भू-माफियाओं से सांठगांठ के हाईवे को कर्तव्यपथ बनाने की और अग्रसर नगर पालिका देवबंद
- पूरे देवबंद नगर को कचरे का ढ़ेर बनाने के बाद सफाई का ढोंग, 8 दिनों से जारी है ढोंग का अभियान
- तीन साल तक हाईवे निर्माण के दौरान धूल फांकने के बाद जनता को क्या मिला...?
- 750 करोड़ की लागत से बने स्टेट हाईवे की देख रेख की जिम्मेदारी किसकी है, क्या कंपनी सिर्फ़ भारी भरकम टेक्स वसूलने के लिए है..?
दैनिक बुलन्द भारत -- ब्यूरो सहारनपुर
दीन रज़ा सिद्दिकी
देवबंद-- नगर पालिका परिषद के सफाई विभाग की ओर से 1 फरवरी से नगर में स्वच्छता अभियान जारी है जो की 31 मार्च तक डोर टू डोर जारी रहेगा देवबन्द को क्लीन बनाने के लिए घर घर जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आपके घर पर कोई जागरूक करने आए तो डस्टबीन का पूछ सकते हो।
ढोंग का ये अभियान फोटो खिंचा कर मीडिया मे प्रकाशित कराने तक सीमित है बीते दिनों मे सफाई कितनी हुई है सबके सामने है।
जागरुकता के इस अभियान मे ये भी बता दें कि देवबंद नगर की जनता नगर को साफ रखने के लिए कचरा डाले कहां डस्टबीन लगे हैं कहीं तो जागरुकता के इस अभियान में उन जगहों को चिन्हित कर दें जहां पर डस्टबीन लगे हुए हैं।
सावधान.... देवबंद मे कुत्ते लौट आए हैं..........!
नगर की हर गली कचरे से भरी पडी है जनता के पास कचरा फेंकने के लिए एक ही स्थान है सड़क सिर्फ़ और सिर्फ़ सड़क ढोंग के इस अभियान में जनता को ये भी बता दें कि विश्व विख्यात नगर देवबन्द को कूड़ा नगर बनाने मे किसका कितना योगदान है।
अब बात करें भू-माफियाओं से सांठगांठ के हाईवे -59 की जो 750 करोड़ रुपए लागत से बना हुआ है उपसा व एपको कम्पनी द्वारा निर्मित किया गया है।
साढे़ सात सौ करोड़ रुपये की लागत से बना स्टेट हाईवे-59 फोरलेन निर्माण के कुछ माह बाद ही घटिया सामाग्री लगाए जाने के कारण खस्ता हालत होने लगा था। इससे हाईवे का निर्माण कंपनी द्वारा देवबंद संग जमकर खिलवाड़ किया गया फ्लाईओवर के नीचे आबादी क्षेत्र में भूमाफिया से सांठगांठ कर हाईवे का स्वरूप बिगाड़ दिया गया देश की राजधानी दिल्ली से वाया मेरठ उत्तराखंड, हरियाणा व पंजाब को जोड़ने वाले बेहद महत्वपूर्ण हाईवे -59 को उपसा व एपको कम्पनी द्वारा फोरलेन किया गया था। जनपद मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे से जनपद सहारनपुर के गागलहेड़ी तक बनाए गए करीब पचास किमी के इस हाईवे से गुजरने वाले वाहनों को जाम से बचाने के लिए देवबंद के ऊपर से करीब चार किमी लम्बा पुल बनाया गया जिसके चलते देवबंद आबादी क्षेत्र में भूमि की वेल्यु कम हो गई।
भ्रष्टाचार का केंद्र बना हुआ है देवबंद पूर्ति विभाग
वहीं अधिकतर वाहन पुल के ऊपर से गुजर जाने के कारण लोगों के कारोबार भी प्रभावित हुए इन सबके बावजूद करीब तीन साल तक हाईवे निर्माण के दौरान धूल फांकने और सड़क चोड़ीकरण के नाम पर अपनी दुकान व मकान गंवाने वाले देवबंदवासियों को हाईवे पर सफर करना भी बेहद मंहगा पड़ रहा है। निर्माण कंपनी द्वारा देवबंद-रुहाना के बीच में टोल प्लाजा बनाया गया जहां पर आश्वासनों के बावजूद देवबंदवासियों को टोल में किसी तरह की कोई राहत आज तक नहीं मिली कंपनी उक्त मार्ग पर भारी भरकम टोल वसूल रही है और करीब दो दशकों तक टोल वसूलने का यह सिलसिला जारी रहेगा, जिससे हाईवे निर्माण करने वाली कंपनी को कई सौ करोड़ रुपये का लाभ होगा, लेकिन निर्माण कंपनी द्वारा देवबंद आबादी क्षेत्र में हाईवे निर्माण के नाम पर केवल खानापूर्ती की गई है, जिसके चलते सड़क गड्ढों में तबदील हो चुकी है। हैरत की बात तो यह है कि भारी भरकम टोल वसूलने के बावजूद भी कम्पनी इसकी देखरेख पर कोई ध्यान नहीं दे रही है सर्विस रोड निर्माण का कार्य बीच में छोड़ा हुआ है।
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आबादी क्षेत्र के ऊपर से बनाए गए करीब चार किमी लम्बे फ्लाईओवर के नीचे कम्पनी द्वारा कहीं चोड़ी तो कहीं पतली सर्विस लेन बनाई गई है, जबकि घोषणा के अनुसार सर्विस लेन, साइकिल लेन व फुटपाथ का निर्माण होना था। इतना ही नहीं विभिन्न स्थानों पर सड़क के बीच में खड़े कई धार्मिक स्थलों को अन्य स्थान पर शिफ्ट कराने के बजाए सड़क निर्माण का काम बीच में ही छोड़ दिया गया
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आबादी क्षेत्र में फ्लाईओवर के नीचे मानक अनुसार सर्विस रोड निर्माण कराने की मांग को लेकर शुरू से ही नगर के विभिन्न संगठन आंदोलनरत हैं। टोल में राहत व देवबंद आबादी क्षेत्र के भीतर सड़क सही किये जाने समेत अन्य मांगों को लेकर कई संगठन भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। निर्माण कम्पनी के अधिकारी मानक अनुरूप सड़क निर्माण का आश्वासन तो दे देते हैं लेकिन आज तक रोड़ नहीं दे पाए।
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