देवबंद थाना क्षेत्र की चोकीयों मे सूखे नशे के सौदागरों को करोड़पती बनाने की होड़
- क्य़ा ऑपरेशन सवेरा के अंतर्गत देवबंद क्षेत्र मे उगाई जा रही अफीम की खेती पर होगी कार्रवाई ?
- 2024 मे अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद निगरानी करने वाले ड्रोन केमरे और मुखबिर कहां गए
- देवबंद नगर की हर गली मुहल्ले मे सूखे नशे की भरमार, क्य़ा कभी हो पाएगा नशा मुक्त देवबंद
देवबंद। क्षेत्र में स्मैक, अफीम और प्रतिबंधित फार्मा ड्रग्स (नशीली दवाएं) जैसे सूखे नशे के खिलाफ स्थानीय पुलिस 'ऑपरेशन सवेरा' के तहत कोई ठोस कदम उठाती नहीं दिख रही है। जिस 'ऑपरेशन सवेरा' का मुख्य उद्देश्य समाज को नशे के अंधेरे से बाहर निकालना है, वह देवबंद में केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। यहाँ नशे के सौदागर युवाओं को दलदल में झोंककर अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं।
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दिखावे की कार्रवाई और जमीनी हकीकत
हाल ही में (18 अप्रैल 2026) देवबंद पुलिस ने एक नशा तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से 13.25 ग्राम अवैध स्मैक बरामद की। हालांकि, जब पूरे सहारनपुर जनपद की बात की जाती है, तो आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ समय में जिले में 13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं और 100 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं। लेकिन इन आंकड़ों में देवबंद थाना क्षेत्र की हिस्सेदारी कितनी है, यह किसी से छिपा नहीं है।
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मोहल्लों में फैला नशे का जाल
देवबंद नगर का शायद ही कोई कोना ऐसा बचा हो जहाँ नशे की तस्करी न हो रही हो। मोहल्ला पठानपुरा, बैरियान, भायला रोड, रेलवे रोड, कोला बस्ती, शेखुल हिंद कॉलोनी और मोहल्ला किला सहित लगभग हर चौकी क्षेत्र में सूखे नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। रिहायशी इलाकों में स्मैक की छोटी-छोटी पुड़िया बेचने का चलन चरम पर है, जो भविष्य की पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है।
2024 की कार्रवाई के बाद फिर सुगबुगाहट
मार्च 2024 (होली के आसपास) का वह मामला सभी को याद होगा, जब भायला रोड स्थित एक खेत में गेहूं की फसल के बीच अवैध रूप से उगाई गई अफीम पकड़ी गई थी। उस समय पुलिस ने 2600 से अधिक अफीम के पौधे बरामद कर 7 लोगों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 18/20 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
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प्रशासनिक तंत्र पर सवाल
आज 2026 में लेखपालों, ग्राम प्रहरियों और पुलिस मुखबिरों की कथित निष्क्रियता के कारण एक बार फिर अफीम की खेती की चर्चाएं आम हैं। सूत्रों का दावा है कि सरसों और अनाज के खेतों के बीच में चालाकी से अफीम उगाई जा रही है, जो दूर से देखने पर सामान्य फसल ही लगती है।
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बड़ा सवाल: 2024 की घटना के बाद निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन कैमरे और पुलिस का मुखबिर तंत्र आखिर कहाँ गायब हो गया? क्या यह प्रशासन की विफलता है या फिर व्यवस्था की मिलीभगत? जैसा कि कहा जाता है— "हमाम में सब..."


