देवबंद गरीबों के राशन पर राशन डीलर का डाका, विरोध करने पर महिला को धमकी
- पूर्व मे भी होती रही राशन डीलर की शिकायत, मग़र नहीं होती कोई कारवाई
- पीड़ित महिला ने सहारनपुर ज़िला पूर्तिधिकारी को लिखा प्रार्थना पत्र, डीलर नहीं देता पूरा राशन
- पूर्व मे भी होती रही राशन डीलर की शिकायत, मग़र नहीं होती कोई कारवाई
- पीड़ित महिला ने सहारनपुर ज़िला पूर्तिधिकारी को लिखा प्रार्थना पत्र, डीलर नहीं देता पूरा राशन
दीन रज़ा सिद्दिकी
देवबंद-- ग़रीब जनता के लिए केन्द्र सरकार द्वारा राशन डिपो के माध्यम से चलाई जा रही योजनाओं के अंतर्गत पात्र राशनकार्ड धारकों को प्रति यूनिट 5 किलो राशन दिया जाता है।
कोरोना काल के दौरान सरकार ने ग़रीब जनता को राहत देने के उदेश्य से कार्ड धारकों को माह मे दो धारकों को राशन दिए जाने का प्रावधान किया था। इसी बीच सरकारी गल्ले की दुकान से रिफाइंड, नमक, चना, भी मुफ़्त दिया गया था।
एक और जहां सरकार देश की ग़रीब जनता के लिए लाभकारी तथा राहत देने वाली योजनाओं पर गंभीरता के साथ काम कर रही है तो वहीँ राशन डीलर अपनी मनमानी कर सरकारी योजनाओं को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं।
जनपद सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के ग्राम अम्बैहटा शेखा की पीड़ित महिला शाइस्ता ने ज़िला पूर्तिधिकारी को लिखित शिकायत की है राशन डीलर पूरे यूनिट का राशन नहीं देता है विरोध करने पर धमकियां भी देता है। डीलर कार्ड धारक महिलाओं के साथ राशन वितरण के समय अभद्र व्यवहार करता है साथ ही राशन वितरण में घटतौली भी करता है पीड़ित महिला बताती है उसके परिवार में 7 सदस्य हैं इस हिसाब से मुझे राशन कार्ड पर 35 किलो राशन मिलना चाहिए लेकिन राशन डीलर 20 तो कभी 25 किलो राशन देता है विरोध करने पर राशन डीलर राजकुमार ने उसका राशन कार्ड काटने की धमकी दी है महिला ने राशन डीलर पर धक्का देकर डिपो से बाहर करने का भी आरोप लगाया है। एसा ही गाँव की, बालेश, आरती, सुमित्रा, कविता, अनीता, मिथिलेश, का भी कहना है कि राशन डीलर बीते काफी सालों से राशन वितरण मे मनमानी कर रहा है। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि जब कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है तो हम भी राशन डीलर की मर्जी से राशन लेने को मजबूर हैं।
अब आपको ये बताना भी भी जरूरी है कि बीते काफी समय से लगातार शिकायत होती रहती है मगर फ़िर भी स्तिथि मे कोई सुधार नहीं होता है। पूर्व मे ख़बर का प्रकाशन होने के बाद आनन-फानन मे लिस्ट से हज़ारों यूनिट ग़ायब हो गए थे जिनको फ़र्जी बताकर काट दिया गया था मगर फ़र्जी यूनिट चढ़े केसे इसका कोई जवाब आज तक नहीं मिला है।
सूत्रों की मानें तो डीलर ने गाँव मे ही सरकारी गल्ले को गबन करने की इंडस्ट्री भी लगा रखी है जिसमें रातों रात सरकारी राशन को ब्लेक से वाईट करने का काम पूरी ईमानदारी से चलता रहता है और पेसे का बंटाधार भी बराबर होता रहता है।ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से राशन डिपो होल्डर का लाइसेंस निरस्त किए जाने की मांग की




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