टाउन फीडर नंबर 1' का खौफनाक सच SDM कोर्ट और वीआईपी रेलवे रोड की नाक के नीचे ₹8 करोड़ का डाका आम जनता पर ठीकरा, अपनों पर मेहरबानी?

टाउन फीडर नंबर 1 का खौफनाक सच SDM कोर्ट और वीआईपी रेलवे रोड की नाक के नीचे ₹8 करोड़ का डाका आम जनता पर ठीकरा, अपनों पर मेहरबानी?

  • 40 करोड़ के राजस्व को डकारने वाले 'सफेदपोशों' पर मेहरबानी क्यों? भ्रष्ट अधिकारियों, लाइनमैनों और उनके दलालों की संपत्ति की कब होगी जांच? 40 करोड़ के 'ब्लैक होल' मे किसका कितना हिस्सा ? 
  • कागजों में चेकिंग, हकीकत में 'सेटिंग': तीसरे दिन भी जारी रहा विभाग का ड्रामा, 121 परिसरों की जांच में सिर्फ 12 मीटर बदले, पर कटिया का सुबूत सिफर
  • नाकामी का 'ग्रैंड स्लैम': मुख्य अभियंता राजेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रविंद्र बाबू, जेई विष्णु कोठारी और SDO संतोष कुमार तीसरे दिन भी एक 'कटिया' का सुबूत देने में पूरी तरह फेल!

देवबंद। सालाना 40 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व को निगलने वाला देवबंद का विद्युत विभाग इन दिनों अपने महाघोटाले पर लीपापोती करने के लिए एक बेहद भद्दा मजाक कर रहा है। पिछले तीन दिनों से शहर में चेकिंग का जो 'नौटंकी अभियान' चलाया जा रहा है, उसका असल मकसद बिजली चोरी रोकना नहीं, बल्कि उन भ्रष्ट अधिकारियों, लाइनमैनों, संविदा कर्मचारियों और विभाग के साये में पल रहे चमचों को बचाना है जो इस 40 करोड़ की डकैती के असली सूत्रधार हैं। हैरानी इस बात की है कि देवबंद का स्थानीय 'लश्करे मीडिया' भी विभाग की इस कागजी बाजीगरी को एक बड़ी सफलता के तौर पर पेश कर रहा है। आज जनता का सीधा सवाल है: विभाग को करोड़ों का चूना लगाने वाले इन अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

देवबंद में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड योजना का शुभारंभ, शिक्षकों व कर्मचारियों को मिले सांकेतिक कार्ड

विद्युत विभाग के भ्रष्टाचार की जड़ें देवबंद के वीआईपी और प्रशासनिक इलाकों तक किस कदर गहराई तक धंसी हुई हैं, इसका सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत है 'टाउन फीडर नंबर 1' (शासन की सूची में टाउन-1 रसूखदारों का गढ़ इस फीडर के अंतर्गत देवबंद का सबसे पॉश और प्रशासनिक इलाका आता है। इसमें खुद SDM कोर्ट, मुख्य रेलवे रोड, मजनू वाला रोड, पंजाबी कॉलोनी, सरायपीरजादगान और गड्ढा कॉलोनी जैसे बड़े व्यापारिक और रिहायशी क्षेत्र शामिल हैं। सरकारी आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि अकेले इस वीआईपी फीडर से विभाग को हर साल 7 करोड़ 98 लाख रुपये (लगभग 8 करोड़) के राजस्व का सीधा चूना लग रहा है। इस हाई-प्रोफाइल फीडर पर 62.76 प्रतिशत का AT&C लॉस (बिजली चोरी व घाटा) दर्ज है।

विद्युत विभाग के तलवे चाटते 'लश्करे-चाटुकार' और VIP कॉलोनियों से खौफ खाता PAC बल! देवबंद में 'कटिया' के नाम पर चल रहा गोरखधंधा

