देवबंद में 'विधायक' के अहंकार के खिलाफ बगावत अनिल पुंडीर के शक्ति प्रदर्शन में गरजे दिग्गज पार्टी किसी की बपौती नहीं, हिटलरशाही का अंत तय
- देवबंद भाजपा में आर-पार: वर्तमान विधायक की तानाशाही और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता; अनिल पुंडीर ने ठोकी 2027 की दावेदारी
- देवबंद का सियासी पारा गर्म जनता जनार्दन है, कुर्सी बदलते देर नहीं लगती" पूर्व सांसद राघव लखनपाल ने वर्तमान विधायक की 'गलतफहमी' पर किया करारा प्रहार
- देवबंद की धरती पर बदलाव की बयार: अपनों के ही खिलाफ क्यों फूटा भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा? वर्तमान विधायक के उत्पीड़न से दुखी भाजपा कार्यकर्ता
- कार्यकर्ताओं पर ही दर्ज कराए फर्जी मुकदमे, 10 साल की हिटलरशाही का अंत करेगी जनता : शशि त्यागी
देवबंद। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट ने देवबंद के सियासी मैदान में अभी से बारूद भर दिया है। मंगलवार को रेलवे रोड के निकट भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख पति ठाकुर अनिल सिंह पुंडीर के नए केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन हुआ। कहने को तो यह एक जनसंपर्क कार्यालय का उद्घाटन था, लेकिन कार्यक्रम में उमड़े हजारों समर्थकों के हुजूम और नेताओं के तीखे बयानों ने इसे सीधे तौर पर वर्तमान विधायक के खिलाफ एक खुला विद्रोह और महा-शक्ति प्रदर्शन बना दिया देवबंद की जनता और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के भीतर वर्तमान विधायक की कार्यशैली को लेकर जो गुबार लंबे समय से सुलग रहा था, वह मंगलवार को मंच से लावा बनकर फूट पड़ा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने बिना नाम लिए वर्तमान विधायक के अहंकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला। उन्होंने भरे मंच से कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान को हवा देते हुए कहा देवबंद में कुछ लोग इस गलतफहमी का शिकार हो चुके हैं कि वे यहाँ 25 सालों तक राज करेंगे। उनका यह अहंकार इस क्षेत्र की देवतुल्य जनता का अपमान है। वे शायद भूल गए हैं कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है, और जब वह करवट बदलती है तो बड़े-बड़े सियासी सूरमाओं के तख्तो-ताज हवा में उड़ जाते हैं। यह भारतीय जनता पार्टी किसी के घर की खेती नहीं है, न ही किसी की बपौती है। यह करोड़ों जमीनी कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से सींची गई पार्टी है। टिकट उसे ही मिलेगा जिसे क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ता चाहेंगे।
राघव लखनपाल के इस बयान ने साफ कर दिया कि संगठन के भीतर अब वर्तमान विधायक की तानाशाही को बर्दाश्त करने के मूड में कोई नहीं है वर्तमान विधायक से लोगों और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी कितनी गहरी है, इसका अंदाजा पूर्व जिला पंचायत सदस्य शशि त्यागी के तीखे भाषण से लगाया जा सकता है। उन्होंने मंच से विधायक की 'हिटलरशाही' का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए कहा कि देवबंद में एक अति-अहंकारी नेता ने सिर्फ जनता का शोषण ही नहीं किया, बल्कि सत्ता के मद में चूर होकर अपनी ही पार्टी के उन वफादार कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए, जिन्होंने उन्हें कुर्सी तक पहुँचाया था। त्यागी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पिछले 10 वर्षों से देवबंद की जनता जिस तानाशाही और उत्पीड़न को झेल रही थी, उसका घड़ा अब भर चुका है। अब जनता चुप नहीं बैठेगी, बल्कि सड़कों पर उतरकर इस अहंकार का करारा जवाब देगी।
हजारों की भीड़ और सर्वसमाज के भारी समर्थन से उत्साहित भाजपा नेता ठाकुर अनिल सिंह पुंडीर ने सीधे वर्तमान विधायक की नाकामियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि आज देवबंद का आम नागरिक, किसान, गरीब और मजदूर अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। विधायक जनता से दूर हो चुके हैं और क्षेत्र की समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो रहा है। अपनी चुनावी हुंकार भरते हुए अनिल पुंडीर ने कहा जनता की इसी बेबसी को देखकर मैंने इस कार्यालय की शुरुआत की है, ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी न्याय मिल सके। मुझे पूरा भरोसा है कि हाईकमान देवबंद की जनता की इस कराह को सुनेगा और 2027 के चुनाव में मुझे प्रत्याशी बनाएगा। सर्वसमाज मेरे साथ है और हम मिलकर देवबंद को इस अहंकार और कुशासन से मुक्ति दिलाएंगे।
सहारनपुर नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष हरीश मलिक और भाजपा जिला अध्यक्ष मेला राम पवार ने भी माना कि देवबंद के कार्यकर्ताओं का दर्द जायज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और उनके उत्पीड़न की इस आवाज को पूरी मजबूती के साथ लखनऊ और दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (हाईकमान) के सामने रखा जाएगा। इस बड़े राजनीतिक जमावड़े में पूर्व प्रमुख विजेंद्र चौधरी, जिला पंचायत सदस्य अरविंद राणा, डॉ. किरण पाल जगरौली, विजेंद्र सिंह, मनोज सिंह पुंडी, सुशील प्रधान, सुमित मलिक, विकास त्यागी, दीपक राज सिंघल और ठाकुर सुरेंद्र पाल एडवोकेट जैसे क्षेत्र के सभी प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि वर्तमान विधायक अब अपनी ही पार्टी के भीतर पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुके हैं। यह कोई सामान्य राजनीतिक उठापटक नहीं है। जब एक ही सत्ताधारी दल के पूर्व सांसद, जिला अध्यक्ष, पूर्व ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य एक साथ एक मंच पर आकर अपने ही वर्तमान विधायक के खिलाफ 'अहंकार', 'शोषण' और 'हिटलरशाही' जैसे गंभीर आरोप लगाने लगें, तो समझ जाना चाहिए कि बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है।
वर्तमान विधायक की जनता से दूरी, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और 'मैं ही सर्वोपरि हूँ' वाले रवैये ने उनके खिलाफ एक बहुत बड़ी 'एंटी-इंकंबेंसी' (नाराज़गी) पैदा कर दी है। ठाकुर अनिल सिंह पुंडीर ने सही समय पर जनता की इस नब्ज को पकड़ा है और सर्वसमाज को साथ लेकर अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व इस अंदरूनी बगावत को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है, लेकिन एक बात साफ है— देवबंद की जनता इस बार अहंकार को उखाड़ फेंकने के मूड में नजर आ रही है।
रिपोर्ट - दीन रज़ा






