किसानों को मजबूत किए बिना विकसित भारत का सपना अधूरा: भगत सिंह वर्मा
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की फिर उठी मांग, हरिद्वार में गरजे भगत सिंह वर्मा
- महात्मा डॉ. पहल सिंह सैनी को पद्मश्री देने की मांग, समाजसेवा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार
बिनडू खड़क (हरिद्वार) उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद स्थित बिनडू खड़क में आयोजित भगीरथ विकलांग सेवा संस्थान के 42वें वार्षिक समारोह में देश, समाज, किसान और विकास के मुद्दे प्रमुखता से छाए रहे। समारोह को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन वर्मा तथा पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने किसानों की आर्थिक स्थिति, कृषि क्षेत्र की चुनौतियों, युवाओं के रोजगार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पृथक राज्य बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष महात्मा डॉ. पहल सिंह सैनी के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, किसान, बुद्धिजीवी और क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे अपने संबोधन में भगत सिंह वर्मा ने कहा कि भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, लेकिन आज भी देश का अन्नदाता किसान आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की आय नहीं बढ़ेगी, उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित नहीं होगा और उनकी क्रय शक्ति मजबूत नहीं बनेगी, तब तक देश की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह मजबूत नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव, किसान और कृषि को विकास की मुख्यधारा में लाया जाएगा। केंद्र सरकार को किसानों के हित में ठोस और दूरगामी फैसले लेने होंगे तथा कृषि क्षेत्र को लाभकारी बनाने के लिए किसान नेताओं और कृषि विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि आज भी कृषि क्षेत्र देश के करोड़ों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। यदि सरकार कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करे तो बेरोजगारी की बड़ी समस्या का समाधान संभव है।
उन्होंने समाजसेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हैं, इतिहास उन्हें सदियों तक याद रखता है। उन्होंने शहीद-ए-आजम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अशफाक उल्ला खान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों का योगदान आज भी देश के लिए प्रेरणा स्रोत है। भगत सिंह वर्मा ने समारोह के आयोजक महात्मा डॉ. पहल सिंह सैनी की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. सैनी चिकित्सा, आयुर्वेद, स्वदेशी और दिव्यांगजन सेवा के क्षेत्र में लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। समाज और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार को उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करने पर विचार करना चाहिए।
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अपने संबोधन में उन्होंने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पृथक राज्य बनाए जाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है। प्रशासनिक सुगमता और तेज विकास के लिए बड़े राज्यों का पुनर्गठन समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से संसद में इस विषय पर चर्चा कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों को मिलाकर अलग 'पश्चिम प्रदेश' बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि छोटे राज्य विकास और प्रशासनिक दक्षता के बेहतर मॉडल साबित हुए हैं। उत्तराखंड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने अलग राज्य बनने के बाद कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवा, किसान हितों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर बल दिया। समारोह का समापन समाज और राष्ट्र की उन्नति के संकल्प के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने किसानों, दिव्यांगजनों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

