एंटी करप्शन का धमाका घूस लेते SDO दिनेश मौर्य और चमचा ऑपरेटर रंगे हाथों गिरफ्तार, महकमे में हड़कंप
- कमाल की बेशर्मी! खुद बिजली देने में फेल, SDO घूसकांड में जेल... और देवबंद की त्रस्त जनता के सामने थमा दी सहयोग की अपील'!
- मोटे बिलों का करंट, जलते पोल और SDO का घूसकांड! देवबंद में नरक बनी जिंदगी के बीच विभाग का मज़ाक जरा AC कम चलाओ साहब
- चोरी ऊपर से सीनाजोरी! इधर जर्जर व्यवस्था के बीच विभाग बोला जनता राष्ट्रहित में सहयोग करे जनता विभागीय अधिकारी चाटेंगे घूस की मलाई
देवबंद। भ्रष्टाचार के दलदल में कंठ तक डूबे अफसरों के खिलाफ देवबंद में आज एंटी करप्शन टीम ने वो 'सर्जिकल स्ट्राइक' की है, जिससे पूरे सहारनपुर मंडल के प्रशासनिक गलियारों में सांप लोट गया है। जनता का खून चूसने वाले और हर फाइल पर 'मलाई' मांगने वाले सरकारी बाबुओं को आज उनकी असली औकात दिखा दी गई। विद्युत निगम देवबंद के उपखंड अधिकारी (SDO) दिनेश कुमार मौर्य और उनके काले कारनामों के राजदार प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर मोहम्मद साकिर को एंटी करप्शन की टीम ने 20,000 रुपये की घूस लेते रंगे हाथों दबोच लिया है।
देवबंद के आम रास्ते या ‘VIP’ पार्किंग? देवबंद का हाल रास्ता बंद, रसूख बुलंद
गिरफ्तारी के बाद बिजली विभाग के लालवाला रोड स्थित दफ्तर में ऐसा सन्नाटा पसरा कि कई भ्रष्ट बाबू तो अपनी कुर्सियां छोड़कर ही भाग खड़े हुए ये पूरा मामला देवबंद थाना क्षेत्र के थीतकी गांव का है गांव के एक सीधे-साधे उपभोक्ता मोहम्मद अहरार ने अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए आटा चक्की का 6 किलोवॉट का कनेक्शन मांगा था उन्होंने 6 अप्रैल को ऑनलाइन आवेदन किया लेकिन रिश्वत की भूख में अंधे हो चुके SDO और उनके सिपहसालारों ने बिना किसी वजह के आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गरीब उपभोक्ता हारा नहीं उसने 18 मई को दोबारा आवेदन किया इस बार SDO दिनेश मौर्य ने खुलकर अपना असली रंग दिखाया और सही सर्वे रिपोर्ट लगाने के नाम पर 50 हज़ार की मोटी रकम की मांग कर डाली उपभोक्ता ने जब हाथ जोड़े कि हुजूर इतनी रकम नहीं है, तो सौदा तय हुआ—₹20,000 एडवांस और ₹30,000 काम होने के बाद देने होंगे SDO को लगा कि उन्होंने शिकार फंसा लिया है लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उपभोक्ता ने इस बार सीधे भ्रष्टाचार निवारण संगठन (Anti-Corruption Organization) सहारनपुर का दरवाजा खटखटा दिया विजिलेंस की टीम ने पहले पूरी बात की रिकॉर्डिंग की और शिकायत को 100% सही पाते हुए जाल बिछाया।
शुक्रवार दोपहर को एंटी करप्शन टीम के तेजतर्रार इंस्पेक्टर मुकेंद्र कुमार के नेतृत्व में भारी फोर्स ने देवबंद के देहात द्वितीय कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया जैसे ही शिकायतकर्ता ने केमिकल लगे नोट SDO और उसके गुर्गे मोहम्मद साकिर को थमाए वैसे ही घात लगाकर बैठी टीम ने धावा बोल दिया जब SDO दिनेश मौर्य के हाथ धुलवाए गए, तो नोटों पर लगा केमिकल पानी में गुलाबी होकर बिखर गया यही वो सबूत था जिसने SDO के सफेदपोश चेहरे को बेनकाब कर दिया शुरुआती चर्चाओं में अफवाह उड़ी कि टीम दोनों को गाजियाबाद ले गई है लेकिन ताजा और पुख्ता जानकारी के मुताबिक एंटी करप्शन की टीम दोनों आरोपियों को दबोचकर सीधे नागल थाने पहुंची वहां दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
