देवबंद समाधान दिवस में 68 फरियादी पहुंचे, लेकिन सिर्फ 5 शिकायतों का निस्तारण
- एक छत के नीचे बैठे सभी विभागों के अधिकारी, फिर भी 92% शिकायतकर्ता लौटे निराश
- लाखों के प्रशासनिक इंतजाम पर सवाल क्या समाधान दिवस बनकर रह गया सिर्फ औपचारिकता?
देवबंद। आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को देवबंद के स्टेट हाईवे स्थित ब्लॉक सभागार में "संपूर्ण समाधान दिवस" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सलील कुमार ने की, जबकि तहसील और ब्लॉक स्तर के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। लेकिन दिनभर चली इस कार्यवाही के बाद सामने आए आंकड़ों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
समाधान दिवस में अपनी समस्याओं के निस्तारण की उम्मीद लेकर क्षेत्र के विभिन्न गांवों और कस्बों से कुल 68 फरियादी पहुंचे। लोगों ने राजस्व, नलकूप, पूर्ति विभाग, पुलिस, चकबंदी, बिजली निगम और विकास विभागों से जुड़ी शिकायतें अधिकारियों के समक्ष रखीं। फरियादियों को उम्मीद थी कि एक ही स्थान पर सभी जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान होगा।
पूनम मित्तल हत्याकांड का खुलासा! पुलिस मुठभेड़ के बाद दो आरोपी गिरफ्तार, एक के पैर में लगी गोली
हालांकि दिन समाप्त होने तक सिर्फ 5 शिकायतों का ही मौके पर निस्तारण हो सका। यानी कुल प्राप्त शिकायतों में से मात्र 7.35 प्रतिशत मामलों का ही समाधान हो पाया, जबकि 63 शिकायतें लंबित रह गईं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 92 प्रतिशत से अधिक फरियादी अपनी समस्याओं के समाधान के बजाय केवल आश्वासन लेकर घर लौटे।
यही कारण है कि अब समाधान दिवस की प्रभावशीलता को लेकर जनता के बीच चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का सवाल है कि जब एक ही छत के नीचे सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे, तब भी अधिकांश शिकायतों का समाधान मौके पर क्यों नहीं हो सका? समाधान दिवस जैसे आयोजनों में प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की जाती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी, कर्मचारियों की तैनाती, बैठक व्यवस्था और अन्य सरकारी संसाधनों पर अच्छा-खासा खर्च होता है। लेकिन जब इतने बड़े आयोजन का परिणाम मात्र 7.35 प्रतिशत समाधान के रूप में सामने आता है, तो इसकी उपयोगिता और प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सलील कुमार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर एसडीएम विजय प्रकाश सिंह, तहसीलदार पुष्पांकर देव, नायब तहसीलदार मोनिका चौहान, बीडीओ देवबंद अमित नारंग, बीडीओ नागल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
टैक्स हमारा, ऐश तुम्हारी? देवबंद नगर पालिका के 46 करोड़ 58 लाख के विकास का पोस्टमार्टम
समाधान दिवस की मूल भावना यह है कि आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का निस्तारण एक ही मंच पर हो सके। लेकिन देवबंद में सामने आए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि अभी इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। जब तक ऐसे आयोजनों में शिकायतों के तत्काल निस्तारण का प्रतिशत नहीं बढ़ेगा, तब तक जनता के बीच इसकी सार्थकता को लेकर सवाल उठते रहेंगे। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लंबित 63 शिकायतों का समाधान कितनी पारदर्शिता और कितनी तेजी से किया जाता है।
रिपोर्ट: दीन रज़ा

