नौकरी का झांसा, कमरे में बुलाने और ब्लैकमेलिंग के आरोपों में आरोपी गिरफ्तार, गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
- देवबंद में दुष्कर्म के आरोपी की गिरफ्तारी, पुलिस प्रेस नोट में सामने आया 2015 से दर्ज मुकदमों का लंबा इतिहास
- नौकरी का लालच देकर शोषण के आरोप में गिरफ्तार, पुलिस रिकॉर्ड में पहले से पुराने मुकदमों का जिक्र क्यों महत्वपूर्ण ?
देवबंद। थाना देवबंद पुलिस ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक महिला को अपने संपर्क में लाने, कमरे में रखने, उसके सामान को कब्जे में लेने, कथित रूप से दुष्कर्म करने तथा वीडियो के जरिए दबाव बनाने के आरोपों से जुड़े मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुधीर भारद्वाज पुत्र रणजीत, निवासी मौहल्ला देवी कुण्ड, थाना देवबंद, जनपद सहारनपुर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई 20 अगस्त 2026 को की गई। प्रेस नोट में बताया गया है कि वादिया की तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक आरोपी पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिला को देवबंद की मिश्रा कॉलोनी में कमरा दिलाने, कमरे में रखे बर्तन, सिलेंडर, पाइप व स्कूटी आदि को कब्जे में लेने तथा महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप हैं।
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पुलिस प्रेस नोट के अनुसार आरोप यह भी है कि आरोपी ने कथित रूप से महिला की वीडियो बनाई और उसे वायरल करने की धमकी देकर दबाव बनाया। शिकायत में यह भी आरोप है कि नौकरी लगवाने के नाम पर महिला को अन्य लोगों के संपर्क में ले जाया गया और होटल आदि स्थानों पर भी ले जाने की बात कही गई। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विवेचना के बाद ही होगी। पुलिस के प्रेस नोट के मुताबिक मामले में मु0अ0सं0 605/2026 के तहत BNS की धारा 316(2), 64(2)(m), 70(1), 352 और 143(2) के साथ SC/ST Act की धारा 3(2)(v) तथा अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 (PITA) की धारा 5 में मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रेस नोट के अनुसार विवेचना के दौरान BNS की धारा 333 और 64(1) की बढ़ोतरी भी की गई। पुलिस का कहना है कि आरोपी के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
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पुलिस के मुताबिक वांछित आरोपी को कस्बा बाजार से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहारनपुर के निर्देश तथा क्षेत्राधिकारी देवबंद और प्रभारी निरीक्षक कपिल देव के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम द्वारा की गई। गिरफ्तारी टीम में उपनिरीक्षक रोबिल्स कुमार, कांस्टेबल दीपक कुमार और कांस्टेबल अभिषेक कुमार शामिल बताए गए हैं।
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास भी है। पुलिस के प्रेस नोट में आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज छह मुकदमों का उल्लेख किया गया है। इनमें वर्ष 2015 से लेकर 2026 तक के मामले शामिल हैं। 1. मुकदमा अपराध संख्या 188/2015 — थाना नांगल, सहारनपुर पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस मुकदमे में धारा 323, 354(ख), 452 IPC तथा SC/ST Act की धारा 3(1)(10) का उल्लेख है। 2. मुकदमा अपराध संख्या 501/2016 — थाना देवबंद, सहारनपुर इस मामले में धारा 153ए, 295, 298, 500 और 501 IPC दर्ज होने का उल्लेख पुलिस प्रेस नोट में किया गया है। 3. मुकदमा अपराध संख्या 365/2017 — थाना देवबंद, सहारनपुर पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस मुकदमे में धारा 147, 149, 332, 352, 353, 427, 504 और 506 IPC का उल्लेख है। 4. मुकदमा अपराध संख्या 476/2024 — थाना देवबंद, सहारनपुर इस मुकदमे में धारा 147, 148, 323, 427, 452, 504 और 506 IPC दर्ज होने की जानकारी प्रेस नोट में दी गई है। 5. मुकदमा अपराध संख्या 370/2025 — थाना देवबंद, सहारनपुर पुलिस के अनुसार इस मामले में धारा 147, 148, 323, 392, 504 और 506 IPC के साथ SC/ST Act की धारा 3(1)(घ)(द) का उल्लेख है। 6. मुकदमा अपराध संख्या 170/2026 — थाना देवबंद, सहारनपुर इस मामले में BNS की धारा 308(2), 356(2), 352 और 351(3) दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने अपने प्रेस नोट में दी है।
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पुलिस प्रेस नोट में पुराने मुकदमों का उल्लेख आरोपी के आपराधिक इतिहास के रूप में किया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने आप में उन मामलों में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। पुराने मामलों में अदालत का अंतिम निर्णय क्या रहा, यह अलग न्यायिक रिकॉर्ड का विषय है। इसी तरह वर्तमान मामले में भी पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप और धाराएँ अभी अभियोजन का पक्ष हैं। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध या असिद्ध होंगे और आरोपी को कानून के तहत अपना बचाव करने का पूरा अधिकार है।
पुलिस ने प्रेस नोट में कहा है कि गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ अन्य आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी करते हुए उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। अब मामले की आगे की दिशा न्यायालय में होने वाली कार्यवाही, विवेचना तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

