देवबंद में भ्रष्टाचारियों पर लगाम का दावा फेल! नीले गेट के पास पालिका की नजूल जमीन पर खुलेआम कब्जा, जिम्मेदार बने अनजान
- अध्यक्ष जी का ‘जीरो टॉलरेंस’ हवा-हवाई: देवबंद हाईवे पर नजूल संपत्ति पर धड़ल्ले से चिनी जा रही ईंटें, पालिका प्रशासन ने साधी चुप्पी
- पहले काम रुकवाया, अब किस ‘आदेश’ से दोबारा शुरू हुआ अवैध निर्माण? देवबंद पालिका की सरकारी जमीनों पर कब्जे का बड़ा खेल
देवबंद। नगर पालिका परिषद देवबंद के मौजूदा चेयरमैन चुनाव के समय भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने और सरकारी संपत्तियों की रक्षा का ऐतिहासिक दम भरकर कुर्सी पर काबिज हुए थे। नगरवासियों को उम्मीद थी कि अब नगर में अवैध कब्जों और घपलेबाजी पर पूरी तरह रोक लगेगी, लेकिन आज जिस रफ्तार से नगर पालिका की कीमती नजूल भूमियों पर अवैध निर्माण का खेल चल रहा है, उसने पूरे नगर को सकते में डाल दिया है।
ताजा मामला नगर के मुख्य हाईवे स्थित ‘नीले गेट’ के ठीक बराबर का है, जहां नगर पालिका परिषद की बेशकीमती नजूल भूमि पर दिनदहाड़े ईंट-गारे का अवैध ढांचा खड़ा किया जा रहा है। मौके पर खुलेआम मजदूर लगाकर दीवारें उठाई जा रही हैं और बल्लियां बांधकर छत व पक्के निर्माण की पूरी तैयारी की जा चुकी है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी की शह और राजनीतिक रसूख के दम पर इस बेशकीमती नजूल जमीन को हड़पने की साजिश रची जा रही है।
जब इस गंभीर मामले को लेकर नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने पूरे मामले से ऐसे पल्ला झाड़ लिया मानो उन्हें शहर के मुख्य हाईवे पर हो रहे इस निर्माण की कोई भनक ही न हो। अफसरों का यह लापरवाह और टालमटोल भरा रवैया खुद कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। जब शहर के सबसे व्यस्त हाईवे पर, मुख्य द्वार के बगल में खुलेआम सरकारी जमीन पर कब्जा हो रहा है और अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं, तो फिर नगर के अंदरूनी और दूर-दराज इलाकों में स्थित नजूल संपत्तियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही मानी जाएगी।
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स्थानीय नागरिकों और आसपास के दुकानदारों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही नगर पालिका की टीम ने मौके पर पहुंचकर इस निर्माण कार्य को अवैध बताते हुए रुकवा दिया था। ऐसे में सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन ने एक बार काम बंद करा दिया था, तो आखिर रातों-रात ऐसा कौन सा नियम बदल गया या किस अदालत का आदेश आ गया कि वहां दोबारा धड़ल्ले से हथौड़े और कन्नी चलने लगे?
क्या यह निर्माण पालिका प्रशासन की मिलीभगत और कथित 'मौन सहमति' के दम पर दोबारा शुरू कराया गया है? नगर की जनता अब सीधे तौर पर पालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मंशा पर सवाल उठा रही है कि क्या सरकारी जमीनों को इसी तरह रसूखदारों के हवाले कर दिया जाएगा या उच्चाधिकारी संज्ञान लेकर इस अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलवाएंगे।
रिपोर्ट - दीन रज़ा




