देवबंद विद्युत विभाग का बिजली घोटाला टाउन फीडर-3 बना भ्रष्टाचार का नया एपिसेंटर, अकेले 9 करोड़ 27 लाख की चोरी
- सच दिखाने पर पत्रकार को दिखाई जा रही लाल लाल आंखें, SDO और JE की नाक के नीचे चल रहा 'सेटिंग' का खेल! 9 करोड़ 27 लाख की 'हवा-हवाई' चोरी या सुनियोजित डकैती ?
- गरीबों पर चाबुक, धन्नासेठों को सलाम! 40 करोड़ डकारने वाले देवबंद विद्युत विभाग का 'काला चिट्ठा' और भ्रष्ट अफसरों की तानाशाही
देवबंद: सालाना 40 करोड़ रुपये के लाइन लॉस और राजस्व घाटे का रोना रोने वाला देवबंद का विद्युत विभाग इन दिनों अपनी नाकामी और महाभ्रष्टाचार के चलते सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी करने वाले 'टॉप 10' फीडरों की सूची में अकेले देवबंद के 4 फीडर शामिल होना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का एक जीता-जागता और शर्मनाक सुबूत है। फीडर नंबर 1 और 2 से हर साल हो रही 17 करोड़ की बिजली चोरी का काला चिट्ठा हम पहले ही खोल चुके हैं, लेकिन अब जो आंकड़े सामने आए हैं, वे किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी हैं।
देवबंद का 'टाउन फीडर-3' भ्रष्टाचार की एक नई मिसाल बन चुका है। अकेले इस फीडर से 9 करोड़ 27 लाख रुपये की बिजली हवा में गायब हो रही है! यह फीडर पूरे प्रदेश में सर्वाधिक बिजली चोरी वाले फीडरों में 5वें स्थान पर विराजमान है। इस फीडर के अंतर्गत शहर के प्रमुख इलाके आते हैं, जिनमें आबकारी रोड, कायस्थवाड़ा, शिव चौक, मिश्रा कॉलोनी, शिवपुरी कॉलोनी, HAV इंटर कॉलेज क्षेत्र, वाल्मीकि बस्ती और लाल फर्श आदि शामिल हैं। क्या 9 करोड़ 27 लाख रुपये की यह विशालकाय चोरी बिना विभागीय साठगांठ और अधिकारियों की मिलीभगत के मुमकिन है? यह कोई तकनीकी खामी नहीं, बल्कि जनता के पैसों की सरेआम डकैती है, जिसका जवाब विभाग को देना ही होगा।
इस पूरे खेल के असली 'मास्टरमाइंड' विभाग के अधिकारी ही हैं। साठगांठ और भ्रष्टाचार की बात करें तो जेई (JE) विष्णु कोठारी ने मानो इसमें 'पीएचडी' (PhD) कर रखी है। चाहे बिना विभागीय एस्टीमेट के पोल शिफ्ट करने का मामला हो, या भारी-भरकम बकाएदारों को गुपचुप तरीके से नए कनेक्शन बांटने का खेल, जेई साहब की महारत इसमें जगजाहिर हो चुकी है। दूसरी तरफ, एसडीओ (SDO) संतोष कुमार की कार्यप्रणाली तो और भी हास्यास्पद और दोगली है। पूरे शहर में बकाया वसूली का 'काल्पनिक भूत' नचाया जा रहा है।
एसडीओ साहब के दफ्तर की नाक के नीचे रसूखदार 'धन्नासेठों' पर लाखों रुपये का बकाया है, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, उन पर विभाग की पूरी 'मेहरबानी' है। लेकिन, इसी बकाया वसूली और बिजली चोरी के नाम पर विभाग के कर्मचारी गली-गली घूमकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपना आसान शिकार बना रहे हैं। जानबूझकर एक विशेष समुदाय और कमजोर वर्ग को टारगेट करके उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, ताकि विभाग अपनी 'कार्रवाई' का झूठा दिखावा कर सके।
भ्रष्टाचार की परतें दर-ब-दर उखड़ने से विभाग के इन भ्रष्ट अधिकारियों में भारी बौखलाहट है। अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से अब ये अधिकारी 'तानाशाही' पर उतर आए हैं। संविदा कर्मचारियों को ढाल बनाकर और मुकदमों का झूठा भय दिखाकर प्रेस की स्वतंत्रता का दमन करने की नापाक कोशिशें की जा रही हैं लेकिन देवबंद विद्युत विभाग के इन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों को यह समझ लेना चाहिए कि उनकी इन खोखली धमकियों से ना तो सच छिपने वाला है और ना ही कलम रुकने वाली है।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

