आपातकाल के वो काले दिन: "सत्ता के लालच में की गई थी लोकतंत्र की हत्या! देवबंद में अंडरग्राउंड रहकर 'अंगारा और बम' अखबार बांटने वाले सेनानियों पर दीपक राज सिंघल का बड़ा बयान

आपातकाल के वो काले दिन: "सत्ता के लालच में की गई थी लोकतंत्र की हत्या! देवबंद में अंडरग्राउंड रहकर 'अंगारा और बम' अखबार बांटने वाले सेनानियों पर दीपक राज सिंघल का बड़ा बयान

  • 51 साल पहले जब संघ पर लगा था प्रतिबंध  देवबंद के इन सूरमाओं ने अंडरग्राउंड रहकर हिलाई थी तानाशाही की हुकूमत; आज भाजपा की मजबूती में हैं 'नींव के पत्थर'
  • हाईकोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाकर थोपी गई थी कालरात्रि आपातकाल के खौफनाक दौर को याद कर भावुक हुए भाजपा नेता दीपक राज सिंघल; देवबंद के स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन

देवबंद। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून का दिन एक ऐसे काले धब्बे के रूप में दर्ज है, जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। भाजपा के वरिष्ठ नेता और के.एल. जनता इंटर कॉलेज के प्रबंधक दीपक राज सिंघल ने आपातकाल (Emergency) की 51वीं बरसी पर एक बेहद तीखा और ऐतिहासिक ब्यान जारी करते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर सीधा प्रहार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आपातकाल कुछ और नहीं, बल्कि सत्ता पर अवैध कब्जा बनाए रखने, लोकतंत्र की सरेआम हत्या करने, तानाशाही थोपने और विपक्ष को पूरी तरह समाप्त करने की एक ऐसी 'कालरात्रि' थी, जिसने देश को बरसों पीछे धकेल दिया।

बिजली विभाग की 'वसूली नीति' सुपरफास्ट, लेकिन जनता को राहत देने में फेल! पहली ही गर्मी में फुंका 33KV केबल, 6 घंटे से अंधेरे और गर्मी में तड़प रहा देवबंद

दीपक राज सिंघल ने 51 वर्ष पूर्व के उन खौफनाक दिनों को याद करते हुए बताया कि आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता को हर हाल में कायम रखने के लिए हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध जाकर पूरे देश में आपातकाल लागू कर दिया था। वे बताते हैं उस समय मैं फिरोजाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 'संघ शिक्षा वर्ग' का द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण (OTC) ले रहा था। हालात इतने नाजुक हो गए थे कि उस प्रशिक्षण वर्ग को समय से पूर्व ही संपन्न करना पड़ा। देवबंद वापस आते ही हमने भांप लिया था कि क्या होने वाला है, और सबसे पहले हनुमान चौक स्थित संघ कार्यालय को खाली किया।

उम्मीद के मुताबिक, ठीक 4 जुलाई को संघ पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके तुरंत बाद संघ के देशभक्त कार्यकर्ताओं और विपक्ष के नेताओं की दनादन गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। प्रेस की आजादी को पूरी तरह कुचल दिया गया, अखबारों पर पाबंदी लगा दी गई और हालात ऐसे थे कि कोई भी खुलकर अपनी बात नहीं रख सकता था; सच छापने पर पूरी तरह पहरा था। दीपक राज सिंघल जी ने बताया कि इस तानाशाही के आगे घुटने टेकने के बजाय देवबंद में अंडरग्राउंड (भूमिगत) रहते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में ऐतिहासिक सहभागिता प्रारंभ की गई।

देवबंद में नशे के सौदागरों पर पुलिस का शिकंजा, 11.5 ग्राम स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार; क्या अब टूटेगा नशे का नेटवर्क?

जब सच छापने वाले प्रेस बंद कर दिए गए, तब जनता तक हकीकत पहुँचाने के लिए नित्य प्रति साइक्लोस्टाइल (हाथ से लिखे और छपे) गुप्त न्यूज़ पत्र निकाले जाते थे, जिनके नाम अंगारा और बम जैसे आक्रामक होते थे। इन पत्रों को अंडरग्राउंड रहकर चोरी-छिपे पूरी मुस्तैदी से जनता के बीच वितरित किया जाता था ताकि क्रांति की लौ जलती रहे दीपक राज सिंघल ने इस आंदोलन में देवबंद नगर और देहात क्षेत्र से अपनी जान हथेली पर रखकर कूदने वाले उन महान राष्ट्रभक्तों को याद किया, जिन्होंने तानाशाही के खिलाफ बिगुल फूंका था:

देवबंद नगर से अग्रिम पंक्ति के नायक तत्कालीन जनसंघ अध्यक्ष पंडित रामकिशन जी, राजकिशोर गुप्ता, ओमप्रकाश गर्ग, महेंद्र पाल कंबोज, स्वराज कुमार जैन, जगदीश प्रसाद बंसल, राजकुमार गर्ग, अमरनाथ भारती, देशराज साइकिल वाले, देवी दत्ता मल, विजेंद्र वर्मा, सुनील जैन और विपिन भारतीय। देहात और ग्रामीण क्षेत्रों के सूरमा भायला के ठाकुर रणसिंह, लखनोती के धर्मवीर त्यागी, अंबेहटा के बाबू धर्मवीर त्यागी (संघचालक), अंबोली के चौधरी रतीराम और कुरड़ी के राजकुमार त्यागी।

सड़क पर हाथापाई से लेकर अस्पताल में हाईवोल्टेज ड्रामे तक! देवबंद CHC के वायरल वीडियो का क्या है असली सच ?

सिंघल जी ने भावुक होकर कहा कि आज केंद्र और प्रदेश में जो भाजपा की मजबूत सरकारें और संगठन दिखाई दे रहे हैं, उसकी असली वजह यही लोग हैं। इन जैसे अनेकों राष्ट्रभक्तों ने अपनी जवानी का सबसे अमूल्य और महत्वपूर्ण समय देश और संगठन के लिए जेलों में और अंडरग्राउंड रहकर न्योछावर कर दिया आपातकाल की 51वीं बरसी पर दीपक राज सिंघल का यह बयान हमें याद दिलाता है कि आज हम जिस लोकतांत्रिक खुली हवा में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे हमारे बुजुर्गों का कितना बड़ा त्याग और संघर्ष छुपा हुआ है। सत्ता के अहंकार में जब संविधान को बंधक बनाया गया था, तब देवबंद के इन लालों ने 'अंगारा' और 'बम' जैसे पत्रों के माध्यम से तानाशाही की चूलें हिला दी थीं।

रिपोर्ट - दीन रज़ा






Deen Raza

DRD NEWS 24 देवबंद (सहारनपुर) का एक स्वतंत्र न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो निष्पक्ष पत्रकारिता, जनहित के मुद्दों और स्थानीय खबरों को प्राथमिकता देता है।"

एक टिप्पणी भेजें

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

और नया पुराने