घूस लेते कैमरे में कैद हुआ दरोगा! नाबालिग पीड़िता के परिवार से 30 हजार वसूली का आरोप, अब सरकारी पिस्टल लेकर फरार
- 'FIR लिखवानी है तो पैसे दो' — सीक्रेट वीडियो ने खोली दरोगा की करतूत, SSP ने किया सस्पेंड
- मिशन शक्ति को झटका: छेड़छाड़ पीड़िता से रिश्वत लेने का आरोप, मुकदमा दर्ज होते ही फरार हुआ चौकी प्रभारी
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से पुलिस विभाग को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जिस पुलिस पर पीड़ितों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी होती है, उसी पुलिस के एक अधिकारी पर नाबालिग पीड़िता के परिवार से रिश्वत लेने और मुकदमा दर्ज करने के नाम पर उगाही करने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
लोधा थाना क्षेत्र में तैनात चौकी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर रोहित कुमार तोमर पर आरोप है कि उन्होंने छेड़छाड़ की शिकार एक नाबालिग किशोरी के परिवार से एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने के नाम पर 30 हजार रुपये की रिश्वत ली। इतना ही नहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि दरोगा ने उन पर दबाव बनाकर तहरीर में बदलाव भी कराया।
देवबंद समाधान दिवस में 68 फरियादी पहुंचे, लेकिन सिर्फ 5 शिकायतों का निस्तारण
जानकारी के अनुसार 17 मई को लोधा थाना क्षेत्र के एक गांव में 14 वर्षीय किशोरी के साथ घर में घुसकर छेड़छाड़ और अश्लील हरकत किए जाने का आरोप सामने आया था। न्याय की उम्मीद लेकर जब पीड़ित परिवार पुलिस के पास पहुंचा तो उन्हें कार्रवाई के बजाय दबाव का सामना करना पड़ा। आरोप है कि चौकी प्रभारी ने पीड़ित परिवार को यह कहकर डराया कि दूसरे पक्ष की ओर से भी उनके खिलाफ शिकायत दी जा चुकी है और यदि कानूनी कार्रवाई से बचना है तो उनकी बात माननी होगी। इसके बाद कथित रूप से पीड़ित पक्ष से तहरीर बदलवाई गई और मुकदमा दर्ज करने के एवज में 30 हजार रुपये की मांग की गई।
लगातार चक्कर लगाने के बाद भी जब मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो पीड़ित परिवार ने सबूत जुटाने का फैसला किया। आरोप है कि एक पूर्व प्रधान के घर पर रुपये लेते समय दरोगा का वीडियो मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया गया। इसके बाद पीड़ित परिवार सीधे अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नीरज कुमार जादौन के पास पहुंचा और वीडियो के साथ पूरी शिकायत सौंप दी। वीडियो देखने के बाद एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए।
पूनम मित्तल हत्याकांड का खुलासा! पुलिस मुठभेड़ के बाद दो आरोपी गिरफ्तार, एक के पैर में लगी गोली
एसएसपी के निर्देश पर एसपी सिटी आदित्य बंसल को मामले की जांच सौंपी गई। प्रारंभिक जांच में वीडियो और पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सब-इंस्पेक्टर रोहित कुमार तोमर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी दरोगा सरकारी पिस्टल और कारतूस लेकर फरार हो गया। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित कर दी गई हैं और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है एक तरफ पुलिस को भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच पूरी करनी है, वहीं दूसरी ओर सरकारी हथियार के साथ फरार आरोपी दरोगा की गिरफ्तारी भी बड़ी चुनौती बन गई है। पुलिस सर्विलांस और तकनीकी माध्यमों से उसकी लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास कर रही है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप एक ऐसी घटना से जुड़ा है जिसमें एक नाबालिग बच्ची न्याय की उम्मीद लेकर पुलिस के पास पहुंची थी। यदि जांच में आरोप पूरी तरह सही साबित होते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि पुलिस व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस की नजर बनी हुई है और फरार दरोगा की तलाश जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरोपी की गिरफ्तारी कब होती है और जांच में आगे क्या नए तथ्य सामने आते हैं।