सवाल यह है जिस फीडर क्षेत्र में खुद SDM कोर्ट और पूरा प्रशासनिक अमला बैठता हो, जहाँ शहर का मुख्य व्यापार होता हो, वहां 63% बिजली हवा में कैसे गायब हो रही है? क्या विभाग के अधिकारी यह कहना चाहते हैं कि प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम कटिया डालकर चोरी चल रही है? जब इन सभी मुख्य इलाकों में सालों पहले मजबूत इंसुलेटेड ABC (Aerial Bunched Cable) डाल दिए गए थे, जिन पर सीधे कटिया डालना तकनीकी रूप से असंभव है, तो फिर यह 8 करोड़ का डाका कौन डाल रहा है? शहर का बच्चा-बच्चा जानता है कि बड़े-बड़े शोरूम, रसूखदार और कारखानेदार लाइनमैनों से 'मलाईदार साठगांठ' करके बाईपास का खेल खेल रहे हैं।

देवबंद में बिजली चोरी रोकने का अभियान या विभागीय ढोंग? पहले लाइनमैनों ने हटवाई कटिया, फिर पीएसी के साथ चेकिंग कर बनाई सफलता की कहानी!

लखनऊ से रिपोर्ट आने के बाद देवबंद में जो हड़कंप का दिखावा किया जा रहा है, उसकी सच्चाई बेहद हास्यास्पद है। मुख्य अभियंता राजेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रविंद्र बाबू, अवर अभियंता विष्णु कोठारी, और एसडीओ संतोष कुमार की निगरानी में यह पूरा अभियान पूरी तरह से फ्लॉप और दिशाहीन साबित हुआ है। लखनऊ की रिपोर्ट में जिन 'टाउन फीडरों' का स्पष्ट उल्लेख है, वहां चेकिंग करने से इन अधिकारियों के पैर कांप रहे हैं। रेलवे रोड की आलीशान कोठियों और पंजाबी कॉलोनी के मगरमच्छों के दरवाजों पर दस्तक देने की इनकी हिम्मत नहीं हो रही है। इसके बजाय, यह विभाग पीएसी का दल-बल लेकर मलिन और गरीब बस्तियों में खौफ पैदा कर रहा है।

लाखों की रिश्वत देकर नौकरी पाने वाले संविदाकर्मियों पर कब गिरेगी गाज? क्य़ा लाइनमैन ही बन बैठे हैं चोरी के मास्टरमाइंड

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति की कलई खोलते तथ्य दो टीमों ने मिलकर कुल 121 परिसरों की सघन जांच की। नतीजा? सिर्फ 11 लोगों के पुराने मीटर बदलकर नए लगाए गए। बाकी 110 परिसरों में क्या मिला? इसका जवाब सरकारी प्रेस नोट में नहीं है। विभाग प्रेस नोट में धड़ल्ले से लिख रहा है कि 'सूचना मिलने पर लोगों ने कटिया हटा ली'। अरे साहब, जब अभियान आप चला रहे हैं, तो यह सूचना लीक कौन कर रहा है? तीन दिन तक भारी भरकम पीएसी बल लेकर घूमने के बावजूद, दो टीमें मिलकर एक भी कटिया का सुबूत (फोटो/वीडियो) मीडिया या जनता के सामने पेश करने में नाकाम रही हैं। लोड कम होने (160 एम्पियर से 110 एम्पियर) की बाजीगरी दिखाकर सिर्फ कागजों का पेट भरा जा रहा है।

SDM देवबंद ने समाधान दिवस में अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

अगर सालाना 40 करोड़ की चपत लग रही थी, तो मुख्य अभियंता राजेश कुमार, अवर अभियंता विष्णु कोठारी, अधीक्षण अभियंता रविंद्र बाबू, और एसडीओ संतोष कुमार इतने महीनों से क्या कर रहे थे? अगर उन्होंने पहले कुछ नहीं किया, तो आज लखनऊ से फटकार पड़ने के बाद भी वे असली चोरों (टाउन फीडर 1 के रसूखदारों) पर कार्रवाई करने के बजाय गरीब उपभोक्ताओं को प्रताड़ित क्यों कर रहे हैं? यह आंकड़े और हालिया नौटंकी साबित करती है कि देवबंद में बिजली चोरी 'हो नहीं रही, बल्कि विभाग के भ्रष्ट तंत्र द्वारा बाकायदा मलाईदार सैटलमेंट के तहत कराई जा रही है'। 

रिपोर्ट - दीन रज़ा





Deen Raza

DRD NEWS 24 देवबंद (सहारनपुर) का एक स्वतंत्र न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो निष्पक्ष पत्रकारिता, जनहित के मुद्दों और स्थानीय खबरों को प्राथमिकता देता है।"

एक टिप्पणी भेजें

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

और नया पुराने