देवबंद क्षेत्र में बारिश बनी आफत भरभराकर गिरा विधवा का मकान, बाल-बाल बचा पूरा परिवार
- कुछ मिनट पहले ही घर से निकला परिवार, फिर ढह गया आशियाना; बेघर हुई विधवा ने लगाई मदद की गुहार
- मेहनत-मजदूरी से बच्चों का पालन करने वाली मां पर टूटा बारिश का कहर, मकान गिरने से परिवार हुआ बेघर
देवबंद। लगातार हो रही बारिश ने जहां मौसम को सुहाना बनाया है, वहीं कई गरीब और कमजोर परिवारों के लिए यही बारिश मुसीबत बनकर सामने आ रही है। देवबंद क्षेत्र के जहीरपुर गांव में भारी बारिश के चलते एक विधवा महिला का मकान अचानक भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि हादसे से कुछ देर पहले ही परिवार को खतरे का अंदेशा हो गया और सभी लोग घर से बाहर निकल आए। इसके चलते एक बड़ा हादसा टल गया। बताया गया है कि गांव निवासी रेशमा, अपने तीन बच्चों और बुजुर्ग ससुर खुर्शीद के साथ इसी मकान में रहती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है और रेशमा मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों तथा बुजुर्ग ससुर के भरण-पोषण की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
प्रशासनिक चौखट पर पहुंचा ठग ऑफ़ देवबंद का चंदा सिंडिकेट SDM और CO से FIR व गिरफ्तारी की मांग
गुरुवार देर शाम लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मकान की हालत अचानक बिगड़ने लगी। परिवार को मकान के कमजोर होने का आभास हुआ तो सभी सदस्य तत्काल घर से बाहर निकल आए परिवार के बाहर निकलने के कुछ ही समय बाद मकान अचानक भरभराकर गिर गया। देखते ही देखते जिस छत के नीचे परिवार अपना जीवन गुजार रहा था, वह मलबे में तब्दील हो गई परिजनों के अनुसार, अगर परिवार समय रहते घर से बाहर नहीं निकलता तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।
मकान गिरने के समय रेशमा, उनके तीनों बच्चे और बुजुर्ग ससुर घर के अंदर मौजूद थे, लेकिन खतरे का अंदाजा होने पर सभी बाहर निकल आए। इस वजह से किसी के घायल होने की सूचना नहीं है हादसे के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या रहने की हो गई है। जिस मकान में परिवार अपना जीवन गुजार रहा था, उसके गिर जाने से अब सिर छिपाने तक की परेशानी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, रेशमा विधवा हैं और मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चों की परवरिश करती हैं। सीमित आमदनी में बच्चों और बुजुर्ग ससुर की जिम्मेदारी उठाना पहले से ही उनके लिए चुनौती है। ऐसे में मकान गिर जाने से परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता तथा रहने के लिए आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में कमजोर मकानों को लेकर प्रशासन को विशेष रूप से गरीब परिवारों की स्थिति का जायजा लेना चाहिए। उनका कहना है कि रेशमा के परिवार के पास अब सुरक्षित आश्रय का संकट है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि विधवा महिला अपने बच्चों और बुजुर्ग ससुर के साथ दोबारा सुरक्षित छत के नीचे रह सके। गनीमत रही कि मकान गिरने से पहले परिवार बाहर निकल आया। वरना बारिश के बीच हुआ यह हादसा बड़ी जनहानि में बदल सकता था।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

