विद्युत विभाग के तलवे चाटते 'लश्करे-चाटुकार' और VIP कॉलोनियों से खौफ खाता PAC बल! देवबंद में 'कटिया' के नाम पर चल रहा गोरखधंधा
- XEN मृत्युंजय शाही जवाब दें जब पूरे देवबंद में ABC केबल है, तो 'कटिया' कैसे डल गई? लाइनमैन खुद खेल रहे आंख-मिचौली, और बिकाऊ मीडिया गा रहा सफलता के झूठे गीत
- सबूत नदारद, 'कटिया' गायब और लोड कम होने का फर्जी ड्रामा! देवबंद में स्मार्ट मीटर थोपने के लिए आम जनता पर कहर, बड़े धन्नासेठों पर मेहरबान है विद्युत विभाग
देवबंद। बिजली चोरी रोकने और 'घर-घर जांच' के नाम पर पीएसी (PAC) बल के भारी लश्कर के साथ जो तमाशा देवबंद की सड़कों पर रचा जा रहा है, उसका हाई-वोल्टेज ड्रामा दूसरे दिन भी जारी रहा। लेकिन इस पूरे तथाकथित अभियान में सबसे दिलचस्प और शर्मनाक बात यह रही कि दूसरे दिन भी विभाग की गाड़ियां किसी 'वीआईपी कॉलोनी', बड़े कारखानों या रसूखदारों के आलीशान प्रतिष्ठानों की तरफ मुड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। विभाग का पूरा ज़ोर सिर्फ गरीब और मध्यमवर्गीय बस्तियों में दहशत फैलाने, छोटे उपभोक्ताओं को प्रताड़ित करने और उन्हें डरा-धमका कर जबरन स्मार्ट मीटर थोपने पर रहा।
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इस पूरे फर्जीवाड़े में विभाग से भी ज्यादा घिनौनी भूमिका देवबंद के उस 'लश्करे-चाटुकार' (कथित मीडिया) की रही है, जो दिन-रात विभागीय अधिकारियों के तलवे चाटने में मग्न है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण कल ही देखने को मिला, जब विभाग ने अपने सरकारी प्रेस नोट में बाकायदा लिखकर जानकारी दी कि 'चेकिंग के बाद टाउन फीडर का लोड 350 एम्पीयर से घटकर 200 एम्पीयर रह गया'। लेकिन अपनी तलवे चाटने की पैदाइशी आदत से मजबूर इन लश्करे-चाटुकारों ने अपनी खबरों में झूठ का तड़का लगाते हुए दिखा दिया कि 'लोड 400 से घटकर 200 पर आ गया था'! इन चाटुकारों के पास विभाग के पीआर (PR) एजेंट बनकर ऐसी भ्रामक और चमचागिरी से भरी खबरें छापने का तो पूरा समय है, लेकिन विभाग के खुले भ्रष्टाचार, ठेके के लाइनमैनों की अवैध वसूली और ओवर-बिलिंग पर बोलने के लिए इनके पास एक भी सवाल नहीं होता।
विभाग के अपने आंकड़े ही अब उनके गले की फांस बन चुके हैं। कल का प्रेस नोट बड़े गर्व से कहता है कि 171 परिसरों की जांच की गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल 20 लोगों के कनेक्शन काटे गए और सिर्फ 2 लोगों पर FIR हुई। आखिर बाकी के 151 परिसरों में क्या मिला? क्या वहां सब कुछ दूध का धुला था, जब हमारे संवाददाता ने इस रहस्यमयी खामोशी पर विभागीय अधिकारियों से फोन पर जवाब मांगा, तो साहब अपनी बगलें झांकने लगे और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। साफ है कि आंकड़ों की यह बाजीगरी सिर्फ लखनऊ बैठे उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए की गई थी ताकि अपनी अकर्मण्यता को छुपाया जा सके।
