देवबंद में रात 1:40 बजे का 'खुला खेल', क्या उप जिलाधिकारी कार्यालय और तहसील प्रशासन ने मूंद रखी हैं आंखें?

देवबंद में रात 1:40 बजे का 'खुला खेल', क्या उप जिलाधिकारी कार्यालय और तहसील प्रशासन ने मूंद रखी हैं आंखें?

  • रात के अंधेरे में देवबंद की सड़कों पर दहाड़तीं ट्रैक्टर-ट्रालियां! पुलिस खामोश, तहसील मौन... आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह सब?
  • मटकोटा से लेकर सैनी सराये तक रात भर ट्रैक्टर-ट्रालियों का तांडव, देवबंद के जिम्मेदार आखिर क्यों ओढ़े हैं खामोशी की चादर?

देवबंद। आज हम किसी सुनी-सुनाई बात पर चर्चा नहीं करेंगे। आज बात होगी सीधे उन पुख्ता सबूतों के साथ, जो देवबंद के स्थानीय प्रशासनिक अमले और स्थानीय पुलिस की 'मुस्तैदी' के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी हैं। जब पूरा शहर सो रहा होता है, तब देवबंद की सड़कों पर क्या खेल चलता है, आज उसकी परत-दर-परत खोलेंगे। तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं, इसलिए पहले आप ये लाइव गवाहियां देख लीजिए तस्वीर 1 (मटकोटा, देवबंद) को गौर से देखिए। 

यह रविवार, 28 जून 2026 की रात के पौने दो बजे (01:45 AM) का नजारा है। मटकोटा की इस सड़क पर मिट्टी से लदी यह ट्रैक्टर-ट्राली सीना तानकर बेखौफ निकल रही है। तस्वीर 2 (अमन गार्डन के सामने, सैनी सराये) पर नजर डालिए। 

ठीक उसी रात, महज दो मिनट पहले यानी कल रात ही (01:43 AM) अमन गार्डन के सामने से ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्राली हेडलाइट चमकाती हुई गुजर रही है। रिहायशी इलाके में ये ट्रैक्टर-ट्रालियां पूरी रफ्तार से दौड़ रही हैं। तस्वीर 3 (महर्षि वाल्मीकि कॉलोनी के पास) तीसरी गवाही  दे रही है। 

रात के ठीक 1:40 बजे का यह मंजर है, जहाँ देवबंद के अलग-अलग कोनों से ये ट्रैक्टर-ट्रालियां आराम से मुख्य रास्तों पर फर्राटा भर रही हैं। हमारा सीधा सवाल है देवबंद तहसील और SDM कार्यालय को यह खेल क्यूं दिखाई नही दे रहा है? ट्रैक्टर-ट्रालियां देवबंद की सड़कों पर इतनी बेफिक्री से तभी दौड़ सकती हैं, जब उन्हें स्थानीय जिम्मेदार तंत्र का मौन समर्थन हासिल हो। हमारा सीधा और कड़वा सवाल देवबंद तहसील प्रशासन, उप जिलाधिकारी (SDM) कार्यालय और स्थानीय पुलिस से है SDM कार्यालय की नाक के नीचे यह अनदेखी क्यों? तहसील और उप जिलाधिकारी कार्यालय की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र में हो रहे नियमों के उल्लंघन और अवैध परिवहन पर पैनी नजर रखें। जब ईदगाह रोड, महल्ला बिरियान और सैनी सराये जैसी घनी आबादी वाले इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की नींद इन भारी-भरकम ट्रैक्टर-ट्रालियों के शोर से हराम हो रही है, तो तहसील के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर मौन व्रत क्यों धारण किए हुए हैं?

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इन तस्वीरों में जीपीएस लोकेशन, सटीक समय के साथ सब कुछ शीशे की तरह साफ है। क्या रात में औचक निरीक्षण करने का दावा करने वाली देवबंद तहसील की राजस्व टीमें और स्थानीय पुलिस इतनी पंगु हो चुकी हैं कि उन्हें ये ट्रैक्टर-ट्रालियां कभी दिखाई ही नहीं देतीं? या फिर सब कुछ जानकर भी अनजान बने रहने का कोई 'विशेष' कारण है? बीते कई दिनों से लगातार इन ट्रैक्टर-ट्रालियों का शोर लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। पूर्व में खबर प्रकाशित होने के बावजूद महकमे का असर महज चार से पांच दिन में खत्म हो गया। आखिर देवबंद का यह स्थानीय अमला आम जनता को राहत देने के बजाय इस पूरे मामले पर गहरी नींद सोने का नाटक क्यों कर रहा है?

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अगर ये लाइव तस्वीरें सोशल मीडिया और आम जनता तक आसानी से पहुंच सकती हैं, तो यह नामुमकिन है कि देवबंद तहसील प्रशासन और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक न हो। अब देखना यह है कि इन पुख्ता सबूतों के सामने आने के बाद भी उप जिलाधिकारी कार्यालय और तहसील के जिम्मेदार अपनी आंखें बंद रखते हैं, या फिर देवबंद की साख बचाने के लिए धरातल पर कोई कड़ा एक्शन लेकर दिखाते हैं?

रिपोर्ट - दीन रज़ा 






Deen Raza

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