारकर बैठे हैं और बिजली चेकिंग के नाम पर लोगों को परेशान कर अवैध वसूली कर रहे हैं। पत्र में सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा यह किया गया है कि "बिजली की चोरी व 5 नंबर फीडर के लाइन लॉस होने में इन दोनों का सबसे बड़ा हाथ है।
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जनप्रतिनिधियों ने अपने पत्र में EXN को साफ बताया है कि इन दोनों कर्मचारियों (जुल्फुकार और कुरबान) के अंदर अब किसी भी अधिकारी का कोई डर नहीं बचा है और पूरे फीडर की जनता इनकी अवैध वसूली से बुरी तरह परेशान है। सभासदों ने EXN से गुजारिश की है कि लाइन लॉस कम करने और जनता को राहत देने के लिए इन दोनों को देवबंद शहर से हटाकर तत्काल प्रभाव से किसी गाँव में तैनात किया जाए और इनकी जगह किसी और को लगाया जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब शहर के चुने हुए जनप्रतिनिधि खुद लिखित में नामजद शिकायत देकर बता रहे हैं कि 14 करोड़ की बिजली चोरी और अवैध वसूली के पीछे किन कर्मचारियों का हाथ है, तो EXN और SDO इन पर मेहरबान क्यों हैं? क्या 8-10 सालों से एक ही जगह जमे इन कर्मचारियों के 'वसूली कलेक्शन' का हिस्सा ऊपर तक पहुँचता है? विभाग को अब जनता और जनप्रतिनिधियों के इन तीखे सवालों का जवाब देना ही होगा।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

