नारियल और फीते में सिमटा विकास, प्यासी जनता, मच्छरों का आतंक और 'अंधेरा कायम रहे' का राज
- बूंद -बूंद पानी और फॉगिंग को तरस रही जनता, पोल ने खोली पोल 88% जनता बोली सालों से वार्ड में नहीं हुआ कीटनाशक का छिड़काव या फॉगिंग
- पानी की किल्लत और गायब सोलर लाइटों ने खोली कथित विकास पुरुष की पोल!
देवबंद। बुधवार को देवबंद नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 में जो कुछ भी हुआ यदि उसको ही विकास कहते हैं तो एसा विकास तो पूर्व नगर पालिका चैयरमेनों के कार्यकाल में इस से अच्छा विकास होता था पालिकाध्यक्ष विपिन कुमार गर्ग ने आनन फानन में फीता काटकर जिन दो सड़कों का उद्घाटन किया है वह दरअसल अपनी नाकामियों को छिपाने का एक घटिया पब्लिसिटी स्टंट है देवबंद का तथाकथित विकास अब सिर्फ नारियल फोड़ने और फीता काटने के ड्रामे तक ही सिमट कर रह गया है चंद चमचों और दरबारी सभासदों को इकट्ठा कर फूल-मालाएं पहनने और मिठाई खाने का जो ढोंग रचा जा रहा है वो पहले भी रचा जाता था तो जाहिर है वार्ड की उस आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान जाएगा ही जो इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है और मच्छरों के आतंक से रात भर सो नहीं पा रही है खुद को भाग्यशाली बताने वाले सभासद इकबाल अंसारी चाहे पालिकाध्यक्ष के कसीदे पढ़ते-पढ़ते थक जाएं, लेकिन देवबंद की बदहाल जनता इनका असली चेहरा पहचान चुकी है।
गत दिनों दारुल उलूम देवबंद को बम बाँधकर उडाने की धमकी देने वाले वीरेंद्र गुर्जर से मिलिए
गर्मी और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच 14 मई से 18 मई तक हमारे द्वारा डिजीटल माध्यमों से देवबंद की जनता से सीधा सवाल किया गया था कि आपके वार्ड में आखिरी बार फॉगिंग/कीटनाशक छिड़काव कब हुआ था?', तो जनता ने वोट की चोट से जो आंकड़े सामने रखे हैं, वो पालिकाध्यक्ष को आईना दिखाने के लिए काफी है कभी होते हुए नहीं देखा 50% का कहना है कि उन्होंने अपने वार्ड में कभी फॉगिंग होते हुए देखी ही नहीं है 38% ने कहा कि एक साल से ऊपर बीत चुका है नगरपालिका की फॉगिंग गाड़ी का दर्शन तक नहीं हुआ 6% लोगों ने माना कि बहुत समय पहले कभी औपचारिकता हुई थी और हाल ही में (पिछले कुछ दिनों में) केवल 6% वोट पड़े जो शायद पालिका के अपने चहेते या करीबी लोग रहे होंगे देवबंद की 88% जनता (50% + 38%) गवाही दे रही है कि नगरपालिका ने उन्हें मच्छरों और बीमारियों के भरोसे भगवान आसरे छोड़ दिया है फिर पालिकाध्यक्ष किस बात का रिकॉर्ड तोड़ विकास का ढोल पीट रहे हैं?
एक तरफ नगरपालिका अध्यक्ष विकास पुरुष होने का ढोंग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ नगर की आधी से ज्यादा आबादी गंभीर जल आपूर्ति संकट से जूझ रही है नगर में जगह-जगह लगे वाटर कूलर खराब पड़े हैं राहगीर और स्थानीय लोग इन्हें ठीक कराने की मांग करते-करते थक चुके हैं लेकिन पालिका के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है भीषण गर्मी में लोगों के घरों के नल सूखे पड़े हैं पानी की किल्लत से बेहाल जनता जब पानी मांगती है तो पालिकाध्यक्ष उन्हें फीता काटने का नाटक दिखाकर विकास के नाम पर सरेआम चूना लगा रहे हैं हाल ही में हुई रिकॉर्ड तोड़ बिजली कटौती ने नगरपालिका के बीते तीन सालों के कागज़ी विकास की पूरी हवा निकाल कर रख दी है बिजली विभाग के हाथ खड़े करते ही देवबंद नगरपालिका पूरी तरह घुटनों पर आ जाती है।
पालिकाध्यक्ष या उनके कोई भी करीबी सभासद आज छाती ठोक कर जनता को यह बताने की हिम्मत नहीं कर सकते कि पिछले तीन सालों में नगर के मुख्य मार्गों पर कितनी सोलर लाइटें लगाई गईं और कितनी रातों-रात उतार ली गईं या गायब करा दी गईं? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आज हालात इतने बदतर हैं कि यदि बिजली विभाग कुछ घंटों के लिए सप्लाई बंद कर दे तो पूरे देवबंद नगर में तमराज किल्वषका राज हो जाता है मुख्य मार्गों पर इस कदर सन्नाटा और अंधेरा पसर जाता है कि मानो देवबंद की सड़कें चीख-चीख कर कह रही हों अंधेरा कायम रहे!
उद्घाटन के इस ड्रामे में सभासदों और नेताओं की भारी मौजूदगी यह साफ बताती है कि यह जनता का नहीं बल्कि नेताओं का अपना निजी जलसा था भीड़ में वो आम नागरिक कहीं नहीं था जो पानी की किल्लत झेल रहा है और रात भर मच्छर काटने से जागने को मजबूर है मगर ये जो पब्लिक है सब जानती है अंदर क्य़ा है बाहर क्य़ा है सब पहचानती है पालिकाध्यक्ष और उनके माननीय सभासदों! मिठाई खाकर और जिंदाबाद के खोखले नारे लगवाकर आप अपनी पीठ भले थपथपा लें, लेकिन देवबंद की जनता अब आपके इस छलावे को समझ चुकी है जब तक घरों में पानी नहीं आता मच्छर मारने वाली फॉगिंग नहीं होती और सड़कें सोलर लाइट से रोशन नहीं होतीं तब तक आपका यह फीता-काटू विकास सिर्फ एक धोखा है जनता जाग चुकी है और पोल के इन आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि जनता अब हिसाब पूरा लेकर रहेगी।
रिपोर्ट - दीन रज़ा



