बिजली विभाग की 'वसूली नीति' सुपरफास्ट, लेकिन जनता को राहत देने में फेल! पहली ही गर्मी में फुंका 33KV केबल, 6 घंटे से अंधेरे और गर्मी में तड़प रहा देवबंद

बिजली विभाग की 'वसूली नीति' सुपरफास्ट, लेकिन जनता को राहत देने में फेल! पहली ही गर्मी में फुंका 33KV केबल, 6 घंटे से अंधेरे और गर्मी में तड़प रहा देवबंद 

  • जनता से लाखों की वसूली, लेकिन व्यवस्था फेल! देवबंद में 33KV केबल फुंकने से खुली बिजली विभाग की 'कागजी मेंटेनेंस' की पोल
  • देवबंद बिजली विभाग की लापरवाही से आधा शहर अंधेरे और गर्मी से बेहाल, जनता में भारी आक्रोश, क्य़ा जनता के सवालों का जवाब देंगे उपखंड अधिकारी संतोष कुमार

देवबंद। विद्युत विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उपभोक्ताओं से बकाया वसूली और कनेक्शन काटने में फुर्ती दिखाने वाला विभाग अपने ही सिस्टम के रखरखाव के मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। नतीजा यह है कि भीषण गर्मी और उमस के बीच नगर के टाउन फीडर नंबर-4, 5 और 7 से जुड़े हजारों उपभोक्ता घंटों तक अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि मुख्य 33KV लाइन का केबल अचानक फुंक जाने से आधे से अधिक शहर की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बीते करीब छह घंटे से चल रही इस बड़ी तकनीकी खराबी ने विभाग के उन तमाम दावों की पोल खोल दी, जिनमें गर्मी से पहले व्यापक मेंटेनेंस और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।

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हाल ही में उपखंड अधिकारी (एसडीओ) संतोष कुमार के नेतृत्व में विभाग ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े स्तर पर अभियान चलाकर लाखों रुपये की वसूली की। बकाया बिल जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए और करोड़ों की राजस्व वसूली का दावा भी किया गया। लेकिन अब जब मुख्य लाइन में बड़ा फाल्ट आ गया, तो जनता सवाल पूछ रही है, जब वसूली अभियान चलाने के लिए विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ, वाहन और संसाधन उपलब्ध हैं, तो बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए वही गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती? - गर्मी शुरू होने से पहले किए गए तथाकथित 'मेंटेनेंस' का आखिर हुआ क्या? - यदि समय रहते सिस्टम की सही जांच की गई होती, तो क्या मुख्य 33KV केबल इस तरह फुंकता?

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घटना स्थल से सामने आई तस्वीरों ने विभाग के दावों पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों रुपये का राजस्व वसूलने वाला विभाग आपातकालीन स्थिति में आधुनिक उपकरणों के बजाय टॉर्च की रोशनी में फाल्ट तलाशता नजर आया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब उपभोक्ता समय पर बिल जमा कर रहे हैं, तो उन्हें निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना भी विभाग की जिम्मेदारी है। आखिर जनता कब तक शटडाउन, फाल्ट और तकनीकी खराबी के नाम पर परेशान होती रहेगी?

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हर वर्ष गर्मी शुरू होने से पहले विभाग कई-कई घंटे का शटडाउन लेकर मेंटेनेंस कार्य करने का दावा करता है। लेकिन पहली ही भीषण गर्मी में मुख्य लाइन का केबल जल जाना इस पूरे अभियान पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। क्या मेंटेनेंस केवल कागजों तक सीमित था? क्या निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है? क्या करोड़ों रुपये का बजट सही दिशा में खर्च हो रहा है? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब बिजली विभाग के अधिकारियों को जनता के सामने देना होगा।

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घंटों बिजली गुल रहने से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा। यदि बकाया वसूली में विभाग 'सुपरफास्ट' है, तो फाल्ट दूर करने और आपूर्ति बहाल करने में भी उसी तेजी का परिचय देना चाहिए। जनता अब केवल संदेशों और आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी। देवबंद की जनता को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली चाहिए, न कि हर गर्मी में बार-बार अंधेरे और परेशानियों का सामना। यदि जर्जर बिजली व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में जनाक्रोश और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट: दीन रज़ा







Deen Raza

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