अभी देवबंद के उपभोक्ता SDO दिनेश मौर्य के घूसकांड के एक दिन पहले ही विद्युत विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनता के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया था विभाग ने बड़े ही मासूम अंदाज़ में विद्युत उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए एक पत्र जारी किया था इस सरकारी चिट्ठी में ज्ञान बांटा गया था कि अत्यधिक गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है इसलिए उपभोक्ता पंखे, कूलर और एसी (24°C - 26°C पर) का सीमित उपयोग करें और बिजली बचाकर राष्ट्रहित में योगदान दें तो सीधा सवाल ये की किस बात का सहयोग मांग रहा था विभाग? अपील जारी करने वाले एयर-कंडीशनर कमरों में बैठे बड़े अफसरों से देवबंद की त्रस्त जनता आज सीधे और कड़े सवाल पूछ रही है रातें काली, वोल्टेज गायब देवबंद नगर और देहात के इलाकों में भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमरा चुकी है रात-रात भर बत्ती गुल रहती है, जिससे लोगों की रातें काली हो रही हैं अगर बिजली आती भी है, तो वोल्टेज इतना कम होता है कि पंखे मक्खी की तरह घूमते हैं और कूलर पानी फेंकने के बजाय सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रहे हैं वहीँ देवबंद नगर में जर्जर तारों और ओवरलोडिंग का यह आलम है कि सड़कों पर लगे विद्युत पोल और ट्रांसफार्मर आए दिन धू-धू कर जल रहे हैं विभाग के पास न तो मेंटेनेंस का कोई प्लान है और न ही सुचारू सप्लाई का मग़र ज्ञान को कोई कमी नही है।
सवाल ये भी अहम है कि जनता को बिजली मिले न मिले लेकिन हर महीने मोटे-मोटे बिजली के बिल वक्त पर थमा दिए जाते हैं बढ़े हुए और फर्जी बिलों को ठीक कराने के नाम पर दफ्तरों में SDO जैसे अफसर हजारों की घूस मांगते हैं जब जनता को निर्बाध बिजली देने की बारी आती है, तो आपका सिस्टम पूरी तरह विफल साबित होता है जब भ्रष्टाचार रोकने की बात आती है तो आपके SDO रंगे हाथों घूस लेते पकड़े जाते हैं लेकिन जब अपनी नाकामी छिपानी हो तो राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण का झुनझुना लेकर जनता के सामने कटोरा लेकर खड़े हो जाते हैं देवबंद की जनता पूछ रही है कि जब आपके दफ्तर घूसखोरी के अड्डे बन चुके हैं पोल जल रहे हैं, और रातें काली हैं, तो जनता किस बात का और क्यों सहयोग करे? पहले अपनी व्यवस्था सुधारिए, भ्रष्टाचारियों पर झाड़ू चलाइए, फिर जनता से सहयोग की उम्मीद कीजिए!
आखिरी बात साल 2007 से नौकरी कर रहे SDO दिनेश मौर्य और 2021 से संविदा पर तैनात ऑपरेटर साकिर को शायद लगता था कि सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता को चूसना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। लेकिन एंटी करप्शन की इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि पाप का घड़ा एक दिन भरता जरूर है अब देखना यह है कि बिजली विभाग इस महा-भ्रष्टाचारी SDO पर क्या कड़ा एक्शन लेता है, या फिर साहब सस्पेंशन का मजा लेकर कुछ दिन बाद फिर किसी नए दफ्तर में दुकान खोल लेंगे?