अब आते हैं 'कटिया' हटाने के उस महा-झूठ पर जिसका ढिंढोरा पीटा जा रहा है। जब देवबंद विद्युत विभाग ने सालों पहले ही नगर की संकरी गलियों में भी पुराने नंगे तारों को हटाकर मोटे ABC (Aerial Bunched Cable) डाल दिए थे, तो हमारा सीधा सवाल एक्सईएन मृत्युंजय कुमार शाही से है क्या ABC केबल पर कटिया डाली जा सकती है? शायद इसका विस्तृत जवाब कल के प्रेस नोट में लिखा मिल जाए, इतनी उम्मीद तो देवबंद विद्युत विभाग से की जा सकती है।
विधूत विशेषज्ञों का कहना है कि ABC केबल पूरी तरह से इंसुलेटेड (प्लास्टिक से ढके) होते हैं इन पर अगर कोई नंगा तार या हुक फेंका जाए, तो करंट बाहर आ ही नहीं सकता क्योंकि प्लास्टिक बिजली को ब्लॉक करता है। ABC केबल के अंदर तीनों फेज और न्यूट्रल के तार आपस में बहुत मजबूती से लिपटे होते हैं। अगर कोई इस पर जबरन कटिया फंसाने के लिए केबल को छीलने या काटने की कोशिश करेगा, तो दोनों तार आपस में छूते ही भयानक ब्लास्ट (शॉर्ट सर्किट) होगा। इससे कटिया डालने वाले की जान को सीधा खतरा रहता है और पूरा फीडर तुरंत ट्रिप हो जाता है।
जब तकनीकी रूप से ABC केबल पर कटिया डालना मुमकिन ही नहीं है, तो फिर कटिया हटा कौन रहा था? सच्चाई यह है कि दो दिनों के इस भारी-भरकम अभियान में विभाग ने सार्वजनिक रूप से 'कटिया' का एक भी सुबूत (फोटो या वीडियो) जनता के सामने नहीं दिखाया। सुबूत मिलेगा भी कैसे? जब विभाग के अपने भ्रष्ट लाइनमैन और संविदाकर्मी खुद ही मोटी रिश्वत लेकर अंदरूनी तौर पर चोरी कराते हैं और चेकिंग के दौरान खुद ही आगे दौड़कर उसे हटा देते हैं। ऐसे में चेकिंग के दौरान लोड कम होना एक बेहद 'कॉमन बात' है, जिसे विभाग बिजली चोरी रुकने का नाम देकर अपनी फर्जी पीठ थपथपा रहा है।
दूसरी तरफ, नगर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि कुछ रसूखदार उपभोक्ता, जिनके घरों में एयर कंडीशनर (AC) चल रहे हैं, वे कथित रूप से लाइनमैनों से सांठगांठ कर कटिया या बाईपास के जरिए बिजली का अंधाधुंध उपयोग करते हैं। जहां हजारों रुपये का बिल आना चाहिए, वहां मामूली मासिक रकम देकर अनियमित तरीके से बिजली का उपभोग किया जा रहा है और विभाग इन बड़े मगरमच्छों पर पूरी तरह मेहरबान है।
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देवबंद विद्युत विभाग का यह अभियान बिजली चोरी रोकने के लिए नहीं, बल्कि अपने आंतरिक भ्रष्टाचार, जर्जर पोल, फुंकते ट्रांसफार्मरों और मनमाने बिलों (जो स्मार्ट मीटर लगने के बाद) जनता की गाढ़ी कमाई की जेब को ढीला कर रहे हैं जनता का ध्यान भटकाने का एक जरिया मात्र है जब तक सूचना लीक करने वाले लाइनमैनों और बड़े कारखाना मालिकों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक जनता विभाग के हर दावे को 'ढोंग' और स्थानीय बिकाऊ मीडिया को 'चाटुकार' ही मानेगी।
रिपोर्ट - दीन रज़ा




