देवबंद से देहरादून तक फैला नशे का जाल? पुलिस कार्रवाई ने बढ़ाई चिंता, ऑपरेशन सवेरा’ पर उठे सवाल

देवबंद से देहरादून तक फैला नशे का जाल? 511 ग्राम चरस के साथ आरोपी रिहान गिरफ्तार 

  • देवबंद के युवाओं को निगल रहा सूखे नशे का काला कारोबार, सूखे नशे के काले कारोबार की झलकियां अब पुलिस की चेकिंग में सामने आने लगी हैं 
  • सहारनपुर में कार्रवाई के बावजूद देवबंद तक कैसे पहुंच रहे नशे के सौदागर? ऑपरेशन सवेरा’ पर उठे सवाल

देवबंद। देवबंद से देहरादून तक फैले सूखे नशे के कथित काले कारोबार की परतें अब पुलिस की कार्रवाई और चेकिंग के दौरान सामने आने लगी हैं। देहरादून में पुलिस द्वारा 511 ग्राम चरस के साथ एक युवक की गिरफ्तारी और उसका संबंध देवबंद से बताया जाना क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। बीते काफी समय से सहारनपुर जनपद में भी नशे के खिलाफ पुलिस की कई बड़ी कार्रवाईयां सामने आती रही हैं। नशा तस्करों की गिरफ्तारी और प्रतिबंधित पदार्थों की बरामदगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब सहारनपुर के देवबंद का नाम भी इन घटनाओं से जुड़ने लगा है।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह सहारनपुर के देवबंद से चरस लेकर देहरादून पहुंचा था और इसे स्थानीय लोगों को बेचने की फिराक में था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान रिहान (30) निवासी पटानपुरा, खंड-4, देवबंद, सहारनपुर के रूप में हुई है। पुलिस जांच में आरोपी का पूर्व आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ वर्ष 2024 में दिल्ली क्राइम ब्रांच के एनडीपीएस एक्ट के मामले में जेल जाने की जानकारी मिली है।

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स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चिंता जताई जाती रही है कि नशे के सौदागर युवाओं को अपना निशाना बना रहे हैं और धीरे-धीरे युवाओं का जीवन बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है। सूखे नशे और अन्य नशीले पदार्थों का कारोबार आखिर किन रास्तों से चल रहा है और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं, यह सवाल लगातार गंभीर होता जा रहा है। देहरादून पुलिस की कार्रवाई में देवबंद निवासी युवक का पकड़ा जाना इस बात की ओर भी इशारा करता है कि नशे के कारोबार के तार एक जिले या एक शहर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके नेटवर्क दूसरे राज्यों और शहरों तक फैले हो सकते हैं। ऐसे में इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि देवबंद में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सवेरा’ जैसे अभियानों का जमीनी असर आखिर क्यों स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है? यदि अभियान लगातार चल रहे हैं, तो फिर नशे के सौदागर युवाओं तक कैसे पहुंच रहे हैं और देवबंद का नाम दूसरे शहरों में पकड़े जा रहे मामलों से क्यों जुड़ने लगा है देवबंद के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क तक पहुंचकर उसे जड़ से खत्म करने की जरूरत है। पुलिस, प्रशासन और समाज को मिलकर इस बढ़ती समस्या के खिलाफ गंभीर और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि देवबंद का नाम किसी भी तरह के नशे के कारोबार से जुड़ने के बजाय शिक्षा, संस्कृति और अपनी पहचान के लिए जाना जाए।

रिपोर्ट - दीन रज़ा 

Deen Raza

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