अमोनिया गैस लीक से फैक्ट्री में मची भगदड़, सवालों के घेरे में सुरक्षा इंतजाम, जांच में जुटा प्रशासन
- पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान के मीट प्लांट में गैस रिसाव, 14 महिला मजदूर अस्पताल पहुंचीं, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
- मीट प्लांट में गैस रिसाव का बड़ा हादसा: कई महिला कर्मचारी बेहोश, दो नाबालिग भी प्रभावित, जांच के घेरे में फैक्ट्री प्रबंधन
सहारनपुर। जनपद सहारनपुर के गागलहेड़ी थाना क्षेत्र स्थित एक मीट प्रोसेसिंग प्लांट में मंगलवार दोपहर अमोनिया गैस के रिसाव से अचानक अफरा-तफरी मच गई। प्लांट में काम कर रही महिला मजदूरों को अचानक सांस लेने में तकलीफ, घुटन और चक्कर आने लगे। देखते ही देखते कई महिलाएं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। घटना के बाद पूरे प्लांट परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि हादसे के समय प्लांट में करीब 250 महिला कर्मचारी विभिन्न इकाइयों में कार्य कर रही थीं। इनमें से 14 महिला मजदूरों की तबीयत बिगड़ गई, जबकि प्रभावित लोगों में दो नाबालिग लड़कियां भी शामिल हैं। साथी कर्मचारियों ने तत्काल सभी को बाहर निकाला और एंबुलेंस तथा अन्य वाहनों की मदद से अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर प्लांट के अंदर अचानक अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हुआ। कुछ ही मिनटों में गैस पूरे क्षेत्र में फैल गई, जिससे कर्मचारियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। कई महिलाओं को तेज खांसी, आंखों में जलन और चक्कर आने लगे। हालात बिगड़ते देख फैक्ट्री परिसर में भगदड़ मच गई। घटना की सूचना मिलते ही गागलहेड़ी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया और गैस रिसाव के कारणों की जांच शुरू कर दी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, उनमें सकीबा, नसरीन, गुलशन, सरवीन, रुखसार, नयना, निशा, मीसबा, मजरीन, फमीना, बानो, सरीन, नगमा सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश मरीजों की हालत फिलहाल नियंत्रण में है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। एक पीड़ित महिला कर्मचारी ने बताया कि अचानक गैस फैलने से उन्हें तेज खांसी और घुटन महसूस होने लगी। कुछ ही देर में कई कर्मचारी बेहोश हो गए और फिर उन्हें अस्पताल लाया गया यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अमोनिया जैसी जहरीली गैस का रिसाव न केवल कर्मचारियों के लिए बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
घटना के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था, गैस मॉनिटरिंग सिस्टम, आपातकालीन अलार्म, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खराबी का परिणाम था या सुरक्षा नियमों में लापरवाही की वजह से हुआ। जानकारी के अनुसार जिस एएलएम मीट प्लांट में यह हादसा हुआ, उसे पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि प्रशासन फिलहाल केवल हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सहारनपुर का यह हादसा केवल एक फैक्ट्री दुर्घटना नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल भी है। यदि किसी प्लांट में अमोनिया जैसी खतरनाक गैस का रिसाव होता है, तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि सुरक्षा उपकरण, अलार्म सिस्टम और आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाएं पर्याप्त थीं या नहीं। कर्मचारियों की सुरक्षा किसी भी उद्योग की पहली जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी रास्ता है।

