सहारनपुर से लखनऊ तक मची खलबली 8 सर्वे, हजारों की भीड़ और अब सीएम योगी से राघव लखनपाल की भेंट
- शिष्टाचार' के बहाने विरोधियों के 'इलाज' की तैयारी सीएम योगी और राघव लखनपाल की मुलाकात ने उड़ाई कई रसूखदारों की नींद
- क्या सहारनपुर में होने वाला है कुछ बड़ा? क्षेत्रीय अध्यक्ष की हुंकार के बाद सीएम के दरबार पहुंचे राघव लखनपाल, सुलग उठी जिले की सियासत
सहारनपुर। राजनीति में कोई भी मुलाकात महज इत्तेफाक नहीं होती, और जब बात चुनाव की सरगर्मियों के बीच हो, तो हर 'शिष्टाचार भेंट' के पीछे एक गहरी सियासी पटकथा लिखी जा रही होती है। सहारनपुर की राजनीति में इन दिनों कुछ ऐसा ही भूचाल आया हुआ है। पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया मुलाकात ने सहारनपुर से लेकर लखनऊ तक के सियासी पारे को गरमा दिया है।
इस घटनाक्रम को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। भारतीय जनता पार्टी द्वारा कराए गए 8 आंतरिक सर्वे, उसके बाद क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर का पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा के आवास पर एक निजी कार्यक्रम में पहुंचना, और वहां हजारों की संख्या में उमड़ी समर्थकों की भीड़—ये सभी घटनाएं किसी बड़े तूफान के आने से पहले की आहट थीं। और अब, इस पूरी पटकथा का क्लाइमेक्स मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से राघव लखनपाल की लखनऊ में हुई इस अहम मुलाकात के रूप में सामने आया है।
कहने को तो यह एक शिष्टाचार भेंट थी, लेकिन सियासी गलियारों में इसके मायने बहुत गहरे निकाले जा रहे हैं। इस मुलाकात की गर्मजोशी को साफ देखा जा सकता है, जहां मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक हैंडल से इस भेंट की जानकारी साझा की गई है। इस मुलाकात की सबसे दिलचस्प बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह पोस्ट रहा, जिसने सबको चौंका दिया। सीएम के आधिकारिक हैंडल पर पूर्व सांसद को "डॉ. राघव लखन पाल शर्मा" लिखकर संबोधित किया गया। राजनीति के जानकार इसके भी अपने मायने निकाल रहे हैं। दबी जुबान में चर्चा है कि क्या 'डॉक्टर' का मतलब किसी राजनीतिक 'इलाज' से है?
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यह एक ऐसा इशारा है जिसने सहारनपुर के कुछ अति-आत्मविश्वासी नेताओं की पेशानी पर पसीने ला दिए हैं। सियासी हलकों में सबसे ज्यादा बेचैनी जिले के उस रसूखदार 'माननीय' के खेमे में बताई जा रही है, जो सहारनपुर की उस धरती से नुमाइंदगी करते हैं जिसकी पहचान पूरी दुनिया में एक बहुत बड़े शिक्षा के केंद्र के तौर पर है। सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक बड़े ओहदे का सुख भोग रहे इन 'माननीय' के रवैये और उनके अति-अहंकार के चलते नगर संगठन और कार्यकर्ताओं में भारी उदासीनता पनप रही थी।
ऐसे में अपनी निष्पक्षता, बेदाग छवि और ईमानदारी के लिए पहचाने जाने वाले राघव लखनपाल शर्मा का लखनऊ दरबार पहुंचना मानो उस दबी हुई राजनीति में चिंगारी लगाकर एक ज्वालामुखी के विस्फोट का काम कर गया है। अब उन कुछ खास चेहरों के अहंकार का अस्तित्व ही दांव पर लग गया है। विरोधी खेमे में जबरदस्त खलबली है और हर कोई केवल यही जानने का प्रयास कर रहा है कि आखिर अचानक यह परिवर्तन हुआ क्यों और कैसे? कुल मिलाकर, अब यह सियासी घमासान एक चुनावी रणभेरी में तब्दील हो गया है। सूत्र बता रहे हैं कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ ऐसा पक रहा है, जिसका सीधा असर जिले की आगे की राजनीति पर पड़ेगा। हालांकि, अभी सियासत के कई पत्तों का खुलना बाकी है। देखते हैं आगे क्या होगा?
रिपोर्ट - दीन रज़ा